नितिन गड़करी का इस्तीफे का संकेत

Shekhar Sharma
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केंद्रीय मंत्री नितिन गड़करी ने नागपुर में एक कार्यक्रम में खुद दिए इस बात के संकेत, बोले पहले जितना काम नहीं कर पाता अब

नई दिल्ली। केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने नागपुर में एक कार्यक्रम के दौरान कहा कि अब वह पहले जितना काम नहीं कर पाते हैं और नई पीढ़ी को जिम्मेदारी संभालनी चाहिए, जिससे राजनीतिक हलकों में चर्चा शुरू हो गई है। नागपुर के काटोल में एक कार्यक्रम के दौरान उन्होंने कहा, “मैं पिछले 30 सालों से सार्वजनिक जीवन में लगातार काम कर रहा हूँ। मैंने कई उतार-चढ़ाव देखे हैं… लेकिन अब मैं पहले जितना सामाजिक काम नहीं कर पा रहा हूँ, इसलिए नई पीढ़ी को इस जिम्मेदारी को आगे बढ़ाने का मौका दिया जाना चाहिए।” राजनीतिक विश्लेषक इसे सक्रिय चुनावी राजनीति या कैबिनेट मंत्री के पद से एक “क्रमिक बदलाव” (Gradual Shift) के संकेत के रूप में देख रहे हैं। हालांकि, जब तक वे खुद या भारतीय जनता पार्टी (BJP) इस पर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं करती, तब तक उनके राजनीति छोड़ने की खबरें महज कयास और अटकलें हैं

मौजूद हैं तमाम वजह

उनके इस बयान को कई लोगों ने उनके सक्रिय राजनीति से संभावित संन्यास या केंद्रीय कैबिनेट में बदलाव के संकेत के रूप में देखना शुरू कर दिया। इसके अलावा, हाल के दिनों में E20 इथेनॉल ईंधन नीति और बुनियादी ढांचे (सड़कों और पुलों) की गुणवत्ता को लेकर विपक्ष और सोशल मीडिया पर उनसे इस्तीफे की मांग की जा रही थी। कई वाहन मालिकों ने E20 ईंधन से माइलेज घटने और इंजन की परफॉर्मेंस पर असर पड़ने की शिकायतें की हैं, जिससे जनता में असंतोष बढ़ा है। हालांकि, गडकरी ने स्पष्ट किया है कि यह नीति उनके सड़क परिवहन मंत्रालय के तहत नहीं, बल्कि पेट्रोलियम मंत्रालय के अधीन आती है और उनके खिलाफ झूठा प्रचार किया जा रहा है। हाल के हफ्तों में सरकार की E20 (इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल) नीति को लेकर विपक्ष और सोशल मीडिया पर तीखी आलोचना हो रही है। विपक्षी दल इसके खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं और उनके इस्तीफे की मांग कर रहे हैं। देश के कुछ हिस्सों में हाल ही में बने पुलों और सड़कों में आई दिक्कतों या हादसों के बाद केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री होने के नाते विपक्ष उनकी नैतिक जवाबदेही तय करने की मांग कर रहा है।

कयास भर हैं

कयास यह भी लगाए जा रहे हैं कि केंद्र सरकार आगामी समय में केंद्रीय मंत्रिमंडल में बड़ा फेरबदल कर सकती है। इसके तहत वरिष्ठ नेताओं को मार्गदर्शक या संगठनात्मक भूमिका देकर नए और युवा चेहरों को कैबिनेट में शामिल करने की योजना बनाई जा रही है।

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