जैसे पहले उठाया वैसे फिर उठा गए रामजी

Shekhar Sharma
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सांसद के आग्रह पर खत्म किया धरना, मांगें ना मांनी गयी तो दोबारा से धरने की चेतावनी, पूछा पहले धरना खत्म गए थे क्या किया

मेरठ। पीएम मोदी के मेरठ आने से ठीक पहले जिस प्रकार से सांसद और विधायक तथा मंत्री व संगठन अध्यक्ष ने पहले धरना खत्म कर बाजार खुलवा दिया था, ठीक उसी तर्ज पर सांसद अरुण गोविल आज सेक्टर दो पहुंचे और धरने पर बैठी महिलाओं को उठा गए। लेकिन महिलाओं से जब पूछा कि क्या बात तय हुई तो उनका इतना ही कहना था कि सांसद आए। उन्होंने कुछ बातें कहीं और सुनीं भीं। उन्होंने आग्रह किया इसलिए धरनाखत्म कर दिया गया है। लेकिन सांसद को भी इस बार बता दिय है कि धरना उनकी बात रखने के लिए आज उठा दिया गया है, लेकिन यदि सरकार में सुनवाई नहीं हुई तो धरना निरंतर चलता हुआ माना जाए।

तैयार था माहौल

सासंद के आने का कार्यक्रम पहले से ही तय था। धरना स्थल पर यह समचार सुबह पहुंच गया था। उम्मीद की जा रही थी कि कुछ ठोस बात कहकर धरना खत्म कराया जाएगा, लेकिन ठोस कुछ नहीं था। सांसद के आने से पहले भारत माता की जय और जय श्रीराम के नारों ने माहौल बनाने में पूरी मदद की। चौदह दिन से धरने पर बैठी महिलाओं के बीच जब सांसद पहुंचे तो वो जानते थे कि काफी देरी से आए हैं और महिलाएं सुनने में कोई कोरकसर नहीं छोड़ेगी, लेकिन जितनी आश्चांका थी वैसा कुछ नहीं हुआ लेकिन सुनाने में कोई कमी भी नहीं रखी गयी। महिलाओं ने जो भी सवाल उठाए उनका कोई ठोस उत्तर ना तो सांसद और ना ही सांसद के साथ चल रही भाजपा नेताओं की मंडली पर था और ना ही मौके पर मौजूद आवास विकास के अफसरों के पास कोई उत्तर था। महिलाओं ने एक ही सवाल किया कि जिस सेटबैक के नाम पर नोटिस चस्पता किए जा रहे हैं उसका आधार क्या है। उन्होंने सांसद से ही पूछ किया कि क्या आवास विकास परिषद के अफसरों को जेा कागज उन्होंने पहले जारी किया है उनका सीधा इशारा साल 1982 के उस पुर्जे पर था जिसमें किसी प्रकार के सेटबैक ना होने की बात कही गयी है। इसके अलावा महिलाओं ने सवाल किया कि जो मकान आवास विकास परिषद ने बेचे हैं उनमें कोई सेटबैक नहीं फिर आवंटियों से किस प्रकार से सेटबैक मांगा जा रहा है। सांसद को महिलाओं की बात जायज लगी। लेकिन उस वक्त वह कुछ कहने या पक्का वादा करने की स्थिति में नहीं थे सोच चुप रहे। आवास विकास अफसर भी चुप खड़े सुनते रहे। महिला जो ठोस आश्वासन चाहती थीं वो उन्हें नहीं मिल सका। लेकिन जो भाजपा और प्रशासन चाहता था वो हो गया यानि धरना उठावा दिया गया।

यह है प्रमुख मांग

सेंट्रल मार्केट के व्यापारी और सेक्टर दो की महिलाओं की प्रमुख मांगों की यदि बात करें तो महिलाओं का कहना है कि सेटबैक के नाम पर जो नोटिस जारी किए जा रहे हैं वाे तुरंत वापस लिए जाएं। जब आवास विकास परिषद अपने पुराने बेचे मकानो में कोई सेटबैक नहीं छोड़ रहा है तो उनसे सेटबैक की बात क्यों। वहीं दूसरी ओर सेंट्रल मार्केट के वो व्यापारी जिनके प्रतिष्ठान सील हैं और ध्वस्तीकरण की तलवार लटकी है उनको सरकार से फौरी मदद यानि ध्वस्तीकरण हमेशा के लिए टलजाने का भरोसा चाहिए। लेकिन दोनों ही मांगे अभी पूरी होती नजर नहीं आ रही हैं।

तब मेला तो अब अकेला क्यों

पीएम मोदी और सीएम मोदी जब रैपिड रेल के लोकार्पण को पहुंचे थे तब भी सेंट्रल मार्केट का मामला पीक पर था। पीएम के आने से ऐन पहले बेमियादी बंद का एलान कर दिया गया। प्रशासन और भाजपा वालों के हाथ पांव फूल गए। आनन-फानन में नेताओं की गाड़ियां सेंट्रल मार्केट की ओर दौड़ने लगीं। इनमें सांसद अरुण गोविल के अलावा कैंट विधायक अमित अग्रवाल, महापौर हरिकांत अहलूवालिया, राज्यमंत्री डा. सोमेन्द्र तोमर, महानगर भाजपाध्यक्ष विवेक रस्तौगी के अलावा भाजपा के तमाम नेता शामिल थे। सभी ने मिलकर शटर उठा दिए बाजार खुलवा दिया। लेकिन अब जब धरना खत्म कराने की बात आयी तो भाजपा के नाम पर सांसद को अकेला भेजा गया। पार्टी में इसके भी निहितार्थ कार्यकर्ता निकाल रहे हैं कि कहीं इस प्रकरण को लेकर सांसद को ही तो धार पर नहीं रखे जा रहे हैं। वैसे मेरठ में लोकसभा चुनाव में टिकट मांगने वालों की लंबी फेरिस्त है।

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