सदर दुर्गाबाड़ी स्थित प्राचीन जैन मंदिर में अयोध्या के श्रीराम मंदिर से कई गुना बड़ी चढ़ा मामले की गुत्थी महज पांच मिनट में हैं सुलझ सकती
मेरठ। सदर दुर्गाबाड़ी स्थित जैन मंदिर में करोड़ों के चढ़ावा चोरी प्रकरण को लेकर मेरठ ही नहीं बल्कि देश भर के जैन समाज ने सदर जैन समाज को लेकर जिस प्रकार की धारणा बना ली गयी है, उसकी गुत्थी का हर सदर जैन समाज के पास मौजूद है, लेकिन सबसे बड़ा सवाल यही है कि पहल कैसे हो और कौन करे। हालांकि सदर जैन समाज की यदि बात की जाए तो चढ़ावा चोरी प्रकरण को लेकर पूरा जैन समाज ना केवल आहत है बल्कि यह भी चाहता है कि जो चीजे खराब हो गयी हैं वो सही की जानी चाहिए, लेकिन बात फिर एक बात पर आकर अटक जाती है कि कैसे पहल हो और यह पहल कौन करे। नाम ना छापे जाने की शर्त पर सदर जैन समाज के तमाम युवाओं और बुर्जुगों का साफ कहना है कि दशलक्ष्ण पर्व का मौका है और इस मौका का फायदा सदर जैन समाज को उठाना चाहिए। सौरभ सागर जी महाराज मेरठ में हैं और चार्तुमास चल रहा है। सदर जैन समाज के तमाम ऐसे लोग हैं जिनका मानना है कि मंदिर की मान प्रतिष्ठा को पुन: पहली की भांति स्थापित करने के लिए सौरभ सागर जी महाराज को अगुवा बनाकर पहल की जानी चाहिए। सौरभ सागर जी महाराज संत शिराेमणी हैं, उनके पास निश्चित रूप से इसका समाधान मौजूद होगा ही। लेकिन इस प्रकार के प्रयासों में यकीन रखने वाले या ऐसी सोच रखने वालों की पहली शर्त यह है कि मंदिर चोरी को लेकर जिनके चेहरों पर कालिख कानून ने पोत दी है, उनमें से कोई भी इन प्रयासों का हिस्सा नहीं बनना चाहिए। हालांकि यह भी माना जा रहा है कि वो लोग खुद ही इन प्रयासों का हिस्सा अब नहीं बनना चाहेंगे। कुछ लोगों का तो यहां तक कहना है कि मंदिर का चढ़ावा चोरी का कलंक लेकर कोई भला कैसे चुनाव का हिस्सा बन सकता है। सदर जैन समाज के तमाम ऐसे लोग हैं जो चाहते हैं कि सौरभ सागर जी महाराज को मंदिर जी में आमंत्रित कर उनसे ही इस संबंध में याचना की जानी चाहिए। इस बुरी तरह से उलझी हुई गुत्थी को सौरभ सागर जी महाराज से आग्रह कर सुलझाने की राय देने वाले सदर जैन समाज के ज्यादातर जो लोग मंदिर जी में आते हैं उनका यह भी कहना है कि सारे फसाद की जड़ संवैधानिक तरीके से चुनावों का ना कराया जाना है और इस सारे फसाद को संवैधानिक तरीके से चुनाव कराकर ही हमेशा के लिए खत्म किया जा सकता है।
चुनाव से किसी हो सकती है दिक्कत
सदर जैन समाज के तमाम ऐसे लोग हैं जो अब खुलकर आवाज उठाने लगे हैं कि संवैधानिक तरीके से चुनाव कराए जाने चाहिए। संवैधानिक तरीके से कराए जाने वाले चुनावों से भला किसको दिक्कत हो सकती है। चुनाव का सीधा सा और जो सरल तरीका है वो यह कि पहले किसी एक शख्स को तय कर लिए जाए। उसी को ही समाज की ओर से तैनात रिसीवर मान लिया जाए। वही शख्स मंदिर में आने वाले समाज के लोगों की सूची तैयार करे। इसके लिए समय निर्धारित कर दिया जाए कि यह कार्य इतने दिनों में किया जाए। उसके बाद जिनकी सूची तैयार की गई है उनकी आम सभा बुला ली जाए। उसकी जानकारी डिप्टी रजिस्ट्रार को देकर संवैधानिक तरीके से चुनाव कराए जाने का आग्रह किया जाए। बस इतना सा काम करना है। यहां यह भी बता दें कि जिस दिन सदर जैन समाज ने मंदिर जी के संवैधानिक तरीके से चुनाव संपन्न करा दिए उसी दिन से जो झंझावात चल रहा है, यह भी शांत हो जाएगा। जो चीजें तमाम लोगों को बेचैन किए हुए हैं वो सभी स्वत: ही खत्म हो जाएंगी। सदर जैन समाज की नाराजगी की मुख्य वजह मंदिर जी की धन संपदा लूटने के लिए उस पर अवैध काविज होने के लिए फर्जी चुनाव कराए गए। यह बात फर्जी चुनाव कराने वालों ने पुलिस की पूछताछ में स्वीकार भी की, जिसके बाद कानून ने अपना काम करते हुए उनके खिलाफ गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज किया, जिसका ट्रायल शुरू हो गया है। नौबत यहां तक पहुंचे इससे बचा भी जा सकता था और उसका सीधा और सरल तरीका संवैधानिक तरीके से चुनावों का कराया जाना है और यह अभी भी संभव है।
दूसरा कोई रास्ता राहत का नहीं
राहत का कोई दूसरा तरीका हो ही नहीं सकता सिवाया संवैधानिक तरीके से चुनाव कराकर मंदिर में नए लोगों की एक चुनी हुई प्रबंध समिति को बैठाने के अलावा ताकि मंदिर के सारे काज ठीक तरीके से चलें। राहत के लिए मंदिर जी के चुनाव तो कराने ही होंगे, कोई दूसरा रास्ता अब बचा ही नहीं है। सदर जैन समाज चाहता है कि मंदिर जी से हर साल निकाली जाने वाली श्रीजी की शोभायात्रा भी भव्य तरीके से निकाली जा सके। इस साल की शोभायात्रा को लेकर भी समाज के कुछ लोगों में संशय है कि यदि सशर्त परमिशन मिल भी गयी तो फिर भी कैसे कोई चंदा देगा और कैसे कोई लेगा क्यों कि इस वक्त अवैध रूप से काविज लोगों पर जिस प्रकार से कानून ने शिकंजा कस दिया है आए दिन कोर्ट कचहरी में पेशी हो रही हैं, उन हालातों में ये तमाम चीजें इतनी सरल नहीं है। इनको सरल करने का केवल एक मात्र रास्ता मंदिर जी के संवैधानिक तरीके से चुनाव कराना ही है और अंतोगत्वा इसी रास्ते पर चलना होगा क्योंकि राहत पाने के लिए कोई दूसरा रास्ता है ही नहीं।


