ईरान की सीमा से गुजरने वाले स्ट्रेट हार्मूज से कारोबारी शिप पर रोक से बौखला गयी थी दुनिया
नई दिल्ली। स्ट्रेट हार्मूज पर ईरान की रोक ने यूएस के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को घुटनों पर ला दिया। इस समुद्री रास्ते पर ईरानी मिसाइलों के पहरे के बाद पूरी दुनिया बूंद-बूंद तेल और गैस के लिए तरसने लगी थी। तमाम ऐसे देश थे जहां तेल गैस की कीमतें आसमान छू रही थीं। नॉटो और यूरोप समेत तमाम देश इसके लिए डोनाल्ड ट्रंप की वॉर नीति को जिम्मेदार ठहरा रहे थे। जानकारों का कहना है कि स्ट्रेट हार्मूज ही था जिसने ट्रंप को लड़ाई खत्म करने के लिए मजबूर किया।
लड़ाई रूकी है ट्रंप की मुश्किलें नहीं
दाे सप्ताह के लिए भले ही लड़ाई थम गयी हो लेकिन ट्रंप की मुश्किलों का सिलसिला अभी जारी है। अमेरिका में ट्रंप को उनके विरोधी एक नाकाम राष्ट्रपति के रूप में पेश कर रहे हैं। सड़कों पर उनका विरोध्र आज भी दुनिय नहीं भूली है जब एक करोड़ अमेरीकि सड़कों पर उनके खिलाफ उतर आए थे। इसके अलावा ट्रंप प्रशासन के कई सीनियर ऑफिसर उनकी नीतियों के विरोध में इस्तीफे दे चुके हैं। ईरान से जंग को लेकर दुनिया में उनकी फजीहत भी जग जाहिर है। इन तमाम चीजों से उबरने में ट्रंप को वक्त लगेेगा हो सकता है कि वह उबर भी ना पाएं और कुर्सी छोड़नी पड़े।
अकेले पड़ गए थे ट्रंप
ईरान से लड़ाई मोल लेकर डोनाल्ड ट्रंप दुनिया ही नहीं अपने देश में भी अकेले पड़ गए थे। इस बात को वह अच्छी तरह से जानते थे।ईरान द्वारा 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल के हमलों के बाद लगाए गए स्ट्रेट होर्मूज की आंशिक नाकाबंदी ने वैश्विक व्यापार को बाधित कर दिया है, जिससे तेल की कीमतें बढ़ गई हैं और दुनिया भर में ईंधन की कमी हो गई है।ईरान के जवाबी हमलों की गूंज पूरे खाड़ी क्षेत्र में सुनाई दी है और इसने लेबनान के हिजबुल्लाह और यमन के हौथियों को भी इसमें शामिल कर लिया है, जिनमें से दोनों ने इजरायल पर हमले किए हैं, जिससे संघर्ष काफी बढ़ गया है।ट्रम्प ने अपने ट्रुथ सोशल बयान में कहा कि अमेरिका पहले ही अपने सभी सैन्य उद्देश्यों को “पूरा कर चुका है और उससे आगे भी बढ़ चुका है” और “ईरान के साथ दीर्घकालिक शांति से संबंधित एक निश्चित समझौते की दिशा में काफी आगे बढ़ चुका है”।उन्होंने कहा कि अमेरिका को ईरान से 10 सूत्रीय प्रस्ताव मिला है, “और हमारा मानना है कि यह बातचीत के लिए एक व्यावहारिक आधार है”। उन्होंने कहा कि अमेरिका और ईरान “विवाद के लगभग सभी बिंदुओं” पर सहमत हो गए हैं, और दो सप्ताह की अवधि समझौते को “अंतिम रूप देने और उसे लागू करने” में सहायक होगी।


