ट्रंप का समझौते का दावा ईरान की ना

Shekhar Sharma
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अमेरिका बार-बार जंग खत्म करने के लिए बातचीत की बात कर रहा है जबकि ईरान ने इससे साफ इंकार किया है

नई दिल्ली। अमेरिका बार-बार जंग खत्म करने के लिए बातचीत की बात कर रहा है जबकि ईरान ने इससे साफ इंकार किया है।  ईरान के सर्वोच्च नेता के प्रतिनिधि ने चेतावनी दी है कि जब तक तेहरान की शर्तें पूरी नहीं होतीं, तब तक कोई शांति वार्ता नहीं होगी। ओमान में अमेरिकी अधिकारियों और हूती प्रतिनिधियों के बीच गुप्त बैठकें भी हुई हैं। ईरान की सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद (Supreme National Security Council) के सचिव मोहसेन रजाई (Mohsen Rezaei) ने ट्रंप के बयानों को ‘मिश्रित संकेत’ (mixed signals) बताते हुए कहा, “जब तक ईरान की शर्तें पूरी नहीं होतीं, तब तक कोई बातचीत नहीं होगी। पीरियड (बात खत्म)!”

ट्रंप का दावा

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में ओवल ऑफिस में पत्रकारों से कहा, “ईरान बुरी तरह से डील (समझौता) करना चाहता है क्योंकि वह आर्थिक और सैन्य रूप से हर तरह से पिछड़ रहा है”। उन्होंने संकेत दिया कि वह कूटनीति को एक मौका दे रहे हैं, लेकिन साथ ही चेतावनी दी कि अगर बात नहीं बनी तो अमेरिका के पास “अभूतपूर्व बल” के साथ बड़े सैन्य हमले का विकल्प खुला है। अगला हफ्ता तय करेगा कि मध्य पूर्व (Middle East) पूर्ण तबाही की ओर बढ़ेगा या फिर कूटनीति के जरिए युद्धविराम (Ceasefire) का कोई रास्ता निकलेगा।

ईरान को धमकी नहीं मंजूर

ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराक्ची ने कहा कि वे निष्पक्ष बातचीत के लिए तैयार हैं, लेकिन धमकियों के साए में या अपने मिसाइल कार्यक्रम को लेकर कोई समझौता नहीं करेंगे। ईरान का कहना है कि अमेरिका को पहले जंग रोकनी होगी, नौसैनिक नाकाबंदी हटानी होगी, ईरान की फ्रीज की गई संपत्तियों को छोड़ना होगा और युद्ध के नुकसान का हर्जाना देना होगा। हालांकि ईरान सार्वजनिक रूप से इंकार कर रहा है, लेकिन रिपोर्टों के अनुसार पाकिस्तान, ओमान और कतर जैसे देश दोनों के बीच मध्यस्थता (Intermediary) की कोशिशों में जुटे हुए हैं।

यूएस ईरान की अग्नि परीक्षा

अगले हफ्ते न्यूयॉर्क में होने वाली संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) की उच्च-स्तरीय बैठक और उसके इतर खाड़ी सहयोग परिषद (GCC) के देशों के साथ अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की बैठक बेहद महत्वपूर्ण मोड़ पर हो रही है। अमेरिका और ईरान के बीच पिछले 7 महीनों से जारी सीधे युद्ध के बीच यह कूटनीति की सबसे बड़ी परीक्षा होगी। डोनाल्ड ट्रंप अगले हफ्ते न्यूयॉर्क में खाड़ी सहयोग परिषद (GCC) के सभी 6 देशों (सऊदी अरब, यूएई, कतर, बहरीन, कुवैत और ओमान) के नेताओं या विदेश मंत्रियों के साथ एक विशेष बैठक करने वाले हैं। अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, इस बैठक का मुख्य एजेंडा ईरान युद्ध के अगले चरण और उसके बाद की क्षेत्रीय सुरक्षा व्यवस्था तय करना है।

जब होगा आमना सामना

मंगलवार को ट्रंप का संबोधन होगा, जबकि बुधवार को ईरानी राष्ट्रपति पेजेश्कियन UNGA को संबोधित करेंगे। दोनों नेता एक ही मंच पर अपनी बात रखेंगे, जिससे तीखी बयानबाजी देखने को मिल सकती है। अमेरिकी पाबंदियों के कारण ईरानी प्रतिनिधिमंडल न्यूयॉर्क में बेहद कड़े यात्रा प्रतिबंधों (ट्रैवल रिस्ट्रिक्शन) के साए में रहेगा और वे संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय के आसपास ही सीमित रहेंगे। राजनयिक गलियारों में इस बात की भी चर्चा है कि क्या पर्दे के पीछे ओमान या कतर की मध्यस्थता से ट्रंप और पेजेश्कियन के बीच युद्ध रोकने को लेकर कोई अचानक (Secret or Sudden) मुलाकात या बातचीत हो सकती है। वहीं दूसरी ओर अमेरिका ने लगातार दूसरे साल फिलिस्तीनी राष्ट्रपति महमूद अब्बास को न्यूयॉर्क आने का वीज़ा देने से इंकार कर दिया है।

भारत फिलिस्तिनियों के साथ

संयुक्त राष्ट्र में एक विशेष प्रस्ताव पास किया गया है ताकि फिलिस्तीनी राष्ट्रपति वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए महासभा को संबोधित कर सकें। भारत ने इस प्रस्ताव के पक्ष में वोट दिया है, जबकि अमेरिका और इजरायल ने इसके खिलाफ मतदान किया था।

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