अवैध को नेता चलवा रहे या फिर अफसर

Shekhar Sharma
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मेरठ में भारी बड़ी संख्या में चल रहे हैं अवैध स्वीमिंग पूल, सिस्टम को किसी बड़े हादसे का इंतजार, हादसों से सबक को तैयार नहीं अधिकारी

मेरठ। हादसों से सबक ना सीखना या एक हादसे के बाद उस पर लीपापोती कर दूसरे हादसे का इंतजार करना लगता है सिस्टम चलाने वालोें की आदत में शुमार हो गया है। मेरठ में बड़ी संख्या में ऐसे स्वीमिंग पूल हैं जिनके संचालन की ना तो अनुमति ली गयी है ना ही मानकों के मुताबिक उन्हें चलाया जा रहा है। इसीलिए पूछा जा रहा है कि ऐसे स्वीमिंग पूलों को नेता चलवा रहे हैं या फिर अफसर। लिसाड़ी क्षेत्र जनकपुरी इलाके में हादसों में मासूम की मौत के बाद भी ऐसे स्वीमिंग पूल यदि चल रहे हैं तो इसके लिए कसूरवार कौन है। हैरानी की बात तो यह है कि इतने बड़े हादसे के बाद भी अफसर सुप्तावस्था में नजर आ रहे हैं। ऐसे हादसे आइंदा ना हों, इसके लिए फिलहाल हाथ पांव हिलाते नहीं दिख रहे हैं। प्रशासन या संबंधित विभागों के पास इनकी सही संख्या और एनओसी (अनापत्ति प्रमाण पत्र) संबंधी कोई रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं है। पूर्व में भी कई हादसे हो चुके हैं। इस साल जनकपुरी इलाके के अलावा पिछले साल भी पुल में एक किशोर की दर्दनाक मौत हो गयी थी। समय पर उसे इलाज तक नहीं मिला था।

क्या कहते हैं नियम कायदे

नियमानुसार स्वीमिंग पूल का संचालन करने के लिए योगी सरकार के खेल महकमे से अनुमति अनिवार्य है। इसके लिए सक्षम अधिकारी स्पोर्ट स्टेडियम में बैठते हैं। मेरठ की बात करें तो अनुमान है कि यहां सौ से ज्यादा स्वीमिंग पूल संचालित किए जा रहे हैं। और कुछ तो ऐसे भी बताए जाते हैं जो पुराने शहर में आबादी के बीच लिसाड़ी गेट, ब्रह्मपुरी और नौचंदी क्षेत्र सरीखे इलाकों में चल रहे हैं। यहां यह भी याद दिला दें कि पिछ्रले दिनों स्वीमिंग पूल हादसे में 12 साल के जिए मासूम की मौत लापरवाही के चलते हुई वह लिसाड़ीगेट क्षेत्र में पड़ता है। वहीं दूसरी ओर यदि सौ भी स्वीमिंग पूल संचालित हो रहे हैं तो इनमें से कितनों की अनुमति ली गयी है। बताया गया है कि अनुमति तो केवल एक ने ही ली है।

ये हैं मानक

नियमानुसार स्वीमिंग पूल संचालन के लिए जरूरी है कि वहां लाइफ स्पोर्ट सिस्टम एक्टिवेट हो। जीवन रक्षक की मौजूदगी अनिवार्य है। नजदीकी अस्पताल व पुलिस स्टेशन का मोबाइल नंबर जगह-जगह अंकित होना चाहिए। इसके अलावा फिल्ट्रेशन प्लांट, पूल की गहराई के निशान, पूल का अधिकतम आकार 25×50 मीटर और न्यूनतम 6×10 मीटर होना चाहिए। लर्निंग पूल की गहराई 4.5 फीट से अधिक नहीं होनी चाहिए। महिला – पुरुष दोनों के लिए अलग शौचालय की सुविधा अनिवार्य रूप से होनी चाहिए। कुशल ट्रेनर भी पूल में होने चाहिए। पूल को खेल निदेशालय से अनुमति प्राप्त होनी चाहिए। कोच राष्ट्रीय या राज्य स्तर का खिलाड़ी होना चाहिए, और लाइफ गार्ड साई द्वारा प्रमाणित या फौज /पीएसी से जुड़ा होना अनिवार्य है। नियम भी हैं और कायदे भी है और पालन कराने वाला सिस्टम लेकिन काम करने को तैयार नहीं कोई।

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