शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद जी महाराज ने जो सवाल अयोध्या जी में श्रीराम मंदिर में चढावा लूट पर उठाए हैं उनका जवाब आना बाकि
नई दिल्ली। अयोध्या जी के श्रीराम मंदिर में करोड़ों के चंदा व चढावा लूट के प्रकरण में सबसे ज्यादा संवाल चंपक राय को लेकर खड़े हो रहे हैं। पूछा जा रहा है कि उन्हें क्यों और किस के इशारे पर है बचाया जा रहा। हालांकि बचाए जाने के आरोपों पर देश में दो अलग-अलग दृष्टिकोण और राजनीतिक बहस चल रही है। विपक्ष और कुछ राजनीतिक विश्लेषकों का आरोप है कि बड़ी मछलियों को बचाने की कोशिश हो रही है, जबकि सरकार और श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट का कहना है कि निष्पक्ष जांच के लिए ही कदम उठाए जा रहे हैं। आरोप लगाने वालों का तर्क है कि मामले का मुख्य आरोपी रमाशंकर यादव उर्फ ‘टिन्नू’ चंपत राय का निजी ड्राइवर और बेहद करीबी रहा है। विपक्ष का आरोप है कि इतने बड़े स्तर पर चोरी बिना किसी शीर्ष पदाधिकारी के संरक्षण या अनदेखी के संभव नहीं थी। इस पूरे प्रकरण में शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद जी महाराज का हमला सबसे तीखा है। उनके उठाए सवालों पर सरकार पूरी तरह से बैकफुट पर है। ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने अयोध्या राम मंदिर में दान और चढ़ावे में हुई कथित चोरी के मामले में चंपत राय पर तीखे हमले किए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि ऐसे ‘विश्वस्त’ लोग अपने आकाओं के इशारे पर काम करते हैं और छोटे कर्मचारियों को बलि का बकरा बनाया जा रहा है।
सनसनी खेज खुलासा
जानकारों की मानें तो एसआईटी की शुरूआती जांच में सनसनीखेज खुलासा किया गय है। जांच से सामने आया है कि चंपत राय ने शुरुआत में चढ़ावा चोरी की शिकायतों को नजरअंदाज किया और पहली बार मामला सामने आने पर एफआईआर (FIR) दर्ज कराने से इनकार कर दिया था। कांग्रेस और समाजवादी पार्टी का आरोप है कि सरकार इस ढिलाई के बावजूद उन पर सीधी कानूनी कार्रवाई करने से कतरा रही है। आलोचकों का मानना है कि चंपक राय और ट्रस्टी अनिल मिश्रा का इस्तीफा एक सोची-समझी रणनीति या ‘सेफ मूव’ है। विपक्ष का दावा है कि उन्हें जेल जाने और सीधी कानूनी आंच से बचाने के लिए पद छोड़ने का रास्ता दिया गया है।
बचाव में उतरा ट्रस्ट
चंपक राय के बचाव में ट्रस्ट खुलकर उतर आया है। ट्रस्ट का कहना है कि चंपत राय ने खुद नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए और जांच को पूरी तरह निष्पक्ष बनाए रखने के लिए स्वेच्छा से इस्तीफा दिया है ताकि श्रद्धालुओं की आस्था को ठेस न पहुंचे। टिन्नू समेत 8 आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है और उनके ठिकानों पर पुलिस लगातार छापेमारी कर रही है। सरकार का दावा है कि किसी भी दोषी को छोड़ा नहीं जाएगा, लेकिन बिना सबूत के सिर्फ राजनीतिक दबाव में किसी शीर्ष चेहरे को सीधे तौर पर फंसाया नहीं जा सकता।


