युवा पहुंचे जंतर-मंतर पुलिस की लोहे की दीवार

Shekhar Sharma
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पुलिस ने खड़ी की लोहे की दीवार, नहीं पहुंचने दिया युवाओं को जंतर-मंतर तक, युवाओं का आरोप संवाद के बजाए सुरक्षा घेरों के पीछे छिप रही सरकार

नई दिल्ली। मोदी सरकार पर वादा खिलाफी का आरोप लगाते हुए देश भर के युवाओं ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। प्रदर्शनकारी छात्र संगठनों का आरोप है कि युवाओं के बढ़ते देशव्यापी आंदोलन और तीखे सवालों से घबराकर ही केंद्र सरकार जंतर-मंतर पर भारी पुलिस बल तैनात कर रही है। छात्र नेताओं का कहना है कि सरकार संवाद करने के बजाय बैरिकेडिंग और सुरक्षा घेरों के पीछे छिप रही है। हालांकि, सरकार और पुलिस प्रशासन ने इन आरोपों को खारिज करते हुए इसे केवल कानून-व्यवस्था बनाए रखने की एक जरूरी सुरक्षा प्रक्रिया बताया है।
जंतर मंतर प्रदर्शन मामले में सरकार पर समझौते से मुकरने के आरोप देश के युवा लगा रहे हैं। विभिन्न राज्यों में छात्र-आंदोलनों और प्रदर्शनकारियों पर हुई पुलिस कार्रवाई के विरोध में आज विभिन्न छात्र संगठनों के युवा दिल्ली के जंतर-मंतर पर एकत्र हुए। वे पुलिस ज्यादती रोकने और दंडात्मक कदमों के खिलाफ अपनी आवाज बुलंद कर रहे हैं। एसएफआई (SFI), आइसा (AISA) और क्रांतिकारी युवा संगठन सहित 13 वामपंथी व छात्र संगठनों ने यह प्रदर्शन बुलाया है। ये सभी पश्चिम बंगाल, बिहार और असम जैसे राज्यों में हालिया प्रदर्शनों के दौरान छात्रों पर की गई पुलिस कार्रवाई और सख्ती पर रोक लगाने की मांग कर रहे हैं।

नहीं जाने दिया जंतर-मंतर तक

सीजेपी के आंदोलन से कथित रूप से डरी सरकार ने आज युवाओं को जंतर मंतर तक नहीं पहुंचने दिया। जंतर मंतर के चारों ओर लोहे के ट्रिपल दीवार खड़ी कर दी गयी। जंतर-मंतर और आसपास के इलाकों में भारी पुलिस बल और सुरक्षा एजेंसियों को तैनात किया गया है। दिल्ली का जंतर-मंतर भारी पुलिस सुरक्षा और बैरिकेडिंग के कारण छावनी में तब्दील हो गया है, जिसके चलते वहां पहुंचे युवा और छात्र संगठनों ने गहरा आक्रोश व्यक्त किया है। हाल ही में हुए देशव्यापी परीक्षा पेपर लीक विवाद और ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) के 36 दिनों के आंदोलन के बाद, अब वामपंथी छात्र संगठन विभिन्न राज्यों में प्रदर्शनकारियों पर हुई पुलिसिया कार्रवाई के खिलाफ जंतर-मंतर पर डटे हुए हैं। छात्र संगठन मांग कर रहे हैं कि आंदोलन में शामिल युवाओं पर असम, बिहार और पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों में दर्ज किए गए सभी पुलिस केस तुरंत वापस लिए जाएं। छात्रों का कहना है कि शांतिपूर्ण प्रदर्शनों को रोकने के लिए लाठीचार्ज और पेलेट गन का इस्तेमाल सरकार के डर को दिखाता है।

पुलिस कार्रवाई का विरोध

छात्र नेताओं का आरोप है कि आंदोलन के दौरान पुलिस ने छात्रों पर लाठीचार्ज, आंसू गैस और कथित तौर पर पेलेट गन का इस्तेमाल किया। यह मामला अब सुप्रीमकोर्ट तक पहुंच गया है। दिल्ली हाईकोर्ट ने युवाओं पर बल प्रयोग को गैर जरूरी तक करा दिया है। वहीं दूसरी ओर जहां अदालत ने पुलिस से बल प्रयोग के नियमों की जानकारी मांगी है।

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