कॉकरोच पार्टी को समर्थन से सत्ता में सन्नाटा

Shekhar Sharma
3 Min Read

सोनम वॉगचुक, योगेन्द्र यादव समेत कई फिल्मी हस्तियां भी खुलकर साथ आयीं, कॉकरोच पार्टी के भविष्य को लेकर अटकलों का दौर

नई दिल्ली। सीजेआई की एक टिप्पणी देश ही नहीं भारत के बाहर भी इतना बखेड़ा खड़ा कर देगी यह बात शायद सीजेआई ने भी नहीं सोची होगी। युवाओं को कॉकरोच बताने को लेकर की गई जिस टिप्पणी ने कॉकरोच पार्टी को खड़ा किया या कहें जन्म दिया उसको अब व्यापक समर्थन मिल रहा है। देश और दुनिया की हस्तियां जेनजी के साथ नजर आ रही हैं। हालांकि इसको लेकर कुमार विश्वास सरीखे भाजपाई समर्थक जो पहले फ्रंटफुट पर नजर आ रहे थे वो बैकफुट पर हैं। सबसे बुरा हाल खुद को नेशनल कहने वाले मीडिया का है, हालांकि सोशल मीडिया पर जरूर कॉकरोच पार्टी का जलवा नजर आता है। पर्यावरणविद वैज्ञानिक सोनम वॉगचुक ने तो कॉकरोच पार्टी के समर्थन में दिल्ली पहुंचने का एलान किया है।

भारी समर्थन का सिलसिला

कांग्रेस नेता शशि थरूर ने सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म एक्स पर लिखा ”मैं कॉकरोच जनता पार्टी के तेज़ी से उभरने को लेकर बेहद उत्सुक हूं। इसने जिसने सिर्फ़ पांच दिनों में ही इंस्टाग्राम पर करोड़ों फॉलोअर्स हासिल कर लिए हैं,” ”मैं युवाओं की निराशा को समझता हूं और यह भी देख पा रहा हूं कि वे इससे क्यों जुड़ाव महसूस कर रहे हैं। यही वजह है कि एक्स पर इस अकाउंट को रोका जाना बेहद नुक़सानदेह और समझदारी से परे है।”

सीपीआईएमएल लिबरेशन पार्टी ने एक्स पर लिखा, “क्या मोदी सरकार को लगता है कि कॉकरोच जनता पार्टी के सोशल मीडिया हैंडल्स को ब्लॉक करके वह जेनज़ी को रोक सकती है?””क्या होगा अगर कॉकरोच जनता पार्टी, बीजेपी और नमो के हैंडल्स के ख़िलाफ़ ‘अनफॉलो कैंपेन’ शुरू कर दे? एक्स को इंटरनेट की आज़ादी का सम्मान करना चाहिए और बिना किसी देरी के कॉकरोच जनता पार्टी के हैंडल को बहाल करना चाहिए।

टीएमसी की महुवा मोइत्रा  ने भी कॉकरोच जनता पार्टी के एक्स हैंडल पर रोक लगाने पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा था, ”ये फासीवाद है।

शिवसेना (यूबीटी) की नेता प्रियंका चतुर्वेदी ने एक्स पर , ”सोशल मीडिया पर बनी सीजेपी जैसी एक कल्पनात्मक सोच का जेन ज़ी की कल्पना और भावनाओं पर छा जाना इस बात का दुखद संकेत है कि युवाओं ने मौजूदा विपक्षी दलों से उम्मीद खोनी शुरू कर दी है”।” साफ़ है कि बीजेपी के खिलाफ नाराज़गी मौजूद है, लेकिन यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि वोटर स्थापित विपक्षी पार्टियों के बजाय एक नई काल्पनिक पार्टी पर भरोसा जताना ज़्यादा पसंद कर रहे हैं।

Share This Article