नई दिल्ली से US व इजरायल को ईरान वार्निंग

Shekhar Sharma
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ईरानी राष्ट्रपति की दो टूक किसी भी विदेशी दबाव या दादागिरी के आगे आत्मसमर्पण नहीं करेगा, खाड़ी क्षेत्र में शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व की इच्छा

नई दिल्ली। दिल्ली में खड़े होकर ईरानी राष्ट्रपति ने अमेरिका और इजरायल की नीतियों पर कड़ा प्रहार किया। उन्होंने स्पष्ट कहा कि ईरान किसी भी विदेशी दबाव या दादागिरी के आगे आत्मसमर्पण नहीं करेगा, लेकिन साथ ही उन्होंने खाड़ी क्षेत्र में शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व की इच्छा भी जताई। उन्होंने भारत सरकार की शानदार मेजबानी की सराहना करते हुए तकनीक और व्यापार सहयोग को नई ऊंचाइयों पर ले जाने का संकल्प लिया।

रवैये में बदलाव

नई दिल्ली में आयोजित ब्रिक्स (BRICS) शिखर सम्मेलन के दौरान ईरान के प्रति भारत के रुख में एक स्पष्ट और बड़ा ‘रणनीतिक बदलाव’ (Strategic Shift) देखा गया है। शिखर सम्मेलन से पहले तक पश्चिम एशिया में जारी जंग के माहौल में भारत का रवैया ईरान को लेकर काफी सतर्क, दूरी बनाए रखने वाला और इजरायल-अमेरिका की चिंताओं के प्रति अधिक झुका हुआ प्रतीत हो रहा था।

पहले का रवैया

अक्टूबर 2023 में इजरायल-हमास युद्ध शुरू होने और बाद में ईरान-इजरायल के बीच सीधे हमलों के दौरान, भारत ने अमेरिकी प्रतिबंधों और रणनीतिक साझेदारी के दबाव में ईरान से दूरी बनाई हुई थी। भारत ने ईरान से तेल आयात भी लगभग बंद कर दिया था ताकि अमेरिका नाराज न हो।

राष्ट्रपति भवन में स्वागत

दिल्ली ब्रिक्स सम्मेलन के मंच से भारत ने दुनिया को यह संदेश दिया कि वह किसी भी पश्चिमी दबाव में नहीं आएगा। भारत ने अपनी ‘रणनीतिक स्वायत्तता’ को सर्वोपरि रखते हुए ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियन का शानदार स्वागत किया और उन्होने प्रेसीडेंट ऑफ इंडिया द्रौपदी मुर्मू से भी राष्ट्रपति भवन में मुलाकात की। उनका गर्मजोशी से स्वागत किया। धर्म गुरूओं ने भी उनसे मुलाकात की।

चाबहार पोर्ट परियोजना तेज करेगा भारत

युद्ध की शुरुआत में भारत का आधिकारिक रुख इजरायल के प्रति बेहद सहानुभूतिपूर्ण था। इसे वैश्विक स्तर पर भारत का ईरान-विरोधी और इजरायल-समर्थक झुकाव माना जा रहा था। दिल्ली में भारत ने एक ‘शांतिदूत’ (Peacemaker) की भूमिका अपनाई। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने युद्ध में घिरे ईरान के साथ न केवल द्विपक्षीय बैठक की, बल्कि भारत की मध्यस्थता के कारण ही धुर विरोधी देशों—ईरान, संयुक्त अरब अमीरात (UAE) और सऊदी अरब—को सुबह 4 बजे तक चली मैराथन वार्ताओं के बाद एक साझा घोषणापत्र (नई दिल्ली डिक्लेरेशन) पर हस्ताक्षर करने के लिए राजी किया जा सका। श्चिम एशिया में तनाव के कारण भारत चाबहार बंदरगाह और अंतर्राष्ट्रीय उत्तर-दक्षिण परिवहन गलियारे (INSTC) जैसी महत्वपूर्ण परियोजनाओं पर खुलकर आगे बढ़ने से कतरा रहा था, जिससे ईरान के राजनयिक हलकों में थोड़ी मायूसी थी। दिल्ली में दोनों देशों ने साफ कर दिया कि युद्ध की स्थिति के बावजूद वे कनेक्टिविटी और आर्थिक सहयोग को नहीं रोकेंगे। भारत ने चाबहार पोर्ट परियोजना को और तेज करने तथा अमेरिका के ‘टैरिफ और प्रतिबंधों’ के दबाव को दरकिनार कर अपनी राष्ट्रीय मुद्राओं में व्यापार बढ़ाने पर ईरान के साथ गहरी सहमति जताई है।

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