
गौमुख व हरिद्वार से लेकर कांवड़ियों के गंतव्य तक चाक-चौबंद होंगे सुरक्षा के इंतजमाम, ड्रोन से की जाएगी निगरानी
मेरठ। सीएम के निर्देश पर 30 जुलाई से शुरू होने जा रही कांवड़ यात्र की तैयारियों का जायजा लेने पहुंचे मुख्य सचिव एसपी गोयल व पुलिस महानिदेशक राजीव कृष्ण ने कहा कि कांवड़ यात्रा के दौरान रूट पर मीट और शराब की दुकानें बंद रहेंगी। कांवड़ रूट पर हेलिकॉप्टर, ड्रोन और सीसीटीवी से नजर रखी जाएगी। कांवड़ यात्रा के दौरान शहरी क्षेत्र में भारी वाहनों के प्रवेश पर रोक रहेगी। वहीं, एक लेन कांवड़ियों के लिए रिजर्व रहेंगे। दूसरे लेन में छोटे वाहन चलेंगे। डीजीपी ने कहा कि कांवड़ यात्रा के साथ चलने वाले डीजे की आवाज 75 डेसिबल से ज्यादा नहीं होगी। डीजे की हाइट 12 फीट से अधिक नहीं होगी। डाक कांवड़ में रेस न कराने के निर्देश दिए गए हैं।
अलर्ट पर खुफिया ऐजेंसियां
कांवड़ यात्रा शांति पूर्वक संपन्न कराने के लिए केंद्र के निर्देश पर खुफिया ऐजेंसियों को अलर्ट के लिए स्टैंडबाई पर कर दिया है। डॉग स्क्वायड, बम निरोधक दस्ता, आईबी, खुफिया विभाग और एलआईयू की टीम को भी एक्टिव किया गया है। इस वर्ष कांवड़ यात्रा 30 जुलाई से शुरू हो रही है। 11 अगस्त को शिवरात्रि पर लाखों शिव भक्त कांवड़िये भगवान शिव का जलाभिषेक करेंगे। यूपी, हरियाणा, दिल्ली से कांवड़िए हरिद्वार पहुंचेंगे। हरिद्वार और गोमुख से जल उठाएंगे। ऐसे में सुरक्षा को पुख्ता रखने पर जोर दिया गया है। कांवड़ यात्रा की निगरानी डोन से भी करायी जाएगी।
मुख्य सचिव का सुविधाओं पर बल
शासन के मुख्य सचिव एसपी गोयल ने इंजमाम संभालने वाले अफसरों को कांवड़ियों को सुविधा प्रदान किए जाने के निर्देश दिए हैं। कांवड़ियों के लिए तैयार होने वाले शिविरों को तय मानक पर निर्मित करने का निर्देश दिया। कांवड़ रूट की साफ-सफाई पर विशेष जोर दिया। साथ ही, इस रूट पर हर जगह लाइटिंग, पानी निकासी और अन्य सुविधाओं को तय समय में पूरा कराने के निर्देश दिए। मुख्य सचिव ने कहा कि किसी कांवड़िए का अगर रास्ते में किसी कारण से कांवड़ खंडित होता है, तो उन्हें तत्काल गंगाजल उपलब्ध कराया जाएगा। मुख्य सचिव ने इसके लिए पहले ही गंगाजल की व्यवस्था करके रखने का निर्देश दिया है। इसके लिए प्रशासन के स्तर पर टीमें हरिद्वार से जल मंगाकर रखेंगी। कांवड़ सेवा शिविर में भोजन की गुणवत्ता की नियमित जांच होगी। उन्होंने कहा कि कांवड़ उठाने की जगहों, स्नान घाटों, प्रमुख मंदिरों और जलाभिषेक स्थलों पर सुरक्षा, भीड़ प्रबंधन, स्वच्छता और मेडिकल सुविधाएं बेहतर होनी चाहिए।


