तीन तीन विधायक सपाइयों की फौज फिर भी बेबस

Shekhar Sharma
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कमिश्नरी से चलकर चंद कदम भी आगे नहीं बढ़ पाए हंगामा कर रहे कार्यकर्ता, नगरायुक्त कार्यालय के सामने ही पुलिस ने दिया रोक

मेरठ। समाजवादी पार्टी के तीन-तीन विधायक अतुल प्रधान, शाहिद मंजूर और रफीक अंसारी और इनके अलावा महानगर व जिला सपा के कार्यकर्ताओं का पूरा अमला। उसके बावजूद कलेक्ट्रेट में डीएम कार्यालय पर जाकर ज्ञापन देने के लिए कमिश्नरी से निकले सपाई बामुश्किल सौ कदम भी आगे नहीं बढ़ सके। कमिश्नरी पार्क से नगरायुक्त के कैंप कार्यालय की दूरी मुश्किल से सौ कदम होगी। पुलिस वालों ने उससे आगे इन्हें नहीं बढ़ने दिया। सपाई जैसे ही कमिश्नरी पार्क से बाहर निकले, पुलिस के साथ खींचतान शुरू हो गयी। हल्की धक्का मुक्की भी हुई हालांकि यह सब फ्रेंडली नजर आया। कलेक्ट्रेट पर बड़े हंगामे और प्रदर्शन की आशंका जतायी जा रही थी, ऐसा इसलिए क्योंकि कार्यकर्ता के साथ अतुल प्रधान, शाहिद मंजूर और रफीक अंसारी सरीखे तीनों विधायक पहुंचे थे, लेकिन जैसी आशंका जतायी जा रही थी, वैसा कुछ भी नहीं हुआ और आस्तीन चढ़ाए कमिश्नरी पर नजर आ रहे सपा के तमाम नेता पुलिस के सामने बैकफुट पर नजर आए।

“बुलडोजर भगाओ, मेरठ बचाओ

शास्त्रीनगर सेंट्रल मार्केट और माधवपुरम समेत शहर के दूसरे इलाकों में लाखों लोगों को बेघर होने से बचाने ( मकान-दुकान टूटने के खतरे और बुलडोजर कार्रवाई के विरोध) की मांग को लेकर कमिश्नरी पर प्रदर्शन किया। सुप्रीम कोर्ट के आदेश/कार्रवाई के बाद लोगों के मकान और दुकानें टूटने तथा लाखों लोगों के बेघर होने का खतरा मंडरा रहा है, जिसके विरोध में सपा ने “बुलडोजर भगाओ, मेरठ बचाओ” के नारे लगाए। सपाइयों ने डीएम कार्यालय की ओर मार्च करने की कोशिश की, लेकिन पुलिस ने उन्हें कमिश्नरी चौराहे पर ही रोक लिया। इस दौरान पुलिस और कार्यकर्ताओं के बीच धक्का-मुक्की भी हुई। सपाइयों को सेंट्रल मार्केट शास्त्रीनगर प्रकरण को लेकर डीएम को ज्ञापन देने के लिए कलेक्ट्रेट तक पहुंचना था, लेकिन पुलिस वालों के आगे उनकी एक ना चली। चंद मिनटों के हंगामे के दौरान ही वहां एसीएम पहुंच गए और ज्ञापन ले लिया। एसीएम के ज्ञापन लेने के बाद पुलिस ने सख्ती दिखाते दिखानी शुरू कर दी, जिसके बाद सपाइयों ने कमिश्नरी से निकलने में देर नहीं लगायी। प्रदर्शनकारियों में विधायक अतुल प्रधान, शाहिद मंजूर, रफीक अंसारी, संगठन के जिलाध्यक्ष कर्मवीर सिंह गूमी, महानगर अध्यक्ष हाजी आदिल चौधरी, शैकी वर्मा, पूर्व पार्षद दल नेता अफजाल सैफी, हाजी सलीम अंसारी, हाफिज साजिद अंसारी, यासर चौधरी, मतीन अंसारी, रशीद अंसारी, पूर्व पार्षद मोइनुद्दीन अंसारी, मोइन अंसारी, हाजी अब्दुल गफ्फार अंसारी, आस मोहम्मद मलिक, पूर्व पार्षद शहर विधानसभा अध्यक्ष शाहिद पहलवान, अरशान अली, रिजवान कुरैशी, एबाद खान, जीशान अली आदि उपस्थित रहे के अलावा कई युवा नेता व कार्यकर्ता भी मौजूद रहे।

