
अमेरिका के बतचीत के मध्यस्थ पाकिस्तान की मार्फत भेजा है चौदह सूत्रीय शांति का प्रस्ताव, डोनाल्ड ट्रंप की नुक्ताचीनी
नई दिल्ली। ईरान ने चौदह सूत्रीय शांति प्रस्ताव अमेरिका से बातचीत के मध्यस्थ पाकिस्तान की मार्फत डोनाल्ड ट्रंप को भिजवा दिया है। साथ ही यह भी बता दिया है कि उनका देश युद्ध नहीं शांति चाहता है, लेकिन यदि युद्ध को थोपा गया तो उनका देश युद्ध भी उसी शिद्दत से लड़ेगा जितनी शिद्दत से मिडिल ईस्ट में वह शांति चाहता है। तय अमेरिका को करना है कि उन्हें युद्ध पसंद है या फिर बातचीत के जरिए निकाला जाने वाला अमन और शांति का रास्ता। ईरान ने आज कहा कि यह संयुक्त राज्य अमेरिका पर निर्भर करता है कि वह बातचीत के जरिए समझौता करे या खुले युद्ध की ओर लौटे, लेकिन तेहरान दोनों ही परिणामों के लिए तैयार है। वहीं दूसरी ओर डोनाल्ड ट्रंप ने तेहरान को चेतावनी दी कि उसे “जल्द ही समझदारी दिखानी चाहिए” और अपने परमाणु कार्यक्रम पर कड़े नियंत्रण की वाशिंगटन की मांगों के आगे आत्मसमर्पण कर देना चाहिए, क्योंकि बंदरगाहों की नॉकाबंदी ने ईरान की अर्थव्यवस्था को बर्बाद कर दिया है।
यह बोले ईरानी उप विदेश मंत्री
उप विदेश मंत्री काज़ेम ग़रीबाबादी ने तेहरान में राजनयिकों से कहा, “अब अमेरिका के सामने यह फैसला करने का अधिकार है कि वह कूटनीति का मार्ग चुने या टकरावपूर्ण दृष्टिकोण को जारी रखे।” उन्होंने कहा, “ईरान अपने राष्ट्रीय हितों और सुरक्षा को सुनिश्चित करने के उद्देश्य से दोनों रास्तों के लिए तैयार है।”
चीन का ईरान को लेकर अमेरिका को झटका
चीन ने भी ईरान को करारा झटका दिया है। यह झटका ईरान को लेकर दिया गया है। चीन ने ईरान के तेल संबंधों को लेकर रिफाइनरियों पर अमेरिकी प्रतिबंधों को खारिज कर दिया है।चीन ने दो टूक कह दिया है कि उनका देश ईरान से तेल खरीदने वाली पांच कंपनियों पर लगाए गए अमेरिकी रोक को नहीं मानेगा। चीन, ईरान से तेल का एक प्रमुख ग्राहक है, मुख्य रूप से उन स्वतंत्र रिफाइनरियों के माध्यम से जो इस्लामी गणराज्य से रियायती दरों पर मिलने वाले कच्चे तेल पर निर्भर करती हैं। चीन ने ईरान के साथ तेल संबंधों को लेकर अपनी रिफाइनरियों पर अमेरिकी प्रतिबंधों को खारिज कर दिया है, यह दावा करते हुए कि वे अंतरराष्ट्रीय कानून और व्यापार मानदंडों का उल्लंघन करते हैं।
“न युद्ध, न शांति”
भारत में ईरान के सर्वोच्च नेता के प्रतिनिधि अब्दुल मजीद हकीम इलाही ने अपने देश और इजरायल-अमेरिका गठबंधन के बीच चल रहे तनाव को “न युद्ध, न शांति” की स्थिति के रूप में वर्णित किया। उन्होंने सवाल उठाया कि युद्ध से प्रभावित और ऊर्जा संकट से जूझ रहे देश अमेरिका और इजरायल पर आक्रामकता रोकने के लिए दबाव क्यों नहीं डाल रहे हैं। यहां एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए श्री इलाही ने कहा कि ईरान संघर्ष नहीं चाहता था, लेकिन लगातार हमलों के बीच जवाब देने के लिए मजबूर हो गया, हालांकि बातचीत जारी रहने की उम्मीद है।


