






ऋषभ एकडेमी में आचार्य श्री 108 सौरभ सागर जी महाराज का मंगल प्रवेश व प्रवचन के अलावा कई कार्यक्रमों का आयोजन
मेरठ। ऋषभ एकेडमी में प्रवचन करते हुए आचार्य श्री 108 सौरभ सागर जी महाराज ने कहा कि ज्ञान विरासत में नहीं मिलता। शिक्षक के ज्ञान को विद्यार्थियों द्वारा पतंग की डोर की भांति समेटना चाहिए। हम अनैतिकता में कितने ही ऊंचे उड़ जाए लेकिन जब शिक्षा की ज्ञान रूपी डोर को समेटना आरंभ कर देते हैं तब हम अपने आप को समझने लगते है। आचार्य श्री ने विद्यार्थियों को व्यावहारिक और धार्मिक शिक्षा विभिन्न कहानियों के माध्यम से दी। । उनके प्रवचनों का मूल आधार था, शिक्षक के द्वारा ज्ञान की प्राप्ति से जीवन का दृष्टिकोण बनाना। इस मौके पर मेरठ के के अलावा दूसरे शहरों से भी जैन समुदाय के लोग पहुंचे थे। आचार्य श्री के प्रवचनों से सम्बंधित छात्र/छात्राओं से प्रश्नोत्तर किये गए जिसमे विद्यालय के 6 विद्यार्थियों द्वारा सही उत्तर दिया गया जिसमे विद्यालय द्वारा उन 6 विद्यार्थियो को पुरस्कृत किया गया। करीब दो हजार जैन श्रद्धालु वहां जमा हुए। इसके बाद आचार्य श्री की आहारचर्या शिरोमणि परम संरक्षक सदस्य राजेंद्र जैन जी जोधामाल परिवार के निवास स्थान पर संपन्न हुआ।
मंगल प्रवेश संस्कार शिविर
इससे पूर्व ऋषभ पहुंचने पर विद्यालय की प्रबंधक समिति के सदस्यों एवं अध्यापकगण ने आचार्य श्री का विद्यालय के द्वार पर पाद- प्रक्षालन किया। इसके बाद आने सभी श्रद्धालुओं एवम स्कूल स्टाफ के लिए सूक्ष्म जलपान की व्यवस्था थी। तत्पश्चात प्रातः 07:30 बजे से 08:00 तक संस्कार शिविर का आयोजन किया गया जिसमे विद्यालय के उप प्रधानाचार्य पवन कपूर, श्रीमती आशा गर्ग व श्रीमती प्रीति शर्मा के द्वारा छात्र/छात्राओं मे नैतिक शिक्षा एवं अच्छे संस्कारो को अपनाने के लिए प्रेरित किया गया। तत्पश्चात प्रातः 08:00 बजे शिरोमणि परम संरक्षक सदस्य श्री राजेंद्र जैन, अध्यक्ष श्री दिनेश चंद जैन, सचिव डॉक्टर संजय कुमार जैन जी (सी० ए०), कोषाध्यक्ष योगेंद्र प्रकाश द्वारा 1008 मंशापूर्ण महावीर भगवान एवं आचार्य श्री पुष्पदंत सागर जी महाराज के चित्र का अनावरण करके दीप प्रज्ज्वलन किया गया।
विद्यालय के प्रधानाचार्य शरद त्यागी, उप प्रधानाचार्य पवन कपूरव विद्यालय के अध्यापक/अध्यापिकाओं द्वारा आचार्य श्री के चरणों में श्रीफल भेंट किए गए। विद्यालय के विद्यार्थियों व अध्यापिकाओं द्वारा स्वागत गान, भक्ति गीत, नाटिका, आरती व नृत्य आदि सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए गए। तत्पश्चात प्रातः 08:30 से 09:30 तक आचार्य श्री 108 सौरभ सागर जी महाराज के द्वारा विद्यार्थियों एवं सभी श्रद्धालुओं के लिए आशीर्वाद हेतु सम्बोधन किया गया।
विद्यालय द्वारा आने वाले सभी श्रद्धालुओं एवम स्कूल स्टाफ के लिए दोपहर में सुरुचि भोजन व्यवस्था की गयी थी। जिसमे विभिन्न प्रकार के व्यंजनों को सभी लोगो ने आनंद पूर्वक ग्रहण किया। इसके बाद डॉ यशिका जैन, मेघा जैन द्वारा एक मोटिवेशनल शिविर का आयोजन किया जिसमे छात्र / छात्राओं को अपनी शिक्षा के प्रति ध्यान केंद्रित करने हेतु विभिन्न प्रकार की क्रियाओं को करने का तरीका बताया गया। जिसका सभी छात्र/छात्राओं ने पूर्ण लाभ उठाया। इसके बाद दोपहर 03:00 आचार्य श्री के शंका समाधान शिविर मे स्कूल स्टाफ व भारी संख्या मे उपस्थित जनसमूह ने अपनी शंकाओं का समाधान महाराज के आशीषवचनो से प्राप्त किया। डॉ यशिका जैन, मेघा जैन अवं उनकी टीम के द्वारा दोपहर 03:30 बजे नेचुरोपैथी शिविर का आयोजन किया गया। जिसमे सभी लोगो ने बढ़-चढ़ हिस्सा लिया और अपनी बिमारियों के उपाय के बारे मे जानकारी प्राप्त की। जिसका सभी ने लाभ उठाया।
शाम को 06:00 से गुरु भक्ति के कार्यक्रम का आयोजन किया जिसमे काव्य-पाठ राष्ट्र कवि डॉ० सौरभ जैन “सुमन” डॉ० अनामिका जैन “अंबर” एवं अंकिता जैन, भजन गायिका, मुज्जफरनगर के द्वारा गुरुवर के चरणों में भजन प्रस्तुत किए। इसके बाद आचार्य श्री की भव्य आरती 1000 दीपकों व राजस्थानी लोकनृत्य कलाकारों द्वारा सुन्दर प्रस्तुति के साथ सम्पन्न की गयी। लकी ड्रॉ द्वारा लगभग 250 विजेताओं को पुरस्कृत किया गया।
इनका रहा सहयोग
कार्यक्रम का संचालन विद्यालय अध्यक्ष श्री दिनेश चंद जैन जी, श्रीमती वर्षा जैन द्वारा किया। कार्यक्रम के संयोजन में श्रीमती चारू जैन का विशेष सहयोग रहा। आचार्य श्री 108 सौरभ सागर जी महाराज के कार्यक्रम को सुचारु रूप व्यवस्थित करने व संचालन करने मे शिरोमणि परम संरक्षक सदस्य श्री राजेंद्र कुमार जैन, विद्यालय अध्यक्ष – श्री दिनेश चंद जैन, सचिव – डॉक्टर संजय कुमार जैन (सी० ए०), कोषाध्यक्ष – श्री योगेंद्र प्रकाश जैन, श्री अरुण कुमार जैन, श्री अजय जैन, श्री अदिश जैन, प्रधानाचार्य श्री शरद त्यागी, उप प्रधानाचार्य – श्री पवन कपूर का विशेष सहयोग रहा।विद्यालय द्वारा इस कार्यक्रम में उपस्थित सभी आगंतुकों के लिए जलपान की व्यवस्था भी रही।


