ना ध्वस्तीकरण पर स्टे ना सील हटाने के आदेश

Shekhar Sharma
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सुप्रीमकोर्ट के ऑर्डर कॉपी आयी सामने, टला नहीं है बरकरार है संकट
नर्सिंगहोमों पर संकट, ध्वस्तीकरण नहीं किया तो रद्द होंगे संचालन के लाइसेंस
स्वास्थ्य विभाग के साथ मिलकर आवास विकास ने नर्सिंगहोमों को भी थमाए ध्वस्तीकरण के नोटिस

मेरठ। सुप्रीमकोर्ट के 12 अगस्त के जिसे आदेश के नाम पर शास्त्रीनगर और सेंट्रल मार्केट में जश्र का माहौल था, जब कोर्ट का आदेश सामने आया तो उसमें ऐसा कुछ भी नहीं नजर आया जिसके बाद कहा जा सके कि सुप्रीम आदेश में शास्त्रीनगर व सेंट्रल मार्केट वालों को राहत मिल गयी है। सुप्रीम आदेश के लवो लुआब की बात करें तो उसमें ना तो ध्वस्तीकरण पर स्टे की बात कहीं कही गयी है और ना ही जिन भवनों को अब तक सील किया जा चुका है, उनकी सील हटाने का जिक्र कहीं भी पूरे आदेश में किया गया है। आदेश में जो कुछ लिखा गया है उसकी मानें तो फिर राहत का दावा किस बात को लेकर किया जा रहा है। सबसे प्रमुख बात जो आदेश में कही बतायी जा रही है वो यह कि सुप्रीमकोर्ट के आदेश में कहीं भी पुराने आदेश को नहीं छुआ गया है या उसके विपरीत कोई बात कही गई है। जश्र मनाने के उताबलेपन के बजाए बेहतर होता कि पहले सुप्रीम कोर्ट के आदेश की कॉपी का इंतजार किया गया होता। आदेश की कॉपी हाथ में आने के बाद तय होना चाहिए था कि जश्र होगा या स्यापा।

राहत मिली है तो फिर नोटिस क्यों

जो लोग दावा कर रहे हैं कि 12 अगस्त के आदेश में सुप्रीमकोर्ट ने राहत की बात कही है तो फिर सवाल उठता है कि यदि सुप्रीमकोर्ट से राहत मिल गयी है ताे फिर आवास विकास परिषद के अफसरों क्यों कर नर्सिंगहोम संचालकों नोटिस थमा रहे हैं। ये तमाम नोटिस स्वास्थ्य विभाग के साथ मिलकर दिए जा रहे हैं। इन नोटिसों का मजमून साफ कह रहा है कि जो हश्र सेटबैक के नोटिस वाले मकानों का होगा वहीं इन नर्सिंगहोम का भी होगा। यदि सुप्रीमकोर्ट से राहत मिल गयी है तो फिर क्यों कर आवास विकास नोटिस दे रहा है। ऐसा तो हो नहीं सकता कि आवास विकास सुप्रीमकोर्ट के आदेश के इतर जाकर काम करेगा। कड़वा सच यह है कि जो स्थित 12 अगस्त से पहले थी उसमें कोई बदलाव नहीं आया है। सुप्रीमकोर्ट के आदेश को लेकर शहर के विधि विशेषज्ञ भी कह रहे हैं कि राहत जैसी कोई बात नहीं है। दरअसल सुप्रीमकोर्ट ने सेंट्रल मार्केट और शास्त्रीनगर के लिए कोई स्पेशल आदेश नहीं जारी किया है। जो याचिका दायर की गयी है उसकी सुनवाई के बाद जिस स्टेट पॉलिसी की बात कही जा रही है उसमें भी सुप्रीमकोर्ट ने देश भर की राज्य सरकारों को महज सलाह भर दी है आदेश नहीं दिया है।

आदेश के बाद व्यापारियों में बेचैनी

सुप्रीमकोर्ट का आदेश सामने आने के बाद शास्त्रीनगर और सेंट्रल मार्केट के व्यापारियों और विशेषतौर पर उनमें जिन्होंने कानूनी लड़ाई के लिए अच्छी खासी मांगी गयी रकम पैराकारी करने वालों को थी वो अब खुद को ठगा सा महसूस कर रहे हैं, ऐसा जानकारों का मानना है। इतना ही नहीं कुछ के बारे में सुनने में आया है कि वो अपने पैसे भी वापस मांग रहे हैं। हालांकि अधिकृत रूप से ऐसा किसी ने नहीं कहा है लेकिन यदि कानूनी लड़ाई के नाम पर दी गयी रकम वापस मांगी जाने लगी तो फिर उनको मुश्किलों का सामना करना पड़ेगा जिनके बारे में कहा जा रहा है कि वो रकम जमा करने में सबसे आगे रहे हैं। यह भी आशंका है कि जो रकम दी गयी है उसको वापस करने का प्रकरण यदि छिड़ा तो आपमें सिर फुटव्वल सरीखे हालात बन सकते हैं क्योंकि जिस राहत के नाम पर पैसे जमा किया गए थे वो राहत क्लीयरकट आदेश में कहीं नजर नहीं आ रही है।

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