
आईएमए व नर्सिंगहोम एसोसिएशन ने दिया था समर्थन, ओपीडी बंद होने से सैकड़ों मरीज लौटे वापस
मेरठ। आवास विकास के सेटबैक नोटिसों के विरोध में संयुक्त मेरठ आंदोलन समिति ने मेरठ बंद का आह्वान किया था। मेरठ बंद की कॉल के चलते शहर के तमाम निजी अस्पतालों में ओपीडी सेवाओं पर बंद समर्थकों का पहरा रहा। बंद से चंद घंटे पहले ओपीडी बंद किए जाने के इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के फैलसे की जानकारी न हाेने की वजह से तमाम तीमारदार अपने मरीजों को लेकर पहुंच गए। लेकिन जब हॉस्पिटल पहुंचे तो वहां ओपीडी बंद होने की जानकारी मिली। ओपीडी बंद होने से मरीज व उनके तिमारदार हलकान रहे। डाक्टरों के इस कदम से जिले की स्वास्थ्य व्यवस्था पर बड़ा असर पड़ा है, हालांकि राहत की बात यह है कि मरीजों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए आपातकालीन सेवाएं (इमरजेंसी) चालू रखी गई हैं। शहर के करीब 300 से अधिक छोटे-बड़े नर्सिंग होम और लगभग 1100 क्लीनिकों पर सन्नाटा पसरा गया। सुबह अपने नियमित इलाज, जांच और परामर्श के लिए पहुंचे मरीजों को बिना डाक्टर से मिले ही वापस लौटना पड़ा। नर्सिंग होम पर डाक्टर पहुंचे जरूर लेकिन ओपीडी नहीं की। क्लिनिक नहीं खुले। प्राइवेट में दिखाने के इच्छुक मरीजों को मेडिकल कालेज और जिला अस्पताल में जाना पड़ा। करीब 4000 से ज्यादा मरीजों को मेरठ बंद के चलते परेशान होना पड़ा। मेरठ नर्सिंग होम एसोसिएशन के अध्यक्ष डा. पी. पंवार ने इस संबंध में जानकारी देते हुए बताया कि डाक्टरों ने एकजुट होकर मेरठ बंद के समर्थन में अपनी ओपीडी सेवाएं स्थगित रखने का फैसला किया है। आईएमए मेरठ शाखा की अध्यक्ष डाक्टर मनीषा त्यागी ने कहा कि मेरठ बंद में नर्सिंग होम एसोसिएशन को समर्थन दिया है।
मकान दुकान बचाने की है जंग
समिति के अध्यक्ष रविंद्र गुर्जर ने कहा कि वह आवास एवं विकास परिषद द्वारा की जा रही ध्वस्तीकरण की कार्रवाई का विरोध कर रहे हैं। यह लड़ाई मकान व्यापार और रोजगार के लिए है। प्रदर्शन स्थल पर टीम प्रशासन ने टेंट नहीं लगने दिया। जिससे प्रदर्शनकारी जमीन पर ही धरने पर बैठ गए। मंच के रूप में ट्रैक्टर पर चढ़कर लोगों ने अपना संबोधन दिया। मुखिया गुजर, मेजर हिमांशु, नितेश राजपूत आदि ने संबोधित किया। वहीं दूसरी ओर शास्त्री नगर, जागृति विहार और माधवपुरम से बड़ी संख्या में महिलाएं भी पहुंचीं। स्कूलों की शिक्षिकाओं ने भी प्रदर्शन में भाग लिया। बरसात के बीच लोग हाथों में छतरी लिये हुए धरना स्थल पर डटे रहे।


