गुरुदेव के जयकारों से गुंजायमान हो उठा। श्रद्धालु गाजे-बाजे, ढोल-नगाड़ों और धार्मिक ध्वजाओं के साथ झूमते-गाते हुए मुनिश्री की अगवानी
मेरठ। उत्तर प्रदेश के मेरठ महानगर में आज 7 अक्टूबर 2026 की सुबह एक अभूतपूर्व आध्यात्मिक उल्लास देखने को मिला। प्रसिद्ध जैन मुनि संस्कार प्रणेता आचार्य श्री 108 सौरभ सागर जी महाराज ने भारी संख्या में श्रद्धालुओं की मौजूदगी के बीच वेस्ट एंड रोड स्थित ऋषभ एकाडेमी परिसर में भव्य मंगल प्रवेश किया। इससे पहले ऋषभ एकाडेमी के सचिव डा. संजय जैन मेरठ के जैन समाज के हजारों लोगों के साथ सदर दुर्गाबाड़ी स्थित प्राचीन जैन मंदिर पहुंचे और वहां सत्कार कर मुनि आचार्य श्री 108 सौरभ सागर जी महाराज के संग ऋषभ एकाडेमी की ओर प्रस्थान किया। पूरे मार्ग में सैकड़ों श्रद्धालु हाथ जोड़े महाराज श्री के सत्कार के लिए मौजूद रहे। आचार्य श्री के आगमन को लेकर पूरे मेरठ के जैन समाज में पिछले कई दिनों से भारी उत्साह और व्यापक तैयारियां चल रही थीं। आचार्य श्री सौरभ सागर जी महाराज का यह मंगल विहार श्री दिगंबर जैन मंदिर, सदर से प्रारंभ होकर ऋषभ एकाडेमी तक हुआ। सुबह से ही श्रद्धालु सदर जैन मंदिर परिसर में जुटना शुरू हो गए थे। जैसे ही आचार्य श्री ने ऋषभ एकाडेमी की ओर विहार शुरू किया, पूरा मार्ग गुरुदेव के जयकारों से गुंजायमान हो उठा। श्रद्धालु गाजे-बाजे, ढोल-नगाड़ों और धार्मिक ध्वजाओं के साथ झूमते-गाते हुए मुनिश्री की अगवानी कर रहे थे। मार्ग में जगह-जगह श्रद्धालुओं ने पाद-प्रक्षालन कर और आरती उतारकर आचार्य श्री का आशीर्वाद लिया और डा. संजय जैन आदि उन्हें आदरपूर्वक ऋषभ एकाडेमी लेकर पहुंचे। इस पावन अवसर पर ऋषभ एकाडेमी प्रबंधन समिति के पदाधिकारियों व प्रधानाचार्य तथा समस्त स्टाफ सहित मेरठ जैन समाज के अनेक गणमान्य पदाधिकारी, महिलाएं और युवा बड़ी संख्या में उपस्थित रहे. गुरुदेव के इस मंगल आगमन से पूरा परिसर जैन धर्ममय और ऊर्जामय हो गया है।
आचार्य श्री के मंगल प्रवचन
सुबह 8:00 बजे से 9:00 बजे तक मुख्य पंडाल में आचार्य श्री के दिव्य प्रवचन हुए। उन्होंने उपस्थित जनसमूह को संबोधित करते हुए आध्यात्मिक जीवन, अच्छे संस्कार, जीवन में मर्यादा और सकारात्मक सोच अपनाने का दिव्य मार्ग दिखाया। इसमें भारी संख्या में सदर जैन समाज सहित पूरे महानगर से जैन श्रद्धालु तथा ऋषभ एकाडेमी के बच्चे मौजूद रहे।
संस्कार शिविर और हीलिंग सत्र
ऋषभ एकाडेमी में महाराज श्री के प्रवचन के बाद बाद सुबह 9:00 से 11:00 बजे तक विशेष ‘संस्कार शिविर’ का आयोजन किया गया. इस शिविर में युवाओं और बच्चों को नैतिक मूल्यों से जोड़ने की प्रेरणा दी गई. इसी क्रम में डॉ. यशिका जैन ने आयुर्वेद के माध्यम से ‘इमोशनल हीलिंग’ (Emotional Healing) और ‘साउंड हीलिंग’ (Sound Healing) के वैज्ञानिक व आध्यात्मिक महत्व की जानकारी दी।


