Zen Z का आर्ट ऑफ लिविंग सेंटर में संवाद

Shekhar Sharma
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जेन जी युवाओं ने आर्ट ऑफ लिविंग अंतरराष्ट्रीय केंद्र में जीवन, प्रेम, महत्वाकांक्षा और सफलता पर किया संवाद

बेंगलुरु। जब मन में भय हो, फिर भी अपने पक्ष में खड़ा होना पड़े, तब क्या किया जाए? क्या उपलब्धियों की अंतहीन दौड़ में फँसे बिना महत्वाकांक्षाओं का पीछा किया जा सकता है? उन माता-पिता को अपनी बात कैसे समझाएँ, जो हमें समझ ही नहीं पाते? और क्या धन, विलासिता तथा सफल आजीविका की आकांक्षा रखते हुए भी आध्यात्मिक रहा जा सकता है? बेंगलुरु स्थित आर्ट ऑफ लिविंग अंतर्राष्ट्रीय केंद्र में एकत्र हुए 2,000 से अधिक (Gen Z) जेन जी युवाओं के मन में ऐसे ही अनेक वास्तविक जीवन से जुड़े प्रश्न थे। उन्होंने ये दुविधाएँ वैश्विक आध्यात्मिक गुरु और एक प्रतिभागी के शब्दों में ‘कूल गुरु’ कहे जाने वाले गुरुदेव श्री श्री रविशंकर के सामने रखीं। गुरुदेव ने इन प्रश्नों के उत्तर सहज, स्पष्ट, विनोदपूर्ण और साथ ही गहरी अंतर्दृष्टि से भरे अंदाज़ में दिए, ऐसे उत्तर, जिनके द्वारा अंततः युवाओं के चेहरों पर मुस्कान भी आयी और मन में विचार मंथन भी हुआ.

इस बार अलग था मंजर

यह वातावरण किसी पारंपरिक आध्यात्मिक सभा जैसा बिल्कुल नहीं था। परिसर में गीतों की गूँज थी, उत्साह और उल्लास था, हँसी-मजाक था, संगीत और फैशन था और जीवन के विविध आयामों से जुड़े प्रश्नों की निरंतर धारा थी, जो चेतना और रिश्तों से लेकर महत्वाकांक्षा, धन और जीवन में अपनी राह खोजने तक से प्रेरित थे.

गुरुदेव ने सुंदर संतुलन समझाया

भय के बावजूद अपने पक्ष में खड़े होने के प्रश्न पर गुरुदेव ने दृढ़ता और लचीलेपन का सुंदर संतुलन समझाया। उन्होंने कहा, “आपको अपना पक्ष लेना चाहिए। साथ ही, लचीला भी रहना चाहिए।” उन्होंने समझाया कि हमारा तर्क हमारे ज्ञान से निर्मित होता है, जबकि हमारा ज्ञान सदैव सीमित होता है। जैसे-जैसे ज्ञान का विस्तार होता है, हमारी दृष्टि भी बदलती जाती है। इसलिए आवश्यक है कि हम उस सत्य के लिए दृढ़ता से खड़े हों जिसे इस समय जानते हैं, लेकिन अपने मन को इतना खुला रखें कि नए ज्ञान के साथ हमारी दृष्टि भी विकसित हो सके। लगातार उपलब्धियाँ हासिल करने के दबाव से जूझ रही इस पीढ़ी के लिए महत्वाकांक्षा और आंतरिक शांति के बीच संतुलन कैसे बने, इस प्रश्न का गुरुदेव का उत्तर अत्यंत संक्षिप्त था—“ध्यान।” बातचीत में माता-पिता और बच्चों के बीच का संबंध भी स्वाभाविक रूप से सामने आया। जब युवाओं ने पूछा कि वे अपने माता-पिता की भावनाओं को आहत किए बिना और अपना आत्मविश्वास खोए बिना अपनी इच्छाएँ कैसे व्यक्त करें, तो गुरुदेव ने टकराव के बजाय थोड़ा देने और लेने का मार्ग सुझाया। उन्होंने सहजता से कहा, “कभी उनकी, कभी आपकी।” उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि युवा अपने माता-पिता से मुस्कुराते हुए कह सकते हैं, “पिछली बार मैंने आपकी बात मान ली थी, इस बार आप मेरी बात मान लीजिए।” और फिर मुस्कुराते हुए उन्होंने कहा—“यही आपका ब्राउनी पॉइंट है।” प्रेम और रिश्तों जैसे सदाबहार विषय पर भी गुरुदेव ने बातचीत को एक अप्रत्याशित दिशा दे दी। उन्होंने सरल-सा प्रश्न पूछा—“क्या आपको साइकिल चलाना आता है?” संदेश स्पष्ट था—जीवन और रिश्तों को पुराने साँचे और पूर्वनिर्धारित धारणाओं के आधार पर समझने के बजाय स्वयं अनुभव करना सीखिए। जीवन की राह पर चलते हुए सबसे महत्वपूर्ण है—“आप बस वही रहें, जो आप हैं।” जब प्रश्न उठा कि आध्यात्मिकता और सफलता क्या एक-दूसरे के विरोधी हैं, तो गुरुदेव ने स्पष्ट किया कि ऐसा कोई विरोधाभास नहीं है। उनके अनुसार आध्यात्मिकता वास्तव में व्यावसायिक सफलता को सुदृढ़ कर सकती है। यह व्यक्ति में परिस्थितियों का सामना करने की क्षमता, अंतर्ज्ञान और असफलताओं से उबरकर फिर आगे बढ़ने का सामर्थ्य विकसित करती है। साथ ही, यह महत्वाकांक्षा को एक नैतिक दिशा भी प्रदान करती है। उन्होंने सरल तर्क दिया—“आप नहीं चाहते कि कोई आपके साथ छल करे, है न? तो फिर आप भी दूसरों के साथ छल न करें।” रुचि और जुनून बनाम ऊँची तनख्वाह वाली नौकरी की (Gen Z) जेन जी की दुविधा पर गुरुदेव का उत्तर बेहद व्यावहारिक था। उन्होंने कहा, “आपका जुनून आपसे कोई नहीं छीन सकता। लेकिन ऊँची तनख्वाह वाली नौकरी पाना कठिन है। इसलिए बेहतर है कि आप अच्छी तनख्वाह वाली नौकरी करें, अपने जुनून को भी साथ रखें और जो करना चाहते हैं, वह भी करते रहें।”

संवाद उत्सव में बदल गया

धीरे-धीरे संवाद उत्सव में बदल गया। फैशन शो ने परिसर में रंग, रचनात्मकता और Gen z जेन जी की विशिष्ट ऊर्जा भर दी। इसके बाद निरवाना स्टेशन के साथ ‘भजन क्लबिंग’ ने शाम को एक अनोखा रंग दिया, जहाँ भक्ति-संगीत आधुनिक बीट्स के साथ घुल-मिल गया। युवा गीतों के साथ गाते, थिरकते और एक साथ उत्सव मनाते दिखाई दिए। यह ऐसा दिन था, जहाँ जीवन के अनेक प्रतीत होने वाले विरोधाभास सहजता से एकाकार हो गए—आध्यात्मिकता और पॉप संस्कृति, महत्वाकांक्षा और आंतरिक शांति, जिज्ञासा और उत्सव।
एक ऐसा दिन, जिसने युवाओं को केवल उत्तर नहीं दिए, बल्कि उन्हें अपने प्रश्नों के साथ थोड़ा और गहराई से जीने, स्वयं को समझने और जीवन को अपनी सहजता के साथ अपनाने की प्रेरणा भी दी।

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