मुसलमानों के विरोध से नाराज हैं मोहन भागवत

Shekhar Sharma
5 Min Read

मोहन भागवत ने कहा कि यदि कोई हिंदू यह सोचता है कि भारत में कोई मुस्लिम नहीं होना चाहिए, तो वह एक हिंदू नहीं

नई दिल्ली/न्यूयार्क। मुसलमानों को भारत से निकालने की बात करने वालों खासकर भाजपा के ऐसे नेताओं ने संघ प्रमुख मोहन भागवत खासे नाराज हैं। उन्होंने यह बात पुरजोर तरीके से अमेरिका के न्यूयार्क में भी उठायी। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत ने न्यूयॉर्क में ‘वन वर्ल्ड वन ह्यूमैनिटी’ कार्यक्रम में कहा कि यदि कोई हिंदू यह सोचता है कि भारत में कोई मुस्लिम नहीं होना चाहिए, तो वह एक हिंदू नहीं रह जाएगा।

‘हिंदुत्व का मतलब मुस्लिमों को बाहर करना नहीं’

कार्यक्रम में बोलते हुए भागवत ने कहा कि दिल्ली में एक कार्यक्रम के दौरान कुछ मुसलमानों ने उनसे पूछा था कि क्या हिंदू राष्ट्र में मुसलमानों का स्थान होगा, इस पर उन्होंने कहा था कि अगर कोई सोचता है कि भारत में मुसलमानों की जगह नहीं है, तो यह हिंदुत्व नहीं है। कार्यक्रम में बोलते हुए RSS प्रमुख ने कहा कि वह न तो धार्मिक विद्वान हैं और न ही वहां मौजूद धार्मिक नेताओं की तरह कोई धार्मिक प्राधिकारी हैं। लेकिन वह ऐसे समाज में काम करते हैं, जिसकी पारंपरिक सोच है कि धर्म अलग हो सकते हैं, लेकिन मानवता एक है।भागवत ने कहा,

‘2018 में दिल्ली में मेरी व्याख्यान श्रृंखला के दौरान वहां मौजूद कुछ मुस्लिम भाइयों ने मुझसे पूछा था कि आप हिंदू संगठन हैं और हिंदू राष्ट्र की बात करते हैं, तो हमारा क्या होगा? क्या आप हमें देश से बाहर निकाल देंगे? मैंने उनसे कहा था कि नहीं, यह हिंदुत्व नहीं है। कार्यक्रम में भागवत ने आगे कहा कहा कि अगर कोई हिंदू यह सोचता है कि भारत में कोई मुसलमान नहीं होना चाहिए, तो यह हिंदू नहीं रह जाएगा। RSS सुप्रीमो ने कहा, ‘अगर कोई हिंदू यह सोचता है कि भारत में कोई मुस्लिम नहीं होना चाहिए, तो वह हिंदू नहीं रह जाएगा। अगर आप खुद को हिंदू कहना चाहते हैं तो आपको यह मानना होगा कि सभी रास्ते एक ही लक्ष्य तक पहुंचते हैं और हर इंसान का सम्मान और गरिमा समान है। इंसानों के बीच कोई भेद नहीं है।”

‘सत्य एक है और मानवता उसी सत्य से पैदा हुई है’

भागवत ने कहा कि सत्य एक है और मानवता उसी सत्य से पैदा हुई है, इसलिए पूरी मानवता एक है। उन्होंने कहा कि सत्य तो एक ही है, लेकिन अलग-अलग लोग और परिस्थितियां उसे अलग-अलग तरीकों से बताते और समझाते हैं। उन्होंने कहा,

‘सत्य एक है और मानवता उसी सत्य की उपज है। इसलिए मानवता एक है। सत्य एक ही है, लेकिन उसे बताने वाले के अनुसार उसे कई तरीकों से समझाया गया है। हम इंसान होने के नाते अपने दिमाग में बने विचारों और धारणाओं के एक तरह से कैदी हैं।’

‘धर्मों की पहचान रीति-रिवाजों से’

मोहन भागवत ने कहा कि दुनिया में कई धर्म हैं और आज के समय में धर्मों की पहचान काफी हद तक उनके रीति-रिवाजों और धार्मिक परंपराओं से होती है। उन्होंने कहा कि किसी धार्मिक व्यवस्था में रहने और उस मार्ग के जरिए ईश्वर तक पहुंचने की कोशिश करने के लिए धार्मिक अनुशासन और रीति-रिवाजों का पालन भी जरूरी होता है। उन्होंने कहा, ‘आज दुनिया में कई धर्म हैं और उनकी पहचान काफी हद तक उनके रीति-रिवाजों से होती है। किसी धार्मिक अनुशासन का पालन करने और उस रास्ते को ईश्वर तक पहुंचने का माध्यम मानने के लिए इन रीति-रिवाजों का अनुशासन भी जरूरी है।’

‘समाज शिक्षित नहीं होगा तो भटकाव आ जाएगा’

RSS प्रमुख ने कहा कि समाज को लगातार सही दिशा और शिक्षा देना जरूरी है। अगर ऐसा नहीं किया गया तो धीरे-धीरे समाज में भटकाव और गलत धारणाएं पैदा हो सकती हैं। उन्होंने कहा, ‘अगर हम समाज को लगातार शिक्षित नहीं करते रहेंगे तो उसमें भटकाव आने लगता है। इतिहास के दौरान किसी समय ऐसा हुआ, लेकिन मैं यह नहीं बता सकता कि वह समय कौन सा था। इसके बाद हमारा समाज और देश विदेशी आक्रमणों का निशाना बना और बहुत सी चीजें हमसे छिन गईं।’

Share This Article