काम लिया जाता फुल, मजदूरी के नाम पर गुल

Shekhar Sharma
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मेरठ/ नगर निगम समेत तमाम संस्थानों में सफाई कर्मचारियों से आठ घंटे के बजाए १२-१२ घंटे तक काम तो लिया जाता है, लेकिन अतिरिक्त चार घंटे काम लिए जाने की एवजी में कोई मजदूरी उन्हें नहीं दी जाती है। इस मामले में नगर निगम का ट्रेक रिकार्ड सबसे ज्यादा खराब है। हिन्द मजदूर सभा मेरठ काउंसिल के मंत्री विनेश विद्यार्थी ने राज्यसभा सदस्य बाल योगी उमेश नाथ महाराज को प्रेषित एक पत्र में सफाई कर्मचारियों की इस पीड़ा को उजागर किया है। उन्हें बताया गया है कि मेरठ नगर निगम में सफाई कर्मचारियों के जीवन से खिलवाड़ किया जा रहा है। उनका जीवन खतरे में डाला जा रहा है। नगर निगम में गैर सफाई कर्मी पदों पर काम करने वालों को तो नियमित कर दिया गया है, लेकिन सफाई कर्मचारियों के साथ नाइंसाफी की जा रही है। राज्यसभा सदस्य को अवगत कराया गया है कि सफाई कर्मियों को नियमितकरण विषयक शासनादेश के फलस्वरूप नियमित करने से ना केवल वंचित किया गया वरन उन्हें बद से बदत्तर स्थिति में भी पहुंचाने का काम किया गया। कंट्रोक्ट लेबर एक्ट १९७० की धारा ७ व १२ और नियमि २५ का वॉयलेशन कर सफाई कर्मियों का भविष्य ठेकेदारी प्रथा के हवाले कर दिया गया। राज्य सभा सदस्य को जानकारी दी गयी कि सुप्रीमकोर्ट का स्पष्ट आदेश है कि नियुक्ता उन नौकरियों में अनुबंध लागू नहीं करेगा जो स्थायी व नियमित प्रकृति की बारहमासी सेवाओं के अंतर्गत आती हैं। सफाई कार्य भी इस प्रकार की प्रकृति का कार्य है। लेकिन नगर निगम मेरठ प्रशासन को चलाने वाले अफसर तमाम कायदे कानूनों को ताक पर रखकर सफाई कर्मचारियों के जीवन और भविष्य से खिलवाड़ करने पर उतारू हैं।

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