सीजेआई की युवाओं को कॉकरोच वाली टिप्पणी से खिन्न होकर अभिजीत दीपके ने दिया साकार रूप, बीबीसी, अलजजीरा, गार्डियन सरीखे मीडिया हाउस कर चुके हैं कवरेज, गोदी मीडिया में सन्नाटा पसरा
नई दिल्ली। सीजेआई की युवाओं को लेकर आहत करने वाली टिप्पणी से आहत हुए एक युवा ने काॅकरोच जनता पार्टी बनायी और देखते ही देखते उससे युवा जुड़ते चले गए और कारवां बन गया, लेकिन जब कॉकरोच का कारवां खतरा नजर आया तो उसको ब्लॉक करा दिया। ब्लॉक करा दिया तो कॉकरोच ने बैक मार दिया और एक ओर एकाउंट बनाकर कॉकरोज इज बैक सामने आया गया। इस बार दो करोड़ से ज्यादा युवा इससे जुड़ गए यानि यह भारत की सत्ताधारी पार्टी से पर भारी पड़ता नजर आने लगा और यह सिलसिला अभी जारी है। थमने का नाम नहीं ले रहा है। हैरानी तो इस बात की है कि देश और दुनिया के तमाम बुद्धिजीवी इस पार्टी के उन युवाओं को गंभीरता से ले रहे हैं जिन्हें कॉकरोच बताकर मुसीबत बताया गया था। हालांकि कॉकरोच बताने वालों को दीमक बोला गया जो सिस्टम और संविधान तथा न्याय को चाट-चाट कर खोखला कर रही है।
करोड़ों फ्लोअर्स
भारत में सोशल मीडिया पर कॉकरोच जनता पार्टी के फॉलोवर्स अब करोड़ों में हो गए। इंस्टाग्राम पर तो कॉकरोच जनता पार्टी के फॉलोवर्स दो करोड़ के क़रीब हो गए हैं जो सत्ताधारी बीजेपी के फॉलोवर्स से दोगुने हैं। सोशल मीडिया पर बनी कॉकरोच पार्टी की चर्चा भारत में आम लोगों की बातचीत में भी शुरू हो गई है. यहां तक कि अंतरराष्ट्रीय मीडिया में भी इस पर अच्छी ख़ासी चर्चा हो रही हैब्रिटिश न्यूज़ वेबसाइट दा गार्डियन ने कॉकरोच जनता पार्टी पर स्टोरी की है। गार्डियन ने अपनी रिपोर्ट में लिखा है, ”कॉकरोच जनता पार्टी को लाखों भारतीय युवा अपनी हताशा और ग़ुस्से जाहिर कर रहे हैं। अच्छी बात है कि इससे बुद्धिजीवी वर्ग जुड़ गया है।
सोशल मीडिया पर मीम्स की भरमार
कॉकरोच इस बैक के बाद से सोशल मीडिया पर मीम की भरमार है। ”भ्रष्टाचार, बेरोज़गारी और राजनीतिक अव्यवस्था का मज़ाक उड़ाने वाले मीम्स तैर रहे हैं। कॉकरोज को जीवटता का प्रतिक बताया जा रहा है जिसको सीजेआई ने युवाओं के लिए प्रयुक्त किया था। सबसे हैरानी की बात तो यह है कि कॉकरोच से निपटने की कोई काट अभी तक भाजपा का आईटी सेल निकाल नहीं पाया है।कॉकरोच को अब कठिन परिस्थितियों में भी जीवित रहने की क्षमता के लिए जाना जाता है, को संघर्ष और टिके रहने के प्रतीक का प्रतीक माना जाने लगा है। सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने कहा , “यह सब जानबूझकर नहीं हुआ. इसमें लोगों की दिलचस्पी युवाओं के भीतर बढ़ती हताशा को दर्शाती है. असल में युवा बहुत निराश हैं. उनके पास अपनी बात कहने का कोई माध्यम नहीं है. वे सरकार से बेहद नाराज़ हैं।”


