भागते तो फाड़ डालते पिटबुल और रॉटवीलर

Shekhar Sharma
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फैक्ट्री में बंधकों को चौबीस घंटों में एक बार चोखर की रोटी हरी मिर्च और नमक, लोहे की रॉड व फैन बेल्ट से पिटाई, दो साल से बंधक थे 13 लोग

नई दिल्ली। वो यदि भागने की कोशिश करते तो खुंखर किस्म के डॉग पिटबुल ओर रॉटवीलर उन्हें फाड़ डालते और रोटी मांगते तो उनकी लोहे की रोड और फैन बैल्ट से पिटाई की जाती। खाने के नाम पर चौबीस घंटे में चोकर की रोटी, हरि मिचं और नमक दिया जाता। ये किसी हॉलीवुड मूवी की कहानी नहीं बल्कि याेगी के यूपी के जिला मुजफ्फरनगर जो देश की राजधानी दिल्ली से महज सौ किलोमीटर की दूर पर है वहां पत्तल फैक्ट्री में बंधक बनाकर दो साल से रखे गए 12 मजदूरों की कहानी है। अच्छी बात यह है कि अब प्रशासन व पुलिस ने इन्हें मुक्त कराया लिया है, लेकिन इनकी दास्तान सभ्य समाज के मुंह पर तमाचा है। लोग सवाल पूछ रहे हैं कि क्या आरोपियों के घरों पर बुल्डोजर चलाया जाएगा।

क्रूरता की इंतेहा

मुक्त कराए गए मजदूरों ने अधिकारियों को जो कुछ बताया उसको क्रूरता की इंतेहा से कम नहीं कहा जा सकता। उन्होंने बताया कि यदि कोई मजदूर अपनी मजदूरी मांगता या बीमार पड़ जाता, तो उसे लोहे की रॉड, डंडों, फैन बेल्ट से बने कोड़ों और भाले (Spear) से बेरहमी से पीटा और गोदा जाता था। कई मजदूरों के शरीर पर चोट और अमानवीय यातनाओं के गहरे निशान मिले हैं। फैक्ट्री में कदम रखते ही ठेकेदारों ने मजदूरों के मोबाइल फोन और आधार कार्ड छीन लिए, जिससे वे अपने परिवार से पूरी तरह कट गए।

आरोपियों की मजबूत पॉलटिकल बैकग्राउंड

पुलिस ने इस मामले में अरेस्टिंग की हैं। कुछ फरार भी हैं, लेकिन बताया गया है कि आरोपियों की मजबू पॉलटिकल बैकग्राउंड होने की वजह से कार्रवाई के अंजाम तक पहुंचने को लेकर तमाम तरह के सवाल उठ रहे हैं। पुलिस ने मौके से दो आरोपियों शिवम त्यागी और प्रदीप बालियान को गिरफ्तार कर लिया है। वहीं मुख्य फैक्ट्री संचालक और मास्टरमाइंड अंकित बालियान फिलहाल फरार है, जिसकी गिरफ्तारी के लिए दबिश दी जा रही है। इनके कनेक्शन भाजपा के एक पूर्व मंत्री से बताए जा रहे हैं। आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS), बाल श्रम अधिनियम, जुवेनाइल जस्टिस (JJ) एक्ट और बंधुआ श्रम प्रणाली (उन्मूलन) अधिनियम के तहत केस दर्ज किया गया है। अपहरण की धारा नहीं लगायी है।

झांसा देकर फंसाते

आरोपियों ने इन्हें अच्छी नौकरी व बढ़ियां सेलरी का झांसा देकर फंसाया था। आरोपियों ने बिहार, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, छत्तीसगढ़, हरियाणा, राजस्थान और पड़ोसी देश नेपाल के रेलवे स्टेशनों और सार्वजनिक स्थानों से सीधे-सादे लोगों को निशाना बनाया। उन्हें 10,000 से 12,000 रुपये प्रति माह सैलरी, रहने की उत्तम व्यवस्था और अच्छे खाने का लालच देकर मुजफ्फरनगर बुलाया गया था।

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