
1947 मे अविभाजित भारत से आए और मेरठ मे आकर बसने वाले वयोवद्ध गणमान्य नागरिकों को किया सम्मानित
मेरठ। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के संपर्क विभाग द्वारा शंकर आश्रम पर 1947 मे विभाजन के समय पाकिस्तान से विस्थापित होकर भारत आए पीड़ित परिवारों के साथ विभाजन की त्रासदी को स्मरण किया गया। कार्यक्रम में 1947 मे अविभाजित भारत से आए और मेरठ मे आकर बसने वाले वयोवृद गणमान्य नागरिकों को सम्मानित किया गया जिनमे स्यालकोट से आए श्रीमती आशा शर्मा, डेरा इस्माइल खान से आए भीष्मलाल जी, लायलपुर से आये लक्ष्मीदास जी, सरगोदा से आए जोगेंद्र लाल जी, गुजरावाला से यशपाल जी, मिंट गोमरी से आई कृष्णा जी, ताराचंद अरोड़ा जी, प्रीतम सिंह जी, रावलपिंडी से आए कमांडेंट के वी दत्ता जी, सत्यदेव जी, लाहौर से आए एस के वैद्य जी, झंग से आए कृष्ण ढल जी, डेरा गाजी से आए रामलाल जी, मियाँवाला से आए मदनलाल गुलाटी जी आदि का अभिवादन किया गया। यह सभी अपने परिवार सहित कार्यक्रम मे उपस्थित हुए जहाँ इनकी वर्तमान पीढ़ियां भी कार्यक्रम मे उपस्थित रही।
दोबारा ना पैदा हो वैसे हालात
कार्यक्रम मे दिल्ली से आए मुख्य वक्ता अशोक त्यागी ने अपने उदबोधन मे कहा की स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर विभाजन को स्मरण करना इसलिए आवश्यक है क्योंकि यदि विभाजन के कारकों को भूल गए तो फिर वही स्थिति उत्पन्न होगी, विभाजन के 3 मुख्य कारण थे प्रथम अंग्रेजों की फूट डालो राज करो की नीति, दूसरा कांग्रेस की सत्ता प्राप्ति के लिए जल्दबाजी और तीसरा सबसे महत्वपूर्ण इस्लाम की विस्तारवादी एवं कट्टरवादी सोच जो आज भी ज्यों की त्यों विद्यमान है भारत का यह अंतिम विभाजन मानव इतिहास का सबसे बड़ा विस्थापन एवं नरसंहार सिद्ध हुआ था अविभाजित भारत से विस्थापित होकर जो भारत के ही इस भाग मे आए उन्हें शरणार्थी कहना भी उचित नहीं है बल्कि वह तो पुरुषार्थी थे जो अपने व्यापार, घर बार, खेती छोड़कर किसी प्रकार संघर्ष करके हजारों किलोमीटर की यात्रा के पश्चात् जीवित भारत पहुंचे और यहाँ पुनः स्वयं को एवं परिवार को स्थापित किया। हमें अपनी नई पीढ़ियों को अपना यह संघर्ष व विभाजन के कारणों को इसलिए बताने की आवश्यकता है ताकि उन्हें अपने अखंड भारत राष्ट्र की पूर्व स्थिति व उसके विभाजन के कारणों का ज्ञान रहे। हमें यह भी विचार करना चाहिए की क्या जिन समस्याओं के समाधान के रुप मे कांग्रेस व मुस्लिम लीग ने भारत का विभाजन को स्वीकार किया क्या उन समस्याओं का समाधान हो गया है? ऐसा नहीं हुआ क्यूंकि समस्याएं तो आज भी विद्यमान हैँ आज भी पाकिस्तान व बांग्लादेश मे हिन्दू, सिक्ख, जैन व बौद्ध समाज के लोगों के साथ अत्याचार हो रहे हैँ वहीं भारत मे रह रहे कुछ मुस्लिम आज भी इस्लाम की विस्तारवादी योजना का एजेंडा चला रहे हैँ। हमें अपने घरों मे अविभाजित अखंड भारत का मानचित्र अवश्य लगाना चाहिए ताकि नई पीढ़ियों को ज्ञात रहे ही की हमने क्या क्या खोया है और नई पीढ़ी के साथ यह संकल्प भी लेना चाहिए की हम पुनः अपने प्रयासों से एक दिन भारत को अखंड स्वरूप मे पुर्नस्थापित करेंगे।
अन्य वक्ता
कार्यक्रम के अन्य वक्ताओं मे दर्शन लाल अरोड़ा क्षेत्र कार्यकारिणी सदस्य एवं विनोद भारतीय सह विभाग संघचालक ने भी विभाजन को स्मरण करते हुए अपने विचार व्यक्त किये। अविभाजित भारत से विस्थापित होकर भारत आए कई वृद्धजनो ने भी अपने व अपने परिवार के साथ हुए हृदयविदारक स्मरण साझा किये।
ये रहे मौजूद
कार्यक्रम मे मुख्य रूप से अशोक बेरी आरएसएस के अखिल भारतीय कार्यकारिणी सदस्य, अनिल जी प्रान्त प्रचारक, सुरेन्द्र सिंह जी प्रान्त प्रचार प्रमुख, कृष्ण कुमार प्रान्त बोद्धिक शिक्षण प्रमुख, विनय प्रान्त सह व्यवस्था प्रमुख, विनीत कौशल विभाग प्रचारक, निपुण अग्रवाल विभाग संपर्क प्रमुख, पंकज राज शर्मा विभाग प्रचार प्रमुख, अक्षय, हिमांशु राजौरा, कशिश आदि गणमान्य लोगों की उपस्थिति रही।


