नोटिस को बताया अफसरों की निर्ममता

Shekhar Sharma
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शास्त्रीनगर सेंट्रल मार्केट पर धरने में शामिल लोगों पर अफसरों की दवाब बनाने की रणनीति

मेरठ। शास्त्रीनगर सेंट्रल मार्केट में आवास विकास के नोटिसों के खिलाफ चल रहे महिलाओं के धरने को मिल रहे व्यापक समर्थन से परेशान पुलिस प्रशासन के अफसरों ने धरने में शामिल और उनको समर्थन देने वालों को नोटिस थमा दिए हैं। इन नोटिसों को लेकर अफसरों के खिलाफ तमाम लोगों ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। इसको अफसरों की निर्मता की संज्ञा दी है। वहीं दूसरी ओर जानकारों का कहना है कि धरने से लोगों का जुड़ाव व नाराजगी ने सिस्टम को चलाने वालों की चिंता बढ़ी दी है। सबसे ज्यादा परेशान संगठन और सरकार है। सभी के मिले जुले प्रयासों को नोटिस के रूप में देखा जा रहा है।

अवमानना के नोटिस

नोटिस देने वाली नौचंदी पुलिस का तर्क है कि न्यायालय की अवमानना संबंधी नोटिस जारी किए हैं। इनमें सपा नेता जीतू नागपाल, शैंकी वर्मा समेत दर्जनों लोगों के नाम शामिल हैं। शैंकी वर्मा काफी पहले से धरने के साथ हैं। माना जा रहा है कि विपक्ष के जो भी नेता धरने को समर्थन देने पहुंचे थे सभी को नोटिस दिए जा सकते हैं लेकिन लोगों को इंतजार सपा विधायक अतुल प्रधान को नोटिस मिलने का है। लोगों का कहना है कि देखते हैं कि सपा विधायक को पुलिस अवमानना का नोटिस थमाने की हिम्मत दिखाती है या नहीं। ऐसा नहीं कि धरने का समर्थन करने वाले केवल विपक्षी दल ही रहे हैं। भारतीय जनता पार्टी में भी तमाम ऐसे लोग हैं जो सुप्रीमकोर्ट का आदेश आने के बाद भी धरना स्थल पर देखे ही नहीं गए खुलकर समर्थन में भी हैं। तो क्या पुलिस सत्ताधारी दल के इन लोगों को भी नोटिस जारी करेगी। यह बड़ा सवाल है।

कुछ भी कर धरना खत्म करने की कवायद

देर रात करीब 12 बजे से पुलिस ने नोटिस बांटने की कार्रवाई शुरू की। धरने में शामिल कुछ महिलाओं को भी नोटिस दिए गए हैं। नौचंदी थाना इंस्पेक्टर अनूप कुमार की ओर से जारी नोटिस में न्यायालय अवमानना अधिनियम, 1971 का हवाला देते हुए कहा गया है कि किसी भी न्यायिक कार्यवाही में हस्तक्षेप करने या उसके प्रभाव को प्रभावित करने वाली गतिविधियों से दूर रहें। ऐसा करने पर संबंधित लोगों के खिलाफ विधिक कार्रवाई की जाएगी। प्रशासन ने नोटिस में सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के अनुपालन में सहयोग करने की अपील भी की है। साथ ही चेतावनी दी गई है कि किसी भी प्रकार की विरोधात्मक गतिविधि न्यायिक प्रक्रिया में बाधा मानी जा सकती है। सेंट्रल मार्केट के व्यापारी और प्रदर्शनकारी प्रशासन की कार्रवाई को धरना समाप्त कराने की कोशिश बता रहे हैं। उनका कहना है कि महिलाएं कई दिनों से शांतिपूर्ण तरीके से धरना दे रही हैं और अब बड़ी संख्या में व्यापारी भी आंदोलन से जुड़ रहे हैं। ऐसे समय में नोटिस जारी कर आंदोलन पर दबाव बनाने का प्रयास किया जा रहा है।

कमिश्नरी पर धरना

इससे पहले शास्त्रीनगर सेंट्रल मार्केट में सैटबैक और सीलिंग प्रकरण में आए सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद व्यापारी और स्थानीय निवासी शनिवार को कमिश्नरी पर धरना-प्रदर्शन करने पहुंचे। स्कीम नंबर-7 के तहत आठ अप्रैल को सील किए गए स्कूलों, नर्सिंग होम और क्लीनिक के संचालक कमिश्नर से मिलने कमिश्नरी पहुंचे, लेकिन मुख्य गेट पर ही उन्हें रोक दिया गया। नाराज संचालकों ने कमिश्नर से प्रतिनिधिमंडल की मुलाकात कराने की मांग उठाई। ऑल इंडिया स्कूल लीडर्स एसोसिएशन के बैनर तले हुए इस प्रदर्शन में सील किए गए स्कूलों के संचालक, नर्सिंग होम संचालक, शिक्षक और चिकित्सक शामिल हुए। सेंट्रल मार्केट के व्यापारियों और महिलाओं ने भी धरना-प्रदर्शन में भाग लेकर सीलिंग कार्रवाई के खिलाफ आवाज उठाई।

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