

चप्पे चप्पे पर फोर्स, 57 मेट्रो स्टेशनों को बंद करने का प्रस्ताव और नई दिल्ली व निजामुद्दीन आने वाली ट्रेनों को रद्द
नई दिल्ली। 10 अक्टूबर के इस प्रदर्शन को लेकर सरकार पर कई मोर्चों से भारी राजनीतिक और सामाजिक दबाव है। विपक्ष, छात्र संगठनों और ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) का दावा है कि प्रशासन की असाधारण पाबंदियां—जैसे 57 मेट्रो स्टेशनों को बंद करने का प्रस्ताव और नई दिल्ली व निजामुद्दीन आने वाली ट्रेनों को रद्द करना—सरकार के भीतर की “घबराहट” को दर्शाती हैं। मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग और स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) प्रक्रिया में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी के आरोपों ने सरकार और चुनाव आयोग को रक्षात्मक स्थिति में ला दिया है। CJP मुख्य रूप से युवाओं और छात्रों का एक नया आंदोलन बनकर उभरा है। इससे पहले पेपर लीक और शिक्षा सुधारों को लेकर इनके लंबे प्रदर्शनों के कारण सरकार को पहले भी झुकना पड़ा था। सरकार पर दबाव है कि यह गुस्सा फिर से सड़कों पर न भड़के।
राकेश टिकैत आए साथ
इस आंदोलन को किसान नेता राकेश टिकैत और ‘इंडिया ब्लॉक’ (विपक्ष) की पार्टियों का खुला समर्थन मिल गया है। किसानों और विपक्ष के जुड़ने से यह केवल छात्रों का प्रदर्शन न रहकर एक बड़ा राष्ट्रव्यापी राजनीतिक मुद्दा बन गया है। CJP का दावा है कि सरकार ने उनके शीर्ष नेताओं को अरेस्ट करने की योजना बनाई है और देशभर में करीब 10,000 वालंटियर्स को अलग-अलग राज्यों (जैसे मध्य प्रदेश, राजस्थान, तेलंगाना) में ट्रेनों और बसों से दिल्ली आने से पहले ही हिरासत में ले लिया गया है। विपक्ष और प्रदर्शनकारियों का कहना है कि लोकतांत्रिक आवाजों को दबाने के लिए सरकार इस तरह की ‘आपातकाल’ जैसी पाबंदियां लगा रही है।
किले में तब्दील दिल्ली
शनिवार यानि कल 10 अक्टूबर 2026 को ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) द्वारा मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे और ‘वोट चोरी’ के खिलाफ जंतर-मंतर पर प्रस्तावित प्रदर्शन को रोकने के लिए दिल्ली पुलिस और प्रशासन ने कड़े सुरक्षा इंतजाम किए हैं। केंद्र सरकार ने दिल्ली पुलिस की मदद के लिए केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (CAPF) के 23,000 जवानों को तैनात किया है। फोर्स को बॉडीकैम दिए गए हैं, जबकि प्रदर्शनकारियों और कुछ छात्र संगठनों ने पुलिस पर दबाव बनाने और नजरबंद करने का आरोप लगाया है। दिल्ली वालों का कहना है कि उन्हें पुलिस घरों में कैद करने पर उतारू है। विपक्ष का दावा है कि मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ प्रदर्शनों से मोदी सरकार बुरी तरह से डरी हुई है। वहीं दूसरी ओर दिल्ली पुलिस ने सुरक्षा और कानून-व्यवस्था का हवाला देते हुए इस प्रदर्शन की आधिकारिक अनुमति नहीं दी है। धारा 163 लागू की गई है, जिसके तहत किसी भी तरह के बड़े जमावड़े को अवैध माना जाएगा। यूपी, हरियाणा और राजस्थान से लगने वाले बॉर्डर पर निगरानी बढ़ा दी गई है। आसमान से ड्रोन के जरिए और जमीन पर सीसीटीवी से हर गतिविधि पर नजर रखी जा रही है।
दिल्ली वाले घरों में रहेंगे कैद
10 अक्टूबर को दिल्ली में शराब की दुकानें बंद रखने के निर्देश हैं। पुलिस ने पीजी मालिकों और शिक्षण संस्थानों से संपर्क कर छात्रों को प्रदर्शन से दूर रहने की हिदायत दी है। CJP संयोजक अभिजीत दीपके और विभिन्न छात्र संगठनों ने आरोप लगाया है कि पुलिस देश भर में युवाओं और कार्यकर्ताओं को हिरासत में ले रही है, उन्हें नोटिस थमाए जा रहे हैं और मुचलके पर साइन करवाकर दिल्ली जाने से रोका जा रहा है। सोशल मीडिया और स्थानीय स्तर पर लोगों का कहना है कि पुलिस का पहरा इतना कड़ा कर दिया गया है और कई इलाकों में इस तरह का माहौल बनाया गया है मानो उन्हें घरों में कैद करने की कोशिश हो रही हो।


