एलपीजी की भारी किल्लत, काम धंधा छोड़कर कतार में लगा है पूरा देश
नई दिल्ली। ईरान के साथ चल रही लड़ाई की वजह से स्ट्रेट हाेर्मूज का रास्ता बंद कर दिए जाने की वजह से पूरी दुनिया के साथ ही देश में भी एलपीजी की भारी कमी हो गयी है। काम धंधे छोड़कर लोग एलपीजी के लिए कतारों में लगे हैं। यहां तक सुनने में आया है कि जिन के पास पर्ची नहीं है यानि जो बुक नहीं कराते और ब्लैक में सिलेंडर लेते हैं, उन्हें एलपीजी के लिए चार हजार से ज्यादा तक देने पड़ रहे हैं। बताया जा रहा है कि देश में केवल साठ दिन के लिए एलपीजी बाकि बची है। राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली की यदि बात करें तो दिल्ली में एलपीजी किल्लत के दौरान कई गैस एजेंसियों के बाहर लंबी कतारें लगी थीं। लोग सुबह से इंतजार करते दिखे, खासकर मसूदपुर, पटेल नगर, झंडेवालन, करोल बाग और पुरानी दिल्ली के इलाकों में। पैनिक बुकिंग, डिलीवरी में देरी और वैश्विक सप्लाई डिसरप्शन (स्ट्रेट ऑफ होर्मुज) की वजह से यह स्थिति बनी।
बड़े स्तर पर पलायन
एलपीजी संकट के चलते अब तमाम शहरों से पलायन शुरू हो गया है। बिहार और यूपी की ओर जाने वाली गाड़ियां मजदूरों से भर कर चल रही हैं। लोगों का कहना है कि जब एलपीजी नहीं मिल रहा है तो उनके काम पर बुरा असर पड़ रहा है। उनका यह भी कहना है कि कोरोना से भी बुरा संकट है ये। एलपीजी संकट का सबसे बुरा असर ऑटो ड्राइवरों, छोटे रेस्टोरेंट/ढाबों और प्रवासी मजदूरों पर सबसे ज्यादा असर पड़ रहा है। गैस संकट के चलते कई शहरों (दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु, पुणे, लखनऊ, नोएडा, कानपुर, रायचुर आदि) में गैस एजेंसियों के बाहर लंबी कतारें लगीं हैं। घरेलू सिलेंडर की डिलीवरी में देरी (21-25 दिनों से ज्यादा), पैनिक बुकिंग और अफवाहों से स्थिति बिगड़ी।
साठ दिन का स्टॉक
सरकार का कहना है कि देश में करीब 60 दिनों का स्टॉक है, रिफाइनरी उत्पादन बढ़ाया गया (40-50 हजार मीट्रिक टन/दिन), और पैनिक न फैलाएं। ऑनलाइन बुकिंग को बढ़ावा दिया जा रहा है। कुछ राज्यों को 20% अतिरिक्त सप्लाई दी गई। पाइप्ड गैस (PNG) कनेक्शन की डिमांड बढ़ी है, सरकार इसे बढ़ावा दे रही है।


