योगी जी नहीं सुन रहे निगम अफसर

Shekhar Sharma
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शहर सर्राफा बाजार समेत पूरे महानगर में नालियों की टूटी हुई जालियां और खुले हुए मेनहॉल हादसों को दावत दे रहे

मेरठ। शहर सर्राफा बाजार समेत पूरे महानगर में नालियों की टूटी हुई जालियां और खुले हुए मेनहॉल हादसों को दावत दे रहे हैं। कई हादसे हो भी चुके हैं। लेकिन उसके बाद भी नगर निगम के अफसर लापरवाह बने हुए हैं। जब अफसरों ने सुनवाई नहीं की तो सीधे सीएम योगी से शिकायत कर दी है। शहर का सर्राफा इलाका बेहद व्यस्त और पुराना व्यापारिक क्षेत्र है, जहाँ नालियों के ढक्कन और जालियों का टूटा होना न केवल बड़े हादसों को न्योता दे रहा है, बल्कि रोज़ाना आने वाले हजारों ग्राहकों और व्यापारियों की सुरक्षा के लिए भी गंभीर खतरा है। महानगर में जगह-जगह नालियों की टूटी हुई जाल और खुले मेनहॉल जानलेवा साबित हो रहे हैं। नगर निगम और स्थानीय प्रशासन की इस लापरवाही के कारण शहर के विभिन्न इलाकों में लगातार गंभीर हादसे हो रहे हैं, जिसके चलते जनता में गहरा रोष है। शहर सर्राफा बाजार इलाके की बात करें तो शहर सर्राफा बाजार के अलावा नील की गली, लाला का बाजार, वैली बाजार, पेडामल, ठठेरवाडा, चौक नंदराम, शीश महल, खत्रियों का चौक, डालम पाड़ा, तीरगरान, गुजरी बाजार, इस्माइल नगर, खारी कुंआ, बीरू कुंआ, करमअली सरीखे ये तमाम इलाके शहर की पुरानी और घनी आबादी वाले इलाके कहलाते हैं। यहां छोटी-छोटी नालियों का जाल है। इन नालियों पर नगर निगम ने ढकने के लिए लोहे के जाल डलवाए हुए हैं, लेकिन उक्त तमाम इलाकों में मुख्य रूप से शहर सर्राफा इलाके में इन नालियों पर लोहे के जाल बुरी तरह से डेमेज हो चुके हैं। वो टूट गए हैं। अक्सर इनमें पैदल गुजरने वालों के पांव फंस जाते हैं, वो चोटिल हो जाते हैं। आरटीआई एक्टिविस्ट अवध बिहारी ने बताया कि इसको लेकर वह नगरायुक्त और जिलाधिकारी दोनों से शिकायत कर चुके हैं। अनेक बार अवगत कराया जा चुका है, अब उन्होंने थक हारकर सीएम योगी को शिकायती पत्र भेजा और आईजीआरएस पोर्टल पर भी शिकायत की है। अवध बिहारी बताते हैं कि केवल नालियों की जालियां ही डेमेज नहीं हैं, सीवरों के ढक्कनों का भी बुरा हाल है।

पांच साल में करीब पचास की मौत

आरटीआई एक्टिविस्ट की मानें तो मेरठ के खुले नालों और मैनहोल ने पिछले 5 वर्षों में लगभग 38 लोगों की जान ली है। प्रशासनिक अनदेखी से तंग आकर फरवरी 2026 में टीपी नगर क्षेत्र में एक महिला ने अपने बच्चे के नाले में गिरने की झूठी सूचना (मॉक इमरजेंसी) दे दी थी। इस कॉल के बाद जब पुलिस और नगर निगम की टीमें जेसीबी लेकर पहुंचीं, तो तीन घंटे की मशक्कत के बाद कोई बच्चा तो नहीं मिला, लेकिन महीनों से बंद पड़ा वह खतरनाक नाला पूरी तरह साफ हो गया। यह घटना सिस्टम को जगाने के लिए जनता की हताशा को दर्शाती है जनवरी 2026 में कैंटोनमेंट बोर्ड के काट के पुल के पास एक ई-रिक्शा चालक खुले नाले में गिर गया, जिसकी बाद में मृत्यु हो गई। इसी तरह दिल्ली रोड पर एक कार भी अनियंत्रित होकर नाले में जा गिरी थी, जिसमें सवार लोग बाल-बाल बचे। उसके बाद कैंट बोर्ड अफसरों की नींद टूटी और सेफ्टी के नाम पर वहां पर महज प्लास्टिक के तारों वाली जाली लगा दी गयी। सिवाल विधानसभा क्षेत्र में भी गलियों के बीच में खुले नाले और बिना कवर वाले मैनहोल हैं। जली कोठी और पूर्वा करामत अली इलाके में सड़कें तो बना दी गईं, लेकिन नालियों को खुला छोड़ दिया गया या उनकी सफाई ठप है, जिससे गंदा पानी सड़कों पर बह रहा है। रही सही कसर खुली नालियों की टूटी जालियां पूरी कर दे रही हैं। वार्ड 13 जयभीम नगर इलाके में सीवर लाइनें टूटने और मैनहोल के खुले होने के कारण लगातार जलभराव और दुर्घटनाओं का खतरा बना रहता है।

लगातार चल रहा है कार्य

टूटी हुई जालियों को लेकर नगर निगम अफसर लगातार कार्य की बात कर रहे हैं। नगरायुक्त सौरभ गंगवार ने बताया कि फिल्ड स्टाफ लगाया हुआ है। जहां से भी कोई शिकायत आती है वहां नगर स्वास्थ्य अधिकारी तत्काल संज्ञान लेकर कार्य करते हैं।

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