जांच तो चंपक राय की भी होगी

Shekhar Sharma
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विहिप अध्यक्ष आलाेक कुमार की दो टूक कानून से ऊपर कोई नहीं, ना किसी को बचाने का किया जाएगा प्रयास

नई दिल्ली: कानून से ऊपर कोई नहीं है। जांच की जहां तक बात है तो जांच तो चंपक राय की भी होगी। किसी को बचाने की कोशिश नहीं की जाएगी। यह बात विश्व हिन्दू परिषद के अध्यक्ष आलोक कुमार ने एक साक्षात्कार में कही है। उन्होंने कहा कि श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव और VHP के उपाध्यक्ष चंपत राय के खिलाफ लगे आरोपों की भी जांच होगी। उन्होंने कहा, “मैं फिर दोहराता हूं कि पुलिस के पास किसी भी व्यक्ति के खिलाफ लगे आरोपों की जांच करने का अधिकार भी है और जिम्मेदारी भी। पुलिस चंपत के खिलाफ लगे आरोपों की भी जांच करेगी, अनिल मिश्रा के खिलाफ भी करेगी, गोपाल के खिलाफ भी करेगी। किसी को भी नहीं छोड़ा जाएगा।

3,300 करोड़ रुपये का दान इकट्ठा किया

आलोक कुमार ने कहा कि राम मंदिर पर फैसला आने और ट्रस्ट बनने के बाद VHP ने ट्रस्ट को आधिकारिक तौर पर पत्र लिखकर धन जुटाने में मदद की पेशकश की थी। उन्होंने कहा, “हमने 40 दिन का अभियान चलाकर चंदा इकट्ठा किया. मुझे साल याद नहीं है. ट्रस्ट बनने के कुछ समय बाद की बात है. यह एक बड़े स्तर का अभियान था. हम 12.5 करोड़ घरों तक पहुंचे. अगर हर घर में औसतन पांच लोग मानें, तो हमने 65 करोड़ लोगों से 3,300 करोड़ रुपये का दान इकट्ठा किया और उसे मंदिर बनाने वाले ट्रस्ट को सौंप दिया।”

उन्होंने कहा, “हमने अपने कार्यकर्ताओं से कहा था कि एक रुपया भी नकद नहीं लेना है. सारा पैसा चेक के जरिए लिया गया. ऐसी व्यवस्था थी कि हर शाम हमें पूरे दिन में जमा हुए पैसे की जानकारी मिल जाती थी और वह बैंक में जमा हो जाता था. आज भी उस सिस्टम के जरिए हर लेनदेन की पहचान की जा सकती है. उस समय जो पैसा इकट्ठा हुआ, उसकी पूरी जवाबदेही है. अभियान के दौरान जमा किए गए हर एक रुपये का हिसाब मौजूद है।” जब उनसे पूछा गया कि चंपत राय की वरिष्ठ जिम्मेदारी और उनके ड्राइवर का नाम सामने आने के कारण क्या उनकी भी कोई भूमिका या लापरवाही हो सकती है, तो उन्होंने कहा, “संभव है।

‘हिन्दुओं की भावना हुई आहत’

अयोध्या राम मंदिर के दान में कथित गड़बड़ी की खबर से हिंदुओं की भावनाएं आहत हुई हैं। उन्होंने कहा कि इस मामले की फास्ट ट्रैक जांच होनी चाहिए और राम मंदिर के रोजमर्रा के कामकाज को संभालने के लिए एक पेशेवर मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) नियुक्त किया जाना चाहिए। VHP प्रमुख ने कहा कि जिसके पास किसी अपराध की जानकारी है, वह FIR दर्ज करा सकता है।

सभी पर लगे आरोपों की हो जांच

उन्होंने कहा, “अखिलेश यादव कहते हैं कि उनके पास सबूत हैं. तो फिर अखिलेश यादव FIR क्यों नहीं दर्ज कराते? और मैं फिर दोहराता हूं कि ट्रस्ट की ओर से दर्ज FIR पुलिस को सिर्फ इन आठ लोगों से पूछताछ तक सीमित नहीं करती। पुलिस की जिम्मेदारी है कि पूरे मामले और वरिष्ठ लोगों तक के खिलाफ लगे सभी आरोपों की जांच करे।” आलोक कुमार ने कहा कि ट्रस्ट को बेहतर और ज्यादा प्रभावी तरीके से काम करना चाहिए था। पुलिस पूरे मामले की जांच करे और जिन लोगों ने कानून तोड़ा है, उन्हें चार्जशीट में शामिल करे।”

‘पांच माह में मिल जाए सजा’

आलोक कुमार ने कहा कि इसमें कोई शक नहीं कि हिंदू श्रद्धालु इस मामले से दुखी हैं और उन्होंने इस घटना पर अफसोस जताया। उन्होंने कहा, “हां, हम सब दुखी हैं। हमें इस पर अफसोस है. लेकिन यह भरोसा फिर से लौट सकता है, अगर ईमानदारी से जांच हो, पूरी मेहनत से जांच हो, तय समय में जांच पूरी हो, चार्जशीट फास्ट ट्रैक कोर्ट में दाखिल हो, रोज सुनवाई हो और जल्द फैसला आए। ” “मैं चाहता हूं कि चार से पांच महीने के भीतर सभी कानूनी प्रक्रियाएं पूरी होने के बाद दोषी लोग जेल पहुंचें और उन्हें सजा मिले।” “लोगों का भरोसा वापस लाने का यही एक तरीका है। उन्होंने कहा, “मुझे ऐसा नहीं लगता कि लोग दान नहीं देंगे।

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