भाजपाई कर रहे डेमेज कंट्रोल

भारतीय जनता पार्टी के तमाम बड़े नेता सेंट्रल मार्केट शास्त्रीनगर मसले को लेकर व्यापारियों की नाराजी से हुए डेमेज को कंट्रोल करने में जुट गए है। इसी के लिए सांसद अरुण गोविल, राज्यमंत्री स्वतंत्र प्रभारी डा. सोमेन्द्र तोमर और महानगर अध्यक्ष विवेक रस्तौगी दूसरे कार्यकर्ताओं को लेकर सर्वे करने के नाम पर शास्त्रीनगर कम्युनिटी सेंटर के पास प्रस्तावित स्थान को देखने को पहुंचे। उल्लेखनीय है कि एक दिन पहले सर्किट हाउस में मीडिया के समक्ष इन नेताओं ने कहा था कि सेंट्रल मार्केट में दुकानों के ध्वस्तीकरण के बाद प्रभावित व्यापारियों को राहत देने के लिए अब उन्हें कम किराए पर दुकानें उपलब्ध कराने की योजना पर काम शुरू किया गया है। इन व्यापारियों को लीज के आधार पर दुकानें उपलब्ध कराने के लिए स्थान की तलाश की जा रही है। डा. साेमेन्द्र तोमर ने बताया कि जिनकी दुकानें गिरा दी गयी हैं उन्हें सस्ती लीज पर दुकानें दिलायी जाएंगी।

यकीन को तैयार नहीं पीड़ित

भाजपाई भले ही लाख सफाई दे रहे हों, लेकिन पीड़ित यकीन को तैयार नहीं हैं। पीड़ित बोले कैसे करें भरोसा। पीड़ितों को कहना है कि एक होती है नीति और एक होती है नीयत। यदि नीयत होती तो नीति तो बहुत पहले बन चुकी होती। आज जब ये विषय इतना बढ़ा हो गया है कि इसने पूरे मेरठ को अपनी जद में ले लिया है और जब कि ये आग प्रदेश के और शहरों में भी पहुंचने वाली है, जनता को बहलाने की कोशिश हो रही है।सारी कहानी राजनीतिक नफे नुकसान के इर्द-गिर्द घूम रही है।यदि नीयत अच्छी होती तो बात प्रेस कॉन्फ्रेंस में नही, जनता के बीच में आकर की जाती।उन जनप्रतिनिधियों पर जनता कैसे विश्वास करे, जिन्होंने विश्वास बार बार तोड़ा हो? अगली सुनवाई तक आचार संहिता लागू। फिर चुनाव। फिर नयी सरकार।नये जनप्रतिनिधि। आपके लिए टूटे हुए मकान,टूटी हुई दुकान और झूठे आश्वासन। एमसीसी हॉस्पिटली के बाबू राम का कहना है कि ये जो प्रेस कांफ्रेंस हुई है अबसे पहले भी कर सकते थे आज ऐसा क्या हुआ जो इनको सेंट्रल मार्किट याद आई। एस्ट्रालाजर अमित वर्मा का कहना है कि अब जो ये नया सर्वे करा रहे आज ये बात सिद्ध है कि ये भूमि-अधिग्रहण कि नीती मेरठ के जनप्रतिनिधियों कि कुछ कुनीती ओर षड्यंत्र है पहली बात ये जब सेंट्रल मार्केट का मामला था तब इन्होंने कहा था कि यह सुप्रीम कोर्ट का आर्डर है हम इसमें कोई भी हस्तक्षेप नहीं कर सकते लेकिन आज जब 17000 प्रॉपर्टी कि बारी आई तब यह कहते हैं दोबारा सर्वे होगा क्योंकि इस 16000 प्रॉपर्टी में कहीं ना कहीं जनप्रतिनिधियों की भी प्रॉपर्टी शामिल होंगी । क्या अब इनके लिये सुप्रीम कोर्ट का आर्डर कहां गया । अब कौन से अधिकारियों को सुप्रीम कोर्ट भेजकर कैसे कहेगे कि दौड़ाया सर्वे होना है तब सुप्रीमकोर्ट कि भी नीतियां कहा जायेगी । अब सरकार इस काम के लिये अपना वकील सुप्रीमकोर्ट में खड़ा करेंगी।ओर इस क्षेत्र में यदि इतना बड़ा सिलिग ओर तोड़ने कि गतिविधियां हुई तो वोट गयी । दुसरी तरफ अब झूठे आश्वासन देकर और आचार संहिता का बहाना बनाकर लोगों को गुमराह कर रहे हैं जिससे कि वह यह सोचकर वोट दें कि शायद हमें अपनी संपत्ति या अपनी दुकान वापस मिल सके ये है ही कि किसी के पैर काटकर उसे बाद में कृत्रिम पैरों का आस्वासन दे इससे अच्छा है कि इन्हें दोबारा मौका ही ना दें।

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