सदर दुर्गाबाड़ी स्थित प्राचीन पंचायती जैन मंदिर के फर्जी चुनाव दिखाकर काविज होने वाले 9 के खिलाफ पुलिस ने दायर की कोर्ट में चार्जशीट, चढ़ावा चोरी से आहत है सदर जैन समाज
मेरठ। सदर दुर्गाबाड़ी स्थित प्राचीन पंचायती जैन मंदिर में करीब पांच सौ करोड़ के चढ़ावा चोरी मामले में फर्जी चुनाव दिखाकर मंदिर पर बलात काविज होने के मामले में थाना सदर बाजार पुलिस ने जिन 9 के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया है और अदालत में चार्जशीट दाखिल की है, उनमें से तीन नाम ऐसे हैं जिन्हें विधि विशेषज्ञ यानि कानून के जानकार डेंजर जोन में मान रहे हैं। पहली फुर्सत में पुलिस इन्हें सलाखों के पीछे पहुंचाने का काम करेगी। जैसी की आशंका भी जतायी जा रही है। और यह आशंका निर्मूल नहीं है, इस प्रकार की आशंका जताने वाले विधि विशेषज्ञ इसके पीछे तमाम तकनीकि कारण गिना रहे हैं। जिसके बाद इस बात में कोई शकशुब्हा नहीं रह जाता कि तथाकथित कमेटी के ये स्वयं-भू पदाधिकारी डेंजर जोन में है। यहां एक और बात स्पष्ट की जानी जरूरी है वो यह कि इनमें एक नाम ऐसा है जिसकी पुलिस को सरगर्मी से तलाश है। हत्थे चढ़ते ही पुलिस अदालत में पेश कर चौधरी चरणसिंह जिला कारागार भेजने में तनिक भी देरी नहीं लगाएगी। इसके साफ संकेत मिल रहे हैं। दरअसल मामला सदर जैन समाज के श्रद्धालुओं की भावना से जुड़ा होने की वजह से पुलिस अपनी ओर से इस मामले में देरी के मूड में हैं। लेकिन सबसे बड़ा सवाल जो अभी बाकि रह गया है वो यह कि वो तीन कौन है जिन्हें डेंजर जोन में माना जा रहा है और उसके तकनीकि कारण या कहें कानूनी वजह भी गिनायी जा रही हैं। जिनके खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है और उनमें जिन तीन को गंभीर खतरे में बताया जा रहा है उनमें पहला नाम पूर्व में लंबे अरसे तक जेल की सलाखों के पीछे रहे रंजीत जैन हैं। सदर जैन समाज के लोग बताते हैं कि रंजीत जैन ने लंबे समय तक जेल की सलाखों के पीछे से बाहर आने के लिए एड़ियां रगड़ीं, तब कहीं जाकर वह सशर्त जमानत पाकर वह जेल से बाहर आ सके। दूसरे और तीसरे नंबर पर जिन्हें चढ़ावा चोरी मामले में डेंजर जोन में बताया जा रहा है उनमें मृदुल जैन और दिनेश जैन का नाम लिया जा रहा है। हालांकि यह कहना अभी जल्दबातजी होगी कि पुलिस पहले किस पर हाथ डालेगी या डाल सकती है। हाथ भले ही किसी पर डाला जाए लेकिन इतना तय है कि मुकदमें के बाद अदालत में चार्जशीट पहुंच जाने और अदालत के द्वारा चार्जशीट का संज्ञान ले लिए जाने के बाद इन तीन पर खतरा बढ़ गया है।
खतरे की वजह
इन तीन पर खतरे की जो कानूनी या तकनीकि वजह बतायी जा रही है उनमें से यदि रंजीत जैन और दिनेश जैन की बात करें तो इन दोनों को कानून के जानकार सोफ्ट टारगेट मान रहे हैं। क्योंकि इस मामले में इन्हें अदालत से अभी तक या कहें जब से यह मामला शुरू हुआ है और मुकदमा दर्ज हुआ है, कोई राहत नहीं मिली है। बात रही मृदुल जैन की तो उन्होंने जरूर हाईकोर्ट से जमानत हासिल कर ली थी, लेकिन जो जमानत हासिल की गयी या ली गई, वह केवल चार्जशीट दाखिल होने तक ही प्रभावी थी। अदालत में चार्जशीट दाखिल होने के साथ ही जो जमानत हाईकोर्ट से ली गयी थी वह स्वत: ही निष्प्रभावी हो गयी है। त्यौहारी सीजन होने की वजह से इन दिनों पुलिस का शड्यूल काफी व्यस्त चल रहा है। लेकिन पुलिस के व्यस्त शड्यूल का अर्थ समय मिल जाना या राहत मिल जाना बड़ी भूल और चूक भी साबित हो सकती है। इसकी वजह से यदि गाफिल होना ही दुखदायी साबित हो सकता है।
चढ़ावा चोरी की रकम
पांच सौ करोड़ की चढ़ावा चोरी की जहां तक बात है तो जानकारों की मानें तो जितना सोना, चांदी, हीरे और बहुमूल्य आभूषण मंदिर जी में थे यदि चढ़ावे के तौर पर आयी नकदी को भी अलग कर दिया जाए तो सोने का जो रेट आज है उससे यदि कीमत आंकी जाए तो करीब पांच सौ करोड़ यह रकम बैठती है। चढ़ावा चोरी कर सदर जैन समाज की धार्मिक आस्था को आहत करने के इस मामले को उजाकर करने वाले जैन समाज के बड़े समाजसेवी व ऋषभ एकाडेमी के सचिव डा. संजय जैन बताते हैं कि मंदिर जी में चढ़ावे की जो रकम चोरी की गयी है वह कितनी थी, विवाद इस बात का है नहीं, बल्कि चढ़ावा चोरी करने के लिए तथाकथित कमेटी और उनके मददगारों ने जो हथकंड़े अपनाए मुख्य सवाल वह है। इसके लिए फर्जी चुनाव दिखाए गए। कभी आम सभा नहीं बुलायी गयी। कुटरचित दस्तावेज फर्जी चुनाव कराने के लिए तैयार किए गए। ना को खाता ना ही कोई बही आज तक डिप्टी रजिस्ट्रार कार्यालय में प्रस्तुत किया गया। डिप्टी रजिस्ट्रार कार्यालय से लगातार चुनाव के सबूत मांगे जाते रहे। खातों की डिटेल मांगी जाती रही। जिस सीए का नाम खातों को लेकर बताया गया उससे भी साफ मना कर दिया कि उसके साइन ही नहीं है। मंदिर जी का चढ़ावा चोरी करने वालों ने इस बात तक की परवाह नहीं की कि उनके कृत्य से सदर जैन समाज के श्रद्धालुओं की भावना आहत होंगी। सदर जैन समाज अब एक ही बात चींख-चींख कर कह रहा है कि संवैधानिक व कानूनी तरीके से मंदिर जी के चुनाव कराने के लिए जो भी रास्ता निकलता हो वह निकाला जाना चाहिए। सदर जैन समाज जब मंदिर जी के चुनाव चाहता है। समाज के लोगों की भावना मंदिर जी में किए गए चढ़ावा चोरी से बुरी तरह से आहत हैं।


