शाही जामा मस्जिद का हिस्सा तोड़ने पर हिंसा

Shekhar Sharma
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उज्जैन में सिंहस्थ कुंभ 2028 के मद्देनजर चल रहे सड़क चौड़ीकरण के नाम पर अफसरों ने शाही जामा मस्जिद का एक हिस्सा गिराया, विरोध पर आंसू गैस के गोले

नई दिल्ली। मध्य प्रदेश के उज्जैन में सड़क चौड़ीकरण और अतिक्रमण हटाने के प्रोजेक्ट के तहत शाही जामा मस्जिद के एक हिस्से को गिराए जाने को लेकर सोमवार, 28 सितंबर को वहां मुस्लिम समुदाय के लोग भड़क उठे। हिंसक झड़पें हुईं। उज्जैन के छत्री चौक स्थित शाही जामा मस्जिद की प्राचीनता और इसके निर्माण को लेकर अलग-अलग दावे और रिकॉर्ड सामने आए हैं। दावा है कि इस मस्जिद का निर्माण 14वीं शताब्दी के अंतिम दौर में मालवा सल्तनत के शुरुआती काल के दौरान हुआ था। हालांकि, इसे किसी एक विशिष्ट राजा या व्यक्ति द्वारा बनवाए जाने का स्पष्ट नामजद ऐतिहासिक रिकॉर्ड सार्वजनिक तौर पर मौजूद नहीं है। इतिहास के जानकारों के मुताबिक, उस दौर में उज्जैन मध्य भारत का एक प्रमुख व्यापारिक और प्रशासनिक केंद्र था। तत्कालीन समय के शासक, उनके शाही काफिले और बड़े प्रशासनिक अधिकारी जुमे की नमाज़ और विशेष त्योहारों पर यहाँ इबादत के लिए आते थे, जिसके कारण समय के साथ इसका नाम ‘शाही मस्जिद‘ पड़ गया। कानूनी विवाद के दौरान सामने आए आधिकारिक दस्तावेज़ों के मुताबिक, इस मस्जिद का अस्तित्व कम से कम 100 वर्ष से अधिक पुराना प्रमाणित है। इसमें वर्ष 1925 का सिंधिया रियासत (ग्वालियर राज्य के टाउन इम्प्रूवमेंट ट्रस्ट) का एक पत्र शामिल है, जिसमें मस्जिद के हिस्से को सुरक्षित रखने का निर्देश था। इसके अलावा, वर्ष 1985 के मध्य प्रदेश शासन के आधिकारिक गजट नोटिफिकेशन में भी इस मस्जिद के अस्तित्व और क्षेत्रफल का ब्योरा दर्ज है।

लोगों में गम और गुस्सा

प्राचीन मस्जिद के हिस्से को ध्वस्त किए जाने को लेकर लोगों में गम और गुस्सा है। कार्रवाई के विरोध में भीड़ मौके पर एकत्र हो गई। इस दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़प हो गई। पुलिस ने आंसू गैस के गोले छोड़े। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस और रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) ने लाठीचार्ज किया तथा आंसू गैस के गोले छोड़े। प्रशासन ने स्थिति बिगाड़ने और अफवाह फैलाने के आरोप में कुछ लोगों तथा सोशल मीडिया कंटेंट क्रिएटर्स के खिलाफ एफआईआर दर्ज की और कई उपद्रवियों को हिरासत में लिया। इलाके में ड्रोन और सीसीटीवी कैमरों से कड़ी निगरानी रखी जा रही है।

कुंभ मेले की तैयारियां

दरअसल, सिंहस्थ कुंभ 2028 के मद्देनजर चल रहे सड़क चौड़ीकरण प्रोजेक्ट के तहत यह कार्रवाई हो रही थी। खजूर वाली मस्जिद से गणेश चौक तक 730 मीटर लंबी सड़क के चौड़ीकरण के लिए धार्मिक स्थलों सहित कुल 272 बिल्डिंग प्रभावित हो रही हैं। इस प्रोजेक्ट के तहत शाही मस्जिद का एक हिस्सा भी दायरे में था। इस कार्रवाई के खिलाफ दायर याचिकाओं को मध्य प्रदेश हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दिया था। शाही मस्जिद कमेटी और मुस्लिम समुदाय का कहना है कि सड़क चौड़ीकरण के लिए धार्मिक स्थल को हटाने के बजाय वैकल्पिक व्यवस्था तलाशी जानी चाहिए।

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