उपचुनावों में भाजपा को धीरे से जोर का झटका

Shekhar Sharma
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उप चुनावों के परिणाम के नफा-नुकसान का लिया जा रहा है जायजा, एनडीएम के सहयोगी दल प्रेशर टेक्टिस पर संभव

नई दिल्ली। दंतिया (मध्य प्रदेश) और बांकीपुर (बिहार) विधानसभा उपचुनाव के 3 अगस्त 2026 को आए परिणामों में भाजपा को हार का सामना करना पड़ा है, जहां दतिया में कांग्रेस उम्मीदवार घनश्याम सिंह ने जीत दर्ज की और बांकीपुर में Jan Suraaj Party संस्थापक प्रशांत किशोर ने शानदार जीत दर्ज करायी है। देश भर में पेपर लीक मामलों को लेकर चल रहे आंदोलनों के बीच भाजपा आला कमान के लिए यह बुरा झटका माना जा रहा है। कुंवर घनश्याम सिंह (कांग्रेस), जिन्हें कुल 66,757 वोट मिले, उन्होंने भाजपा के आशूतोष तिवारी को 6,016 वोटों के अंतर से हराया। बिहार के बांकीपुर में प्रशांत किशोर (Jan Suraaj Party), जिन्हें लगभग 49% वोट मिले, उन्होंने नीरज कुमार सिन्हा (भाजपा) को हराया। उपचुनावों में दतिया और बांकीपुर जैसी सुरक्षित सीटों पर मिली हार के कारण भाजपा को संगठन के भीतर गुटीय असंतोष, सहयोगियों के दबाव और आगामी चुनावों में नुकसान उठाना पड़ सकता है।

भाजपाध्यक्ष की परीक्षा उप-चुनाव

राजनीतिक विश्लेषक उप चुनाव परिणामों को भाजपा के नए अध्यक्ष नितिन नवील को चुनावी परीक्षा में फेल बता रहे हैं। राजनीति विश्लेषक चौधरी यशपाल सिंह का कहना है कि उप चुनावों के परिणाम देश भर में चल रही भाजपा विरोधी लहर का संकेत दे रही है। वहीं दूसरी ओर बांकीपुर विधानसभा सीट का हारना भाजपा के लिए बड़े झटके के रूप में देखा जा रहा है। यह सीट भाजपा का गढ़ और पूर्व विधायक नितिन नवीन की पारंपरिक सीट मानी जाती है, जो अब नहीं रही।

साइड इफैक्ट

क्षेत्रीय दलों के सामने भाजपा का ‘अजेय’ होने का भ्रम टूटेगा। आगामी बड़े चुनावों में सहयोगी दल अब भाजपा से अधिक सीटों की मांग करेंगे। बिहार की बांकीपुर सीट पर भाजपा की हार से एनडीए गठबंधन में नीतीश कुमार की जेडीयू का मोलभाव करने का वजन बढ़ेगा। हार के लिए स्थानीय नेताओं द्वारा एक-दूसरे पर दोषारोपण की प्रक्रिया तेज होगी। पुराने और समर्पित कार्यकर्ताओं में केंद्रीय नेतृत्व के फैसलों के प्रति असंतोष बढ़ सकता है।


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