

शहर के इस इलाके की डेयरियां बनी हैं यहां के वाशिंदाें के लिए नासूर, डेरियों के गोबर से नाले नालियां हैं चोक
मेरठ। शहर का मकबरा डिग्गी वार्ड 68 जितनी भी मुसीबतें और समस्या हो किसी इलाके में हो सकती हैं वो सब यहां मौजूद हैं। इन मुसीबतों को इस इलाके में रहने वालों ने अपना नसीब मान लिया है और यह तय कर लिया है कि इन मुसीबतों का कोई अंत नहीं। इसकी वजह यहां अवैध रूप से संचालित की जा रही दूध डेयरियां हैं। जिनसे निकलने वाला गाेबर नाले ने नाले नालियों की सांसों पर पहरा बैठा दिया है। नाले नालियां चोक हो गए हैं। उनकी उनमें कीचड़ जम गयी है। जहां तक नगर निगम की बात है तो निगम अफसर जितनी उनकी क्षमता है उससे आग बढ़कर काम का प्रयास करते हैं, लेकिन यदि समस्याओं की बात करें तो केवल नगर निगम से संबंधित समस्याएं ही नहीं हैं। यहां पीवीवीएनएल यानि बिजली महकमें से जुड़ी बहुत सी समस्याएं हैं। इसके अलावा इस इलाके के कुछ दबंगों के द्वारा थोपी गयी समस्याएं भी मौजूद हैं। ,
मुसीबतें जिनसे परेशाद हैं वाशिंदे
इस इलाके में रहने वाले सबसे ज्यादा परेशान जिन समस्याओं से हैं उनमें रास्तों पर बहता गंदा पानी। यह इसलिए क्योंकि गोबर की वजह से नाले नालियां चोक हो गए हैं। गोवर नाले नालियों में जम गया है। जब तक यहां से डेयरियां शिफ्ट नहीं की जाएंगी तब तक गोवर की वजह से नाले नालियों का चोक होना थमने वाला नहीं है। जब नाले नालियां गाेबर बहाकर चोक कर दी जाएंगी तो गंदा पानी रास्तों पर ही बहेगा और इसी गंदे पाने से होकर लोगों को आना जाना होगा। सबसे ज्यादा मुसीबत तो इससे स्कूली बच्चों को होती है जो कई बार कीचड़ व गंदे पानी में गिर जाते हैं। उनकी ड्रेस्ब और बस्ते खराब हो जाते हैं। यहां आवारा जानवर लोगों के लिए परेशानी का कारण बने हुए हैं। यह एक बड़ी समस्या है। ये पशु डेयरी संचालक छोड़ देते हैं। सुबह शाम को दूध निकाला और फिर छोड़ दिया। ये पशु कई बार लोगों को चोटिल भी कर चुके हैं।
कैसे हो सफाई नाले पर कब्जा है भाई
यहां का मुख्य नाला गंदगी से पटा मिला और उस पर कई स्थानों पर अतिक्रमण भी दिखाई दिया। मुख्य नाले की लंबे समय से सफाई नहीं हुई है। नाले में कचरा और गोबर जमा होने से पानी की निकासी पूरी तरह प्रभावित हो गई है। स्थानीय लोगों का कहना है कि छोटी नालियां भी चोक हो चुकी हैं। हल्की बारिश में ही पानी सड़कों पर भर जाता है और कई घरों तक पहुंच जाता है। नाले पर कब्जा कर लिए जाने की वजह से इसकी सफाई नहीं हो पा रही है। नालों में कचरा और गोबर जमा होकर दलदल बन गया है। लोगों का कहना है कि बच्चे इसी दलदल के आसपास खेलते हैं, जिससे हादसों और बीमारियों का खतरा बना रहता है। वार्ड में नियमित सफाई नहीं होने से मच्छरों का प्रकोप बढ़ गया है और अधिकांश परिवारों में कोई न कोई सदस्य बीमार रहता है। हालांकि जहां तक निगम के सफाई कर्मचारियों का सवाल है तो वो तो नियमित आते हैं और जितनी भी संभव हो सकती है, सफाई करते भी हैं, लेकिन समुचित सफाई के लिए जरूरी है कि नाले को पहले कब्जा मुक्त कराया जाए उसके बाद ही यहां की गंदगी की समस्या का समाधान संभव है। इस इलाके में कई सड़कें जर्जर होकर गड्ढों में तब्दील हो चुकी हैं। वहीं नाले के ऊपर रखा ट्रांसफॉर्मर हादसाें को न्यौता देता नजर आता है। बिजली के तार घरों की छतों से सटे हुए हैं। वहीं नाले के ऊपर रखा ट्रांसफॉर्मर भी स्थानीय लोगों के लिए चिंता का विषय बना हुआ है। बारिश में यह खतरनाक हो जाती है, दरअसल झमाझाम बारिश के दौरान कई बार चिंगारियां निकलती हैं तारों में आग लग जाती है। इस वार्ड की पार्षद रूबीना परवीन हैं लोगों ने बताया कि निगम से संबंधित कामकाज उनके शौहर शमशाद देखते हैं। वो मानते हैं कि यहां काफी समस्याएं हैं और इनके लिए किए जाने वाले प्रयासों की भी जानकारी देते हैं।


