ACM के आदेश ताक पर मृदुल पर FIR तय

Shekhar Sharma
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एसीएम सदर की रथयात्रा को सशर्त अनुमति के बाद भी बोली लगाकर लाखों का ना केवल चंदा बल्कि सदस्यता की रसीदों से भी भारी धन संग्रह

मेरठ। सदर दुर्गाबाड़ी प्राचीन जैन मंदिर के प्रति जिस अपराध को लेकर मृदुल जैन के खिलाफ पहले से अपर सिसिल जज सीनियर डिविजन के यहां से पहले से वारंट जारी है उसी मंदिर मामले को लेकर एक और एफआईआर की तलवार लटक गयी है। दरअसल में सदर दुर्गाबाड़ी स्थित प्राचीन जैन मंदिर में चढ़ावा चोरी और फर्जी दस्तावेज बनाकर मंदिर पर कब्जे के अभियुक्तों में शामिल मृदुल जैन ने एसीएम सदर के आदेशों को तार-तार कर दिया। दरअसल खुद को रथयात्रा का संयोजक बताकर मृदुल जैन ने सदर दुर्गाबाड़ी रथयात्रा निकालने की अनुमति मांगी थी, जिस पर एसीएम ने थाना सदर बाजार पुलिस ने रिपोर्ट तलब की। थाना सदर बाजार पुलिस ने अपने रिपोर्ट में अवगत कराया कि सदर दुर्गाबाड़ी जैन मंदिर में, जहां के लिए रथयात्रा की अनुमति मांगी गयी है, वहां अवैध रूप से काविज होने के लिए कुटरचित दस्तावेज बनाए गए तथा करोड़ा का वहां चढ़ावा चोरी किया गया। इसको लेकर रंजीत जैन समेत जिन 9 को अभियुक्त बनाया गया है उनमें मृदुल जैन भी शामिल है, उसके खिलाफ भी एफआईआर दर्ज की गयी है। मामला क्योंकि आस्था से जुड़ा है, रथयात्रा में किसी प्रकार का व्यवधान ना पड़े इसी के चलते एसीएम के यहां से यह सशत्र अनुमति दी गयी। इस अनुमति पत्र में मृदुल जैन को स्पष्ट आदेश दिए गए हैं कि किसी भी प्रकार का धन संग्रह मसलन वित्तिय लेनदेन नहीं करेंगे।

एसीएम के आदेश तार-तार

रथयात्रा के आयोजन के नाम पर खुद को संयोजक बताने वाले मृदल जैन ने एसीएम सदर की सशर्त अनुमति में दी गयीं हिदायतों तार-तार कर दिया। जानकारों का कहना है कि एसीएम की मनाही के बावजूद ना केवल बोलियां लगायी गयीं, बल्कि उन बोलियाें में आने वाले लाखों के धन का भी संग्रह मृदुल जैन ने किया। नौबत यहीं तक नहीं रही इससे भी आगे की हिमाकत दिखाते हुए मंदिर की सदस्यता की रसीदें काट दी गयीं। उससे भी भारी भरकम धन संग्रह किया गया। यहां सवाल यही है कि जिस अपराध के लिए पहले से एक एफआईआर दर्ज है, वो अपराध दोबारा किया गया। मसलन पहले भी मंदिर की अवैध कमेटी बनाने और कुटरचित दस्तावेज तैयार करने की एफआईआर रंजीत जैन व मृदुल जैन समेत 9 के खिलाफ दर्ज है, वहीं अपराध दोबारा किया गया यानि जब मंदिर की कोई कमेटी ही नहीं है तो फिर किस अधिकार से मंदिर की सदस्यता शुल्क की रसीदें काटी जा रही हैं। लेकिन इससे भी बड़ा अपराध एसीएम की मनाही के बावजूद बोलियां लगाकर लाखों का धन संग्रह कर रसीदों का काटा जाना है, जब मंदिर जी की कोई कमेटी ही नहीं है तो फिर रसीद किस संस्था की दी जा रही हैं। अच्छा तो यह होता कि एसीएम सदर की अनुमति व हिदायतों के बाद अनुमति के बाद बोली लगाने व धन संग्रह से मृदल जैन दूर ही रहते विधि विशेषज्ञों का कहना है कि एसीएम के निर्देशों के उल्लंघन का यह पूरा मामले मृदुल जैन के खिलाफ एक और एफआईआर के लिए पर्याप्त है।

श्रीजी की भव्य शोभायात्रा पर दिया डा. संजय जैन ने बल

इस संबंध में पूर्व में एफआईआर दर्ज कराने वाले ऋषभ एकाडेमी के सचिव डा. संजय जैन का कहना है कि यह पूरा मामला सदर जैन समाज की आस्था से जुड़ा है, श्रीजी की शोभायात्रा भव्यता से निकाली जानी चाहिए। इसमें किसी प्रकार का व्यावधान उचित नहीं, लेकिन इस सब में प्रशासनिक आदेशों की अवहेलना उचित नहीं। उनकी तो यही कामना है कि सदर जैन समाज की आकांक्षाओं व आस्था के अनुरूप श्रीजी की भव्य शोभायात्रा निकाली जानी चाहिए।

इन्हें मिले श्रीजी की शोभायात्रा के सौभाग्य

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