ईरानी मिसाइलों ने तोड़ा डाला अमेरिकी फौजी ताकत का गुरूर, ईरान की घेराबंदी अब आर्थिक मोर्चे पर करेगा अमेरिका
नई दिल्ली।अमेरिका मेरिका ने सीधे सैन्य युद्ध के बजाय ईरान के खिलाफ अब अब तक का सबसे बड़ा आर्थिक शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। अमेरिका इसे ‘ऑपरेशन इकोनॉमिक आउटकास्ट’ (Operation Economic Outcast) या ‘इकोनॉमिक डी-डे‘ कह रहा है। हालांकि इसको लेकर पूरी दुनिया में अमेरिकी ताकत और गुरूर का मजाक बनाया जा रहा है। दुनिया के देशों में कहा जाने लगा है कि अब अमेरिका सुपर पॉवर नहीं रहा है। ईरान ने सुपर पावर का घमंड चूर-चूर कर दिया।
ईरान बोला तैयार हैं हम
जिस तरह से युद्ध के मोर्चाें पर ईरान ने अमेरिका की फौजी ताकत को नीचा दिखाया है, ईरान का कहना है कि आर्थिक मोर्चों पर भी उनका देश अमेरिका से निपटने को तैयार है। ईरान ने अमेरिका की इस आर्थिक जंग को खारिज किया है और कहा है कि वह इन प्रतिबंधों का मुकाबला करने के लिए पूरी तरह तैयार है। ईरान के सुरक्षा अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि जो देश अमेरिका की इस आर्थिक घेराबंदी का साथ देगा, उसे ईरान अपना दुश्मन मानेगा।
ये कर रहा है अमेरिका
अमेरिका ने ईरान की अर्थव्यवस्था के 5 मुख्य हिस्सों—डिजिटल एसेट्स (डिजिटल संपत्ति), टेक्नोलॉजी (तकनीक), सोना, विमानन (aviation), और शिपिंग (जहाजरानी) पर प्रतिबंध लगा दिए हैं। अमेरिका ने दुनिया भर की लगभग 60 कंपनियों, जहाजों और व्यक्तियों पर प्रतिबंध लगा दिए हैं जो ईरान की मदद कर रहे थे।
चीन की एंट्री ने बदली तस्वीर
ईरान-अमेरिका पिछले 6 महीनों से जंग लड़ रहे हैं। जंग कई बार खत्म होते-होते दोबारा शुरू हो गई है। इन सबके बीच, अचानक से ईरान की तरफ से वॉर का दी एंड करने का पहला सिग्नल आया है। ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान ने खुद ऐलान किया है कि ‘जंग खत्म करने का सही वक्त आ गया है’। पेजेशकियान का ये बयान वॉर में चीन की एंट्री के बाद आया है, जिसमें दोनों देशों को बातचीत से हल निकालने की हिदायत दी गई थी। पेजेशकियान का दावा है कि इस समय ईरान, वाशिंगटन के मुकाबले कहीं ज्यादा मजबूत, हावी और सम्मानजनक स्थिति में खड़ा है, इसलिए इसी मोड़ पर युद्ध विराम करना सबसे अक्लमंदी का कदम होगा। अमेरिका और इजरायल ने फरवरी में जो ईरान के खिलाफ जंग शुरू की थी उसके बाद अब तीनों देश एक ऐसी स्थिति में आ पहुंचे हैं, जहां से आगे सिर्फ तबाही ही दिख रही है। एक तरफ तेहरान ने दुनिया की सबसे अहम तेल सप्लाई लाइन ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ ब्लॉक कर रखा है, तो दूसरी तरफ अमेरिकी नौसेना ईरान की नाकाबंदी करने में जुटी है। हालांकि, अब चीन की सीधी एंट्री ने इस पूरे खेल का रुख ही बदलकर रख दिया है।


