ऋषभ में साइबर सेफ्टी पर कार्यशाला

Shekhar Sharma
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‘साइबर सुरक्षा एवं कक्षा शिक्षण में एआई के उपयोगÓ की टीचरों व स्टाफ को दी गयी जानकारी, ऋषभ में साइबर सेफ्टी व पढ़ाई में एआई यूज पर कार्यशाला

मेरठ। छावनी मंदिर मार्ग स्थित ऋषभ एकाडेमी में ‘साइबर सुरक्षा एवं कक्षा शिक्षण में एआई के उपयोगÓ विषय पर एक कार्यशाला का सफल आयोजन किया गया। इस कार्यशाला में सभी शिक्षक व स्टाफ शामिल हुए। कार्यशाला के संसाधन व्यक्ति एवं विद्यालय के उप-प्रधानाचार्य पवन कपूर ने साइबर सुरक्षा के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि साइबर अपराधों से बचाव का सबसे प्रभावी उपाय जागरूकता है। उन्होंने विभिन्न प्रकार की साइबर धोखाधड़ियों की जानकारी दी तथा उनसे बचाव के आवश्यक सुरक्षा उपायों पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने प्रतिभागियों को यह भी बताया कि राष्ट्रीय साइबर अपराध हेल्पलाइन नंबर 1930 नागरिकों की सहायता के लिए चौबीस घंटे उपलब्ध रहता है।

एआई का बढ़ता यूज

कार्यशाला के द्वितीय सत्र में शिक्षा के क्षेत्र में एआई की बढ़ती भूमिका पर चर्चा की गई। शिक्षकों को एआई तकनीकों को सीखने तथा उन्हें शिक्षण-अधिगम प्रक्रिया में प्रभावी रूप से एकीकृत करने के लिए प्रेरित किया। पवन कपूर ने विभिन्न उपयोगी एआई टूल्स का परिचय कराया तथा उनके शैक्षिक उपयोगों को सरल एवं व्यावहारिक उदाहरणों के माध्यम से समझाया। विद्यालय के प्रधानाचार्य शरद त्यागी ने भी उपस्थित शिक्षकों को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में साइबर सुरक्षा और एआई साक्षरता दोनों ही अत्यंत आवश्यक हैं। उन्होंने कार्यशाला की सराहना करते हुए उप-प्रधानाचार्य पवन कपूर को सफल आयोजन हेतु शुभकामनाएं प्रदान कीं। कार्यशाला का समापन प्रश्नोत्तर एवं संवाद सत्र के साथ हुआ, जिसमें प्रतिभागियों ने अपनी जिज्ञासाओं का समाधान प्राप्त किया

डा. संजय जैन ने डाला प्रकाश

ऋषभ सचिव डा. संजय जैन ने एआई के यूज पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए बताया कि एआई शिक्षकों को छात्रों के टेस्ट स्कोर और गतिविधि का सटीक विश्लेषण देता है। इससे शिक्षकों को पता चल जाता है कि किस छात्र को किस विषय या कौशल में अतिरिक्त सहायता की आवश्यकता है, प्रत्येक विद्यार्थी की सीखने की यात्रा अनूठी होती है। इस तथ्य को ध्यान में रखते हुए कि प्रत्येक विद्यार्थी अपनी गति से सीखता है, 39 राज्यों ने अपने ‘एवरी स्टूडेंट सक्सीड्स एक्टÓ (ईएसए) योजना में व्यक्तिगत शिक्षण को शामिल किया है। शिक्षकों पर विद्यार्थियों के अनुरूप शिक्षण अनुभव तैयार करने का दबाव बढ़ता जा रहा है, लेकिन पुरानी कार्यप्रणालियों और चल रहे प्रशासनिक कार्यों के कारण उन्हें समय निकालना मुश्किल हो रहा है, पाठ योजनाओं, उपस्थिति योजनाओं और पारिवारिक पत्रों के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता का उपयोग करना, शिक्षकों की सहायता करने के तीन उदाहरण मात्र हैं। 

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