नितिन नवीन की टीम में भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष व राज्यसभा सदस्य को शामिल ना किए जाने के निहितार्थ
मेरठ। उत्तर प्रदेश भाजपा के पूर्व अध्यक्ष व राज्यसभा सदस्य डा. लक्ष्मीकांत को नितिन नवीन की टीम में जगह का ना दिया जाना मेरठी भाजपाइयों को खासा खटक रहा है। वो इसके निहितार्थ निकाल रहे हैं। साथ ही सवाल पूछा जा रहा है कि यूपी में बड़े ब्राह्मण चेहरे की अनदेखी कर भाजपा यूपी के ब्राह्मणों को उत्तर प्रदेश विधानभा के साल 2027 में होने जा रहे चुनाव से पहले कौन सा संदेश देने जा रही है। इसके इतर भाजपा के अनुशासिगक संगठन अल्पसंख्यक मोर्चा का जिम्मा बदर अली को दिए जाने जाने को लेकर भी भाजपाई नुकताचीनी कर रहे हैं। उल्लेखनीय है कि राज्यसभा सांसद लक्ष्मीकांत बाजपेयी अभी तक राष्ट्रीय उपाध्यक्ष का दायित्व संभाले हुए थे। उनकी गितनी सदन में सबसे ज्यादा नियमित रहने तथा जनता की आवाज उठाने वाले नेताओं में की जाती है। केवल भाजपा ही नहीं विपक्षी दल वालों भी उनकी इस बात का कायल हैं। हालांकि यह भी कायस लगाए जा रहे हैं कि डा. लक्ष्मीकांत वाजपेयी को पार्टी लोकसभा चुनाव में उतार सकती है। उनका चुनाव में उतारा जाना वेस्ट यूपी ही नहीं पूर्वी उत्तर प्रदेश की कई सीटों पर असर डालेगा।
अलग तेवर खास पहचान
डा. लक्ष्मीकांत वाजपेयी की अलग पहचान की वजह उनके खास तेवर हैं। उनके काम करने का अंदाज दूसरे से जुदा रहा है। पब्लिक के लिए अफसरों को धमकाने में उनका कोई सानी नहीं। उनकी गितनी भाजपा के जनसंघ कालीन और कदावर नेताओं में की जाती है। यह बात अलग है कि नितिन नवीन की टीम का वह हिस्सा नहीं है। मेरठ के संदर्भ में बात करें तो उन्होंने अरबों का काम कराया, जिसमें से मेरठ में 52 करोड़ 40 लाख से ज़्यादा का काम कराया और अभी 13 करोड़ से ज़्यादा का प्रस्ताव बाकी है। राज्यसभा सांसद डॉ. लक्ष्मीकांत वाजपेयी के निरंतर प्रयासों से राजकीय मेडिकल कॉलेज मेरठ के पीएमएसएसवाई ब्लॉक में यूरोलॉजी विभाग हेतु एनएमसी मानकों के अनुसार पदों का सृजन उत्तर प्रदेश शासन ने किया। डॉ. लक्ष्मीकांत वाजपेयी ने राज्यसभा में उत्तर प्रदेश में चार हाईकोर्ट बैंच बनाने की मांग उठाई। उन्होंने कहा कि 50 साल पश्चिमी उत्तर प्रदेश में हाईकोर्ट बेंच की मांग को लेकर 50 साल से आंदोलन हो रहे हैं। इसके बाद भी इस दिशा में कोई ठोस प्रयास नहीं हो रहे हैं। रेलवे रोड से टीपीनगर बाईपास इकलौत वाजपेयी की देन है।
कोई खास वजह या फिर मिलेगा बड़ा
डा. वाजपेयी को नितिन नवीन की टीम से बाहर रखने की कोई खास वजह है या फिर उन्हें कुछ और भी बड़ा मिलने जा रहा है। जहां तक काम की बात है तो वो डा. वाजपेयी का ही कार्यकाल था जब विधानसभा चुनाव के बाद भाजपा यूपी में सत्तसीन हुई थी। इसके अलावा प्रदेश भाजपाध्यक्ष के तौर पर उनकी संगठनात्मक कार्य किसी से छिपे नहीं है। उन्हें एक अच्छा प्रशासनिक समझ वाला नेता माना जाता है। फिर क्या वजह रही होगी जो उनके तुजर्बे का फायदा नहीं उठाया जा रहा है। वेस्ट बंगल के चुनाव के दौरान तमाम लोगों को वहां भेजा गया, लेकिन उन्हें ड्राप किया गया। इन तमाम घटनाक्रमों के पीछे क्या वजह हो सकती है। या फिर जैसा कि सुनने में आ रहा है कि डा. वाजपेयी लोकसभा चुनाव में उतारे जा सकते हैं।


