सहारनपुर की मस्जिद बुलडोज किसे नफा किसे नुकसान

Shekhar Sharma
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वेस्ट यूपी में रालोद को मुसलमानों की नाराजगी से चुनावी नुकसान का खतरा, सपा और कांग्रेस की ओर एकतरफा जा सकते हैं मुसलमान

नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश के सहारनपुर में कलेक्ट्रेट परिसर के भीतर बनी 100 साल से अधिक पुरानी एक कथित मस्जिद को जिला प्रशासन ने अवैध निर्माण मानते हुए बुलडोजर से ढहा दिया। यह कार्रवाई शनिवार, 5 सितंबर 2026 की तड़के करीब 4 से 5 बजे के बीच भारी पुलिस बल की मौजूदगी में की गई। समाजवादी पार्टी (SP) और असदुद्दीन ओवैसी समेत कई विपक्षी नेताओं ने इस कार्रवाई को लेकर सरकार पर तीखा हमला बोला है और इसे गलत ठहराया है।

भाजपा के मुस्लिम नेताओं की लाचारी

आम मुस्लिम समाज और धार्मिक गुरुओं के बीच यह भावना गहरी हो रही है कि भाजपा में शामिल बड़े मुस्लिम चेहरे (जैसे केंद्रीय या राज्य स्तर के अल्पसंख्यक मोर्चे के नेता और प्रवक्ता) केवल चुनावों में ‘पसमांदा मुस्लिम’ या ‘सबका साथ-सबका विकास’ की बात करते हैं। सहारनपुर में 100 साल से पुरानी मस्जिद को तड़के सुबह ढहाए जाने जैसे संवेदनशील मुद्दों पर इन नेताओं की चुप्पी को समाज “कम्युनिटी के हितों से समझौता” और व्यक्तिगत पदों को बचाने की लाचारी के रूप में देख रहा है।

रालोद से बढ़ेगी मुसलमानों की दूरी

रालोद वर्तमान में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) का हिस्सा है, जिसकी अगुवाई भाजपा कर रही है। पश्चिमी यूपी में मुस्लिम समुदाय का एक बड़ा हिस्सा भाजपा की “बुलडोजर नीति” और इस तरह की प्रशासनिक कार्रवाइयों का मुखर विरोधी रहा है। ऐसे में, भाजपा के साथ सरकार में शामिल होने के कारण मुस्लिम मतदाताओं के बीच रालोद को लेकर नाराजगी और दूरी बढ़ सकती है, क्योंकि विपक्ष इस मुद्दे को सीधे तौर पर अल्पसंख्यकों पर हमले के रूप में पेश कर रहा है। जयंत चौधरी की अगुवाई में रालोद ने वेस्ट यूपी में पारंपरिक ‘जाट-मुस्लिम’ सामाजिक समीकरण (जो किसान आंदोलन के समय काफी मजबूत हुआ था) के दम पर अपनी जमीन वापस पाई थी। लेकिन भाजपा के साथ जाने के बाद से ही इस समीकरण में दरारें देखी जा रही थीं। मस्जिद ढहाए जाने जैसी संवेदनशील धार्मिक घटनाएं रालोद के लिए इस धर्मनिरपेक्ष किसान-गठबंधन को पूरी तरह से एकजुट रखना बेहद मुश्किल बना देंगी।

सपा कांग्रेस का बढ़ा प्रभाव

सहारनपुर और आस-पास के क्षेत्रों में समाजवादी पार्टी (SP) और कांग्रेस का मजबूत आधार है। इस घटना के तुरंत बाद सपा प्रमुख अखिलेश यादव, सहारनपुर के कांग्रेस सांसद इमरान मसूद और कैराना की सपा सांसद इकरा हसन ने प्रशासन की कार्रवाई का कड़ा विरोध किया है। इस आक्रामक रुख के कारण मुस्लिम वोटों का झुकाव इंडिया (INDIA) गठबंधन (सपा-कांग्रेस) की तरफ और अधिक मजबूत हो सकता है, जिससे रालोद को राजनीतिक नुकसान होने की संभावना बढ़ जाती है।

चुनावी समीकरण

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि वेस्ट यूपी में स्थानीय स्तर पर मुस्लिम मतदाता अक्सर उसी उम्मीदवार या दल को चुनते हैं जो भाजपा को हराने की सबसे मजबूत स्थिति में हो। चूंकि रालोद अब एनडीए का हिस्सा है, इसलिए इस तरह की बड़ी घटनाओं के बाद आम मुस्लिम मतदाता रालोद से दूरी बनाकर सपा-कांग्रेस गठबंधन को एकतरफा वोट देने की ओर बढ़ सकता है।

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