

ईरान की दो टूक बातचीत से इंकार नहीं, लेकिन धमकी से झुक कर मरना पंसद करेंगे, बातचीत करनी है तो लाए लहजे में नरमी
नई दिल्ली। अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत की कोई सूरत नजर नहीं आ रही है । दोनों ही देश बातचीत से लगातार दूर होते जा रहे हैं। अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत के रास्ते लगभग बंद हो चुके हैं और दोनों देश एक बार फिर सीधे युद्ध के मुहाने पर खड़े हैं। पाकिस्तान की मध्यस्थता में हुई अस्थायी सीजफायर बेअसर साबित हुई है और दोनों पक्ष अपनी-अपनी जिद पर अड़े हुए हैं। अमेरिका के राष्ट्रपति की धमकी के बाद ईरान की ओर से बेहद तीखा पलटवार किया गया है। ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने कहा कि अमेरिका से बातचीत से इनकार करना तर्कसंगत नहीं है। उन्होंने साफ किया कि ईरान सम्मान के साथ वार्ता करेगा, लेकिन अपने राष्ट्रीय हितों और अधिकारों से कोई समझौता नहीं करेगा। इससे हले, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को जल्द फैसला लेने की धमकी दी थी। पश्चिमी मीडिया का दावा है कि दोनों मुल्क बातचीत नहीं जंग की ओर बढ़ रहे हैं।
ट्रंप की धमकी कुछ नहीं बचेगा
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर लिखा, ईरान के लिए समय निकलता जा रहा है और उन्हें जल्दी कदम उठाने चाहिए। नहीं तो उनका कुछ भी नहीं बचेगा। समय बहुत अहम है। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को नई चेतावनी जारी की, क्योंकि यूरेनियम भंडार, प्रतिबंधों में राहत और पश्चिम एशिया में महीनों से जारी संघर्ष के बाद मुआवजे को लेकर बातचीत रुकी हुई है। लेकिन सबसे बड़ी रूकावट ईरान का एटमी प्रोग्राम है। पहले ईरान इस पर कुछ नरम था, लेकिन बाद में ट्रंप के बदले अंदाज ने ईरानियों का रूख भी बदल दिया।
होर्मूज स्ट्रेट पर पेंच फंसा
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के लिए ईरानी मिसाइलों की निगेहबानी में फंसे स्ट्रेट होर्मूज को खुलवाना गले की फांस बना हुआ है। ट्रंप के चीन दौरे के बाद अमेरिकियों की अब रही सही उम्मीदें भी खत्म हो गयी हैं। चीन ने साफ कर दिया कि वह ईरान पर किसी भी प्रकार का गलत प्रेशर नहीं डालेगा। दरअसल स्ट्रेट हाेर्मूज भले ही दुनिया के लिए बंद हो, लेकिन चीनी जहाजों की वहां से आवाजाही बेरोकटोक जारी है।
गाजा में नरसंहार के हालात
गाजा में इजरायली बमबारी से नरसंहार के हालात बने हुए हैं। हालांकि अमेरिका हमलों को बचाव करते हुए बयान दे रहा है कि इजरायल को अपनी सुरक्षा का अधिकार है, लेकिन ईरान और दुनिया के ज्यादातर देश गाजा में इजरायली कार्रवाई को नरसंहार बता रहे हैं। एक रिपोर्ट में कहा गया है कि लेबनान में मरने वालों की संख्या तीन हजार के पार जा चुकी है। गाजा शहर पूरी तरह से कब्रिस्तान बन चुका है। उसको दोबारा पुरानी सूरत में लाने के लिए अथाह धन और समय की जरूरत है। लेकिन दुनिया के तमाम देशों की पहली प्राथमिकता गाजा पर इजरायली हमलों का रोकना है।


