मणिपुर के कांगपोकपी जिले के एक इलाके में तडके चार बजे संदिग्ध उग्रवादियों का हमला, घरों को फूंक डाला
नई दिल्ली। मणिपुर के कांगपोकपी ज़िले एक इलाके में आज सुबह अचानक भड़की हिंसा में तीन लोगों की मौत हो गई। हिंसा की इन ताजा वारदातों के बाद इलाके में सुरक्षा बलों को लगा दिया है। हालांकि सुरक्षा बल उन इलाकों में जाने से परहेज बरत रहे बताए जाते हैं जो इलाके आज सुबह भड़की हिंसा का एपिक सैंटर बताए गए हैं। हिंसा के बाद पूरे कांगपोकपी डर और दशहत का माहौल है। लोगों ने खुद को घरों में कैद कर लिया है।
अंधाधुध फायरिग से दहला इलाका
पुलिस अधिकारियों ने बताया कि आज तड़के करीब चार बजे अचानक प्रभावित इलाका गोलियों की तड़तड़ाहट से दहल उठा। हथियारों से लैस संदिग्ध उग्रवादियों ने लोइबोल खुलेन गांव में अंधाधुंध गोलियां चलाईं, जिसमें 3 लोगों की मौत हो गई है। उन्होंने आगे कहा, “हमलावरों ने कुछ घरों को भी आग लगा दी थी। घरों को आग के हवाले किए जाने के बाद उनमें रहने वाले इधर उधर जान बचाने के लिए दौड़ने लगे। प्रत्याक्षदर्शियों के अनुसार वो मदद के लिए चिल्ला रहे थे, लेकिन संदिग्ध उग्रवादियों के डर से कोई भी मदद के लिए सामने नहीं आ सका। लोग घरों की खिड़कियों को बंद दरार से बाहर का नजारा देख रहे थे। फिलहाल पुलिस की टीम आस-पास के इलाक़ों में हमलावरों की तलाश में अभियान चला रही है।”
मरने वालों की पहचान
पुलिस ने इस हमले में मारे गए लोगों की पहचान लेटखोंगम हाओकिप, उनकी पत्नी टिनमेरी हाओकिप और जांगमिनलाल हाओकिप के तौर पर की है। ये सभी लोइबोल खुलेन गांव के रहने वाले थे। इस बीच कुकी-ज़ो जनजातियों का प्रतिनिधित्व करने वाली शीर्ष संस्था, कुकी इनपी मणिपुर ने इस हमले की निंदा करते हुए नगा चरमपंथी संगठन एनएससीएन -आईएम और उसके कथित प्रॉक्सी समूह जेडयूएफ(के) को ज़िम्मेदार ठहराया है। कुकी इनपी ने एक बयान जारी कर कहा, “यह निहत्थे नागरिकों पर ‘बर्बर हमला’ है। निर्दोष ग्रामीणों की जानबूझकर हत्या और उनके घरों, आजीविका को नष्ट करना, मानवीय गरिमा और मौलिक मानवाधिकारों का गंभीर उल्लंघन है।” उन्होंने कहा, “केंद्र सरकार अपनी सुरक्षा एजेंसियों से इस घटना की तुरंत जांच शुरू करवाए. सरकार बिना किसी देरी के हमलावरों को पकड़कर पीड़ितों को न्याय देने की व्यवस्था करें।”
तीन साल से हिंसा से दहशत
मणिपुर में बीते तीन साल से जारी जातीय तनाव और हिंसा के माहौल में इस तरह की घटनाएं लगातार हो रही हैं. पहले यह हिंसा कुकी जनजाति और मैतेई समुदाय के बीच शुरू हुई और इस साल फरवरी से कुकी और मणिपुर में बसे नगा जनजाति के बीच नई हिंसा शुरू हो गई है। इस ताजा हिंसा को लेकर कुकी जनजाति के जितने भी नागरिक संगठनों ने बयान जारी किया है, उसमें नगा चरमपंथी गुटों को जिम्मेदार ठहराया गया है। हालांकि अब तक नगा चरमपंथी समूहों की तरफ से घटना से संबंधित किसी भी आरोप का जवाब नहीं आया है।


