सीबीआई को मिले पुख्ता नताश व सनी को ले गए

Shekhar Sharma
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सीजीएसचएस के पूरे स्टाफ का फंसना तय, भ्रष्टाचार की रकम में होता था प्रत्येक साइन करने वाले कर्मचारी का हिस्सा

मेरठ। सीबीआई के छापे में सीजीएचएस में भ्रष्टाचार के पुख्ता साबूत मिले हैं। एडिशनल डायरेक्टर ने पूछताछ में सीबीआई के अफसरों को छकाने का पूरा प्रयास किया। लेकिन सूत्रों ने जानकारी दी है कि छापे की कार्रवाई में गंगानगर स्थित आवास घर और सीजीएचएस (केंद्रीय सरकार स्वास्थ्य योजना) के सूरजकुंड स्थित कार्यालय से गाजियाबाद सीबीाआई टीम के अफसरों को काफी पुख्ता सबूत मिल गए हैं। इस मामले में केवल एडिशनल डायरेक्टर ही नहीं पूरे स्टाफ की गर्दन फंसनी तय मानी जा रही है। कार्रवाई आज भी जारी रही। सीबीआई टीम ने अतिरिक्त निदेशक नताशा वर्मा के आदेश पर उनके निजी चालक सनी को रिश्वत लेते पकड़ लिया। सीबीआई की रेड लगभग 19 घंटे बाद खत्म हो गई। सीबीआई की टीम एडिशनल डायरेक्टर हेल्थ डॉक्टर नताशा वर्मा और उनके निजी सिक्योरिटी गार्ड सनी सिंह को अपने साथ लेकर गाजियाबाद रवाना हो गई। अब दोनो को गाजियाबाद स्थित सीबीआई कोर्ट में 24 घंटे के अंदर पेश किया जाएगा।

रिश्वत दो काम कराओ

सीजीएचएस का भुगतान रिलीज कराने के नाम पर रिश्वत मांगने का आरोप लगा है। सीबीआई के संग संतोष अस्पताल के डॉक्टर रविंद्र डागर की शिकायत पर कार्रवाई की है। सीजीएचएस का भुगतान कराने के नाम पर प्रत्येक अस्पताल से दो प्रतिशत की रकम वसूली जा रही थी। रविंद्र डागर से संपर्क करने का प्रयास किया गया। उनके मोबाइल पर मैसेज भी छोड़ दिया। सीजीएचएस (केंद्रीय सरकार स्वास्थ्य योजना) के सूरजकुंड स्थित कार्यालय पर गुरुवार की शाम को सीबीआई गाजियाबाद की टीम दो कारों में सवार होकर पहुंची। टीम के सदस्यों ने सीजीएचएस कार्यालय के सभी गेट पर कब्जा कर लिया। अतिरिक्त निदेशक नताशा वर्मा और उनके चालक सनी को कब्जे में ले लिया।

चालक सनी थामता था रकम

नताशा वर्मा के कहने पर उनका चालक सनी अस्पतालों के सीजीएचएस बिलो का भुगतान रिलीज कराने के नाम पर रकम वसूली कर रहा था। प्रत्येक अस्पताल के बिलों पर दो से पांच प्रतिशत तक रकम नगद वसूली जा रही थी। संतोष अस्पताल के डॉक्टर रविंद्र डागर की शिकायत पर सीबीआई ने यह कार्रवाई की है। नताशा वर्मा और उनके चालक को सनी को सीबीआई की टीम कार्यालय से अपने साथ उनके घर गंगानगर ले गई। उक्त घर में नताशा वर्मा के साथ ही सनी भी रहता है। सीबीआई की छानबीन में सामने आया कि डॉक्टर नताशा वर्मा ने यह रकम लेने के लिए अपने निजी सुरक्षा कर्मी सनी सिंह को जिम्मेदारी दी थी। शिकायतकर्ता रकम लेकर पहुंचा तो सनी ने कार में बुला लिया।

जैसे ही यह रकम थमाई वैसे ही सीबीआई की टीम ने सनी सिंह को दबोच लिया। सनी सिंह ने छूटते ही डॉक्टर नताशा वर्मा का नाम लिया। इसके बाद सीबीआई ने डॉक्टर नताशा को भी हिरासत में ले लिया।

आज भी अभियान चलाया जा रहा है। साथ ही निजी चालक सनी से भी पूछताछ की जा रही है। सीजीएचएस कार्यालय में तैनात स्टाफ को भी सीबीआई की टीम ने रोक लिया है। बताया जाता है कि स्टाफ से भी सघन पूछताछ हो रही है।साथ ही नताशा वर्मा की तरफ से हस्ताक्षर किए गए एमओयू को भी कब्जे में ले लिया है, जिन अस्पतालों के एमओयू पर नताशा वर्मा ने हस्ताक्षर किए हैं, उनकी भी गहनता से जांच की जा रही है।

पाई-पाई का हिसाब जोड़ रहे सीबीआई अफसर

सीबीआई के अफसर रिश्वत के तौर पर ली गयी रकम का पाई-पाई का हिसाब जोड़ रहे हैं। यह भी पता चला है कि इस मामले में कुछ बड‍़ी गिरफ्तारियां और हो सकती हैं। देखा जा रहा है कि उक्त अस्पतालों से कितनी रकम वसूली की बिलो के भुगतान पर हस्ताक्षर किए गए। बता दें कि नौ माह पहले भी सीजीएचएस कार्यालय के अतिरिक्त निदेशक और कार्यालय अधीक्षक व निजी कर्मचारी को गिरफ्तार किया गया था।

नौचंदी थाना क्षेत्र के सूरजकुंड पर CGHS की डिस्पेंसरी है। इसी परिसर में एडिशनल डायरेक्टर हेल्थ का भी दफ्तर बना हुआ है। गुरुवार शाम सफेद रंग की दो गाड़ियों ने डिस्पेंसरी के मुख्य दरवाजे से डिस्पेंसरी में प्रवेश किया। अंदर पहुंचते ही गाड़ी से उतरे लोगों ने एडिशनल डायरेक्टर डा. नताशा वर्मा के दफ्तर का रुख किया और डिस्पेंसरी का मुख्य दरवाजा भी अंदर से बंद कर लिया।

कुछ देर तक तो डिस्पेंसरी में मौजूद लोग कुछ समझ नहीं पाए लेकिन जैसे ही टीम को एडिशनल डायरेक्टर के दफ्तर में जाते देखा, वहां खलबली मच गई। किसी को समझने में देर नहीं लगी। पता चला सीबीआई की रेड पड़ी है। इसके बाद पूरे दफ्तर को सीबीआई की टीम ने अपने कब्जे में ले लिया। अपर निदेशक स्वास्थ्य से पूछताछ शुरू कर दी।

अगस्त, 2025 में भी डाली गई थी रेड

महज 9 महीने के अंदर CGHS की डिस्पेंसरी में CBI की यह दूसरी रेड है। 12 अगस्त 2025 की रात इसी तरह सीबीआई ने रेड डाली थी और तत्कालीन एडिशनल डायरेक्टर अजय कुमार व कार्यालय अधीक्षक लवेश सोलंकी को हिरासत में ले लिया था। उन पर भी भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज कर कार्रवाई की गई थी। उन पर 5 लाख रुपए की रिश्वत मांगने का आरोप लगा था।

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