
शिक्षा व्यवस्था, बेरोज़गारी और महंगाई के मुद्दे पर भाजपा को घेर रहे हैं कांग्रेस सांसद, बैकफुट पर भाजपा

नई दिल्ली। जयपुर के कोटा के दशहरा मैदान में युवाओं की हुजूम की महफिल लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने लूट ली है। भारतीय जनता पार्टी के नेता भले ही कुछ भी कहें, लेकिन देश के युवाओं में राहुल गांधी के प्रति झुकाव और रूझान साफ नजर आता है। राहुल गांधी ने देश के युवाओं की दुखती रग और भाजपा को बैकफुट पर धकेलने वाली नस पर हाथ रख दिया है और वो है शिक्षा व्यवस्था की खामियां, सुरसा के मुंह की तरह फैल रही बेरोजगारी और आम आदमी खासतौर से पुअर मिडिल क्लास का दम निकाल रही महंगाई को हथियार बनाकर भाजपा को घेरने का प्लान बनाया है। हालांकि कोटा में युवाओं के कार्यक्रम में राहुल गांधी ने ना तो कोई राजनीतिक बात कही ना ही भाजपा पर कोई हमला बोला, लेकिन इसके बाद भी उनके निशाने पर मोदी सरकार का सिस्टम रहा।
युवाओं पर फोकस
लोकसभा चुनाव से पहले राहुल का सारा फोकस युवाओं पर है। राहुल गांधी की नज़र 2029 लोकसभा चुनाव पर है. वे नरेंद्र मोदी की सरकार को चुनौती देने के लिए युवा वर्ग पर अपना ध्यान केंद्रित कर रहे हैं। दरअसल उनका इरादा युवाओं के मुद्दों को भाजपा सरकार के खिलाफ हथियार बनाकर लड़ना है। लोकसभा चुनाव से ठीक पहले साल 2027 में सात राज्यों के चुनाव होने हैं, ऐसे में राहुल गांधी युवा छात्रों से संवाद कर रहे हैं। देश में युवाओं की आबादी करीब साठ लाख है। राहुल का फोकस इस साठ लाख वोटरों पर है। यदि यदि इन छात्रों के परिवार को भी शामिल किया जाए तो यह आबादी दो करोड़ के आसपास पहुंच जाएगी।
मंच पर नेताओं का जगह नहीं
कोटा में आयोजित कार्यक्रम में कांग्रेस के तमाम दिग्गज नेता पहुंचे थे लेकिन उनमें से किसी को भी मंच पर जगह नहीं दी गयी। राहुल गांधी ने मंच पर पहुंचते ही एलान कर दिया था कि यह गैर राजनीतिक बातचीत है। इस कार्यक्रम में एनएसयूआई के राष्ट्रीय अध्यक्ष विनोद जाखड़, पवन खेड़ा, राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत, नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली, प्रदेश अध्यक्ष गोविंद सिंह समेत कई नेता और कार्यकर्ता भी मौजूद रहे, लेकिन मंच पर किसी को जगह नहीं दी गयी।
पेपर लीक को बनाया हथियार
राहुल गांधी ने पेपर लीक को मोदी सरकार पर हमला करने का बड़ा हथियार बनाया। तमाम ऐसे युवा इस मौके पर थे जो कह रहे थे कि पेपर लीक देश की बड़ी समस्या ही नहीं दुनिया में भारत की बेइज्जती भी इससे है, लेकिन अब राहुल गांधी का साथ मिला है तो उम्मीद की किरन जगी है। राहुल गांधी ने इस मंच से कहा कि रा “यह सिर्फ़ पैसा वसूलने का सिस्टम बन चुका है. एक हज़ार लोगों में से सिर्फ़ बारह को ही रोज़गार मिलता है। हिंदुस्तान में सौ में से अस्सी इंजीनियर बेरोज़गार हैं।”


