दरक रहे स्पेस टेक्नॉलॉजी से बनाए गए एक्सप्रेस वे व पुल

Shekhar Sharma
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अब उन्नाव कानपुर एक्सप्रेस वे दरका, इससे पहले दिल्ली देहरादून एक्सप्रेस वे और लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे खोल चुके हैं स्पेस टेक्नॉलाजी की पोल

नई दिल्ली। स्पेस टेक्नॉलॉजी से बनने वाले हाईवे और एक्सप्रेस वे सरकारी दावों की पोल खोलने का सिलसिला जारी रखे हुए हैं। ताजा मामला उन्नाव कानपुर एक्सप्रेस वे का सामने आया है। हाल ही में उन्नपाव के पास गंगा एक्सप्रेस वे और कुछ दिन पहले नेताओं के लावलश्कर ने पूरे तामझाम के साथ उद्घाटित किया लखनऊ कानपुर एक्सप्रेस वे दरारों की चपेट में आ गया है। ये दोनों ही एक्सप्रेस वे की सड़क घंसने और दरारें आने की खबर है। उन्नाव के सोनिक और बशीरतगंज के पास गंगा एक्सप्रेसवे का करीब 5 से 10 मीटर हिस्सा धंस गया है, जिससे निर्माण की गुणवत्ता पर सवाल उठे हैं।

लंबा चला आ रहा सिलसिला

उन्नाव क्षेत्र में गंगा एक्सप्रेसवे (किमी 421-422) के पास सड़क और एक्सपेंशन ज्वाइंट के किनारे दरारें व ढलान की मिट्टी धंसने की पुष्टि हुई है। कमोवेश यही दशा लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे की भी हुई। वहां पर भी उद्घाटन के कुछ हफ्तों के भीतर ही कई जगहों पर पैचवर्क उखड़ने और सड़क धंसने की समस्याएं लगातार बनी हुई हैं। न्नाव के दही क्षेत्र का है. बशीरतगंज के पास सराय कटियान नहर पुल के नजदीक गंगा एक्सप्रेसवे पर एक्सपेंशन ज्वाइंट के किनारे दरार दिखाई दी. यह दरार एक्सप्रेस वे के किलोमीटर संख्या 421-422 के बीच बताई जा रही है।  एक्सप्रेस वे की ढलान पर कई जगह नालियां भी टूटी मिली हैं. इनकी वजह से बारिश का पानी निकलने में परेशानी हो सकती है. नालियों की मरम्मत का काम भी कराया जा रहा है. ऐसे में गंगा एक्सप्रेसवे पर सामने आई दरार ने एक्सप्रेसवे की गुणवत्ता और रखरखाव को लेकर चर्चा बढ़ा दी है।

पिछले एक साल में भारत के कई महत्वपूर्ण एक्सप्रेसवे धंसे हैं और दर्जनों पुल गिरने की गंभीर घटनाएं सामने आई हैं, जिन्होंने बुनियादी ढांचे की गुणवत्ता पर बड़े सवाल खड़े किए हैं। दिल्ली देहरादून एक्सप्रेस वे की बात करें तो करीब 12,000 करोड़ रुपये की लागत से बने इस एक्सप्रेसवे के उद्घाटन के मात्र तीन महीने के भीतर शामली के पास बड़े-बड़े गड्ढे हो गए और सड़क की परत उखड़ गई। यूपी का गंगा एक्सप्रेस वे पर हसनपुर के फैयाज नगर और सोनिक इंटरचेंज के पास भारी बारिश के बाद करीब 10 मीटर सड़क पूरी तरह धंस गई और गहरे गड्ढे हो गए।दिल्ली मुंबई एक्सप्रेस वे पर मानसून की पहली बारिश में ही इस फ्लैगशिप एक्सप्रेसवे की सड़कों में भी दरारें और गड्ढे देखे गए। मुंबई-पुणे एक्सप्रेसवे (मिसिंग लिंक) उद्घाटन के तुरंत बाद ही इसके नए हिस्से पर बारिश के कारण सड़क की ऊपरी सतह उखड़ गई। देहरादून-पाओन्टा साहिब हाईवे के नंदा की चौकी के पास 16 करोड़ की लागत से बने नए पुल की अप्रोच रोड पूरी तरह से धंस गई

एक साल में गिरने व धंसने वाले पुल

पिछले एक साल में भारत में करीब 40 से 50 छोटे-बड़े पुल ढहने की घटनाएं सामने आई हैं, जिनमें सबसे खराब स्थिति बिहार और गुजरात में रही है। विक्रम शिला सेतु कामई 2026 में इस पुल का एक बहुत बड़ा स्लैब अचानक गिर गया, जिससे निर्माण गुणवत्ता पर भारी हंगामा हुआ। गोपाल गंज बेतिया ब्रिज मार्च 2026 में गोपालगंज में बन रहा दो खंभों वाला पुल लापरवाही के कारण नदी में समा गया, जिसके बाद कई इंजीनियर बर्खास्त किए गए। लंका पुला नवंबर 2025 में अररिया जिले में करीब 4 करोड़ की लागत से बना पुल अचानक ताश के पत्तों की तरह ढह गया। मुंगेर गंगा पुल यह पुल पिछले कुछ सालों में तीन बार बनते-बनते गिर चुका है, इसके बचे हुए हिस्सों में भी हाल ही में दरारें और संरचनात्मक कमियां देखी गईं। वड़ोदरा गांभीरा पुल जुलाई 2025 में वड़ोदरा को आणंद से जोड़ने वाला महिसागर नदी का पुल मेंटेनेंस की कमी के कारण अचानक ढह गया, जिससे एक बड़ा हादसा हुआ।शाहपुरा ब्रिज नेशनल हाईवे 45 पर स्थित शाहपुरा पुल का एक बड़ा हिस्सा अचानक जमींदोज हो गया।

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