चंपत व अनिल मिश्रा का इस्तीफा राहत या आफत

Shekhar Sharma
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चंपत राय और अनिल मिश्रा सरीखे बड़े नामों पर कार्रवाई को लेकर भारी दवाब, बड़ा सवाल क्या होगी कार्रवाई या मजह इस्तीफा भर

नई दिल्ली।श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट से जुड़े ‘चढ़ावा चोरी’ और दान में अनियमितता के गंभीर मामलों के कारण चंपत राय और डॉ. अनिल मिश्रा जनता और संतों के भारी आक्रोश का केंद्र बने हुए हैं। अयोध्या राम मंदिर चढ़ावा और दान विवाद में श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी अनिल मिश्रा का इस्तीफा मंजूर कर लिया है। जांच में अनियमितताएं पाए जाने पर दोनो के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की उम्मीद की जा रही है, लेकिन आरएसएस से जुड़े होने के चलते इस बात की उम्मीद कम है कि उनके खिलाफ कोई भी किसी प्रकार की कानूनी कार्रवाई की हिमातक करेगा। इतना ही नहीं हो सकता है कि उनको सेफ निकलने का रास्ता दे दिया जाए। वरिष्ठ भाजपा नेता विनय कटियार सरीखे नेता पहले सीएम योगी के स्तर से कठोर कार्रवाई का दम भर रहे थे, लेकिन कुछ घंटे पहले से अब विनय कटियार यूटर्न के अंदाज में नजर आ रहे हैं। इससे पहले उन्होंने संकेत दिए थे कि यदि जांच में भ्रष्टाचार या गबन साबित होता है, तो चंपत राय और अनिल मिश्रा को जेल भी जाना पड़ सकता है, लेकिन अब वो शांत नजर आ रहे हैं, मानों किसी ने शांत रहने को कह दिया हो। वहीं दूसरी ओर अब नृपेन्द्र मिश्रा की भूमिका पर भी गंभीर सवाल उठ रहे हैं।

कुछ भी नहीं ठीक

करोड़ों के चढावा चोरी मामले के बाद भले ही चंपत राय और अनिल मिश्रा सरीखों की विदाई हो गयी हो या कहें उन्हें बचा लिया गया हो, लेकिन इसके बाद भी सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है। इसके संकेत राम मंदिर ट्रस्ट की बैठक में मिल चुके हैं। भले ही श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की आपातकालीन बैठक में किसी प्रकार की हाथापाई या हिंसक हंगामा नहीं हुआ, लेकिन माहौल बेहद तनावपूर्ण था। बैठक में मुख्य बहस और नाराजगी चंदा चोरी के कलंक और आरोपियों की मौजूदगी को लेकर थी। सबसे ज्यादा नाराजगी गोपाल राव को लेकर थी। ट्रस्ट की बैठक में गोपाल राव की मौजदूगी पर नाराजगी जतायी गयी। गोपाल राव चंदा और चढ़ावा चोरी के आरोपों में घिरे विशेष आमंत्रित सदस्य हैं। जानकारों की मानें तो गोपाल राव जब बैठक में शामिल होने राम जन्मभूमि परिसर पहुंचे, तो उन्हें मुख्य बैठक से दूर रखा गया और शामिल नहीं होने दिया गया। ट्रस्टियों में इस बात को लेकर गहरी नाराजगी थी कि ऐसे गंभीर आरोपों के बाद उनका बैठक में आना उचित नहीं था।

कलंक कथा

जो कुछ भी चढावा चोरी को लेकर हुआ उसको कलंक कथा तक की संज्ञा दी गई। बैठक में मौजूद ट्रस्ट के अध्यक्ष महंत नृत्यगोपाल दास और कोषाध्यक्ष स्वामी गोविंद देव गिरी सहित अन्य सदस्यों के बीच इस बात को लेकर गंभीर चर्चा और तीखी असहमति दिखी कि इस घटना से पूरे देश में राम भक्तों की आस्था को ठेस पहुंची है। दुख व्यक्त करते हुए कहा कि “राम मंदिर पर बहुत बड़ा कलंक लग गया है, जिसके लिए हमने अपनी पूरी जिंदगी दे दी”।

कार्रवाई का दबाव

श्रीराम मंदिर में करोड़ों रुपए के चढावा चोरी मामले में आरोपियों चाहे वो कोई भी हो उन पर कार्रवाई को लेकर भारी दबाव पड़ रहा है। एसआईटी (SIT) की जांच और विपक्षी दलों द्वारा लगातार किए जा रहे हमलों के कारण अंदर मौजूद सभी सदस्यों के बीच कड़ी और त्वरित कार्रवाई करने को लेकर आपसी दबाव का माहौल बना रहा।

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