दुनिया ने ली राहत की सांस थमी जंग

Shekhar Sharma
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नई दिल्ली/तेहरान/न्यूयार्क। केवल ईरान, इजरायल और यूएस ही नहीं भारत समेत पूरी दुनिया को जिस खबर का इंतजार था आज भोर से पहले वो खबर आ गयी। अमेरिका औ ईरान के बीच समझौता हो गया है। इसके साथ ही ईरान को लेकर इजरायल औरयूएस ने जो गलतफैमी पाली थी वो भी दूर हो गयी है। इसमें कोई दो राय नहीं कि मिडिल ईस्ट में ईरान बड़ी ताकत बनकर उभरा है। यदि समझौता नहीं होता तो ईरानी हालात का सामान करने को तैयार थे, इस बात को डोनाल्ड ट्रंप जानते थे, लेकिन वो अब ईरान के साथ जंग को जारी रखने की स्थिति में बिलकुल नहीं थे। ईरान के साथ मोल ली गई लड़ाई ने अमेरिका की चूलें हिला कर रख दीं। थोपी गई जंग और जंग के बाद दुनिया की नजरों में बेहतर साबित हुई ईरान को इसकी भारी कीमत चुकानी पड़ी। अपने सर्वोच्च धार्मिक नेता आयतुल्ला खामेनेई समेत सौ से ज्यादा टॉप कमांडरों को खोना पड़ा, लेकिन इतनी बड़ी कीमत चुकाने के बाद यूएस और इजरायल को यह समझ आ गया कि ईरान वो नहीं जो समझ रहे थे।

भारत के लिए भी गुड न्यूज

भारत समेत पूरी दुनिया के लिए इससे अच्छी कोई दूसरी खबर नहीं हो सकती कि ईरान के साथ अमेरिका और इजरायल ने जो लड़ाई शुरू की थी वह अब खत्म हो गयी है। जिस मंजर की आशंका के चलते  ईरान और इजरायल समेत अमेरिका के मित्र देश बेहद डरे और सहमे थे, वो एन मौके पर टल गया। लेकिन इस सबके बीच शायद भारत के लिए यह अच्छी खबर नहीं है कि इस समझौते में पाकिस्तान एक बड़ा हीरो बनकर उभरा है। समझौता होने पर अमेरिका और ईरान दोनों ने ही पाकिस्तान का शुक्रिया किया है। लेकिन बड़ा सवाल यह कि जो समझौता यूएस ने ईरान से किया है क्या इजरायल उसका पालन करेगा। दुनिया के तमाम देश इसको लेकर आशंका जता रहे हैं।

ईरान ने नहीं टेके घुटने

लड़ाई थम गयी है समझौता भी हो गया है, लेकिन ईरान इस लड़ाई में मिडिल ईस्ट में खासतौर से बड़ी ताकत बनकर उभरा है, हालांकि इसकी उसको बड़ी कीमत चुकानी पड़ी है। यूएस एयर स्ट्राइक में उसके सर्वोच्च धार्मिक नेता समेत करीब सौ टॉप कमांडर मारे गए हैं, लेकिन ईरान ने यह कीमत अदा कर यह भी साबित कर दिया है कि यदि अब उसके साथ टकराव मोल लिया तो अच्छा नहीं होगा।

एक लंबी रात की सुखद सुबह

ईरानियों के लिए यह एक बहुत लंबी रात रही है. कई लोगों को लग रहा था कि डोनाल्ड ट्रंप की धमकी के बाद अमेरिका बिजलीघरों, सड़कों और पुलों पर भारी बमबारी करेगा। लेकिन एक सुखद समाचार मिला। सब लोग उस समय-सीमा का इंतज़ार कर रहे थे, जो तेहरान में बुधवार को सुबह के करीब 03:00 बजे की थी। युद्धविराम का एलान तेहरान में करीब 01:00 बजे हुआ, लेकिन कई लोग तब भी जाग रहे थे। समझौते पर मिली-जुली प्रतिक्रियाएं देखने को मिली हैं। पिछले कुछ दिनों में लोग किराना, खाने-पीने का सामान और मोमबत्तियाँ खरीद रहे थे, साथ ही पानी जमा कर रहे थे, क्योंकि उन्हें डर था कि बिजली नहीं रहेगी। अब उन्हें कुछ हद तक राहत मिली है कि बिजलीघरों पर हमला नहीं होगा।वहीं दूसरी ओर, शासन के खिलाफ रहने वाले कई लोगों का मानना था कि यह युद्ध, अपनी सारी भयावहता और नुकसान के बीच, सत्ता परिवर्तन का कारण बनेगा. लेकिन ऐसा नहीं हुआ। अब उन्हें एक ऐसे शासन का सामना करना होगा जो इस युद्ध में घायल हुआ है, और जिसकी अर्थव्यवस्था भी ढह चुकी हैवहां की सत्ता अब पहले से ज्यादा ग़ुस्से में है, और शायद वो अपने विरोधियों के लिए उदार बिलकुल भी ना हो।

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