





तमाम लोगों ने आयोजन से जुड़े ऋषभ के सचिव डा. संजय जैन, दिनेश चंद्र जैन, राजेन्द्र जैन और अजय जैन का आभार
मेरठ। ऐतिहासिक और धार्मिक नगरी मेरठ के छावनी मंदिर मार्ग स्थित ऋषभ एकेडमी ऋषभ एकेडमी परिसर में उस समय भक्ति का सागर उमड़ पड़ा, जब जैन धर्म के प्रख्यात संत, राष्ट्रसंत मुनि श्री 108 सौरभ सागर जी महाराज का ससंघ मंगल प्रवेश हुआ। मुनि श्री के मेरठ आगमन की सूचना मिलते ही पूरे शहर का सकल जैन समाज उनके स्वागत और दर्शनों के लिए ऋषभ एकेडमी पहुंच गया। वहां इतना अधिक संख्या में श्रद्धालुजन पहुंच गए थे कि तिल तक रखने की जगह नहीं मिली। मुनिश्री के इस शानदार धार्मिक आयोजन के लिए तमाम लोगों ने आयोजन से जुड़े ऋषभ के सचिव डा. संजय जैन, दिनेश चंद्र जैन, राजेन्द्र जैन और अजय जैन का आभार भी जताया। मुनिश्री के आगमन पर यह कार्यक्रम केवल मुनिश्री सौरभ सागर जी महराज के प्रवचन मात्र भर नहीं था, इस कार्यक्रम के गागर में सागर भरा हुआ था, जिसकी शुरूआत प्रात मुनिश्री के आगमन के उपरांत मंगल प्रवचन और संस्कार शाला से हुई। उसके उपरांत डा. याचिका जैन ने बगैर किसी दवाओं के असाध्य रोगों के इलाज का कैंप भी लगाया। समाज की श्रद्धा भक्ति और उत्साह का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि ऋषभ एकाडेमी के परिसर में पैर रखने की जगह नहीं थी और हर तरफ “गुरुवर के चरणों में नमोस्तु-नमोस्तु” और “सौरभ सागर जी महाराज की जय” के जयकारे गूंज रहे थे।
भव्य स्वागत और मंगलाचरण
मुनि श्री के आगमन पर जैन समाज के वरिष्ठ पदाधिकारियों, महिलाओं और युवाओं ने पलक-पावड़े बिछाकर उनका स्वागत किया। ऋषभ एकेडमी के द्वार पर पैर प्रक्षालन और आरती उतारी गई। इसके बाद मुनि श्री ससंघ मंच पर विराजमान हुए, जहाँ दीप प्रज्वलन और मंगलाचरण के साथ मुख्य धार्मिक सभा की शुरुआत हुई। भारी भीड़ को नियंत्रित करने के लिए समाज के स्वयंसेवकों को काफी मशक्कत करनी पड़ी।
मुनि श्री के अमृत वचन “संस्कार ही जीवन की असली पूंजी है”
अपने देशना (प्रवचन) में मुनि श्री सौरभ सागर जी महाराज ने बिखरे हुए समाज और परिवारों को जोड़ने पर बल दिया। उन्होंने कहा कि आज के आधुनिक युग में इंसान भौतिक साधनों की दौड़ में अपनी संस्कृति और संस्कारों को भूलता जा रहा है। मुनि श्री ने अपने ओजस्वी विचारों से उपस्थित जनसमूह को मंत्रमुग्ध करते हुए कहा:
“यदि बच्चों को बचपन में संस्कार नहीं दिए गए, तो बड़ी से बड़ी संपत्ति भी व्यर्थ हो जाएगी। माता-पिता का यह परम कर्तव्य है कि वे अपनी संतानों को उच्च शिक्षा के साथ-साथ नैतिक और धार्मिक मूल्यों से भी सिंचित करें।”
बच्चों की ‘संस्कार शाला’ रही विशेष आकर्षण
इस आयोजन का सबसे महत्वपूर्ण और अनूठा हिस्सा रही “बच्चों की संस्कार शाला”। मुनि श्री के सानिध्य में आयोजित इस विशेष पाठशाला में सैकड़ों बच्चों ने भाग लिया।
- नैतिक मूल्यों का पाठ: खेल-खेल में और लघु कथाओं के माध्यम से बच्चों को माता-पिता का आदर करने, जीव दया रखने, सत्य बोलने और व्यसनों से दूर रहने का संकल्प दिलाया गया।
- गुरुवर का दुलार: मुनि श्री ने बच्चों से सीधे संवाद किया और उनसे जैन धर्म के मूल सिद्धांतों (अहिंसा, अस्तेय, अपरिग्रह) पर आधारित छोटे-छोटे प्रश्न पूछे। सही उत्तर देने वाले बच्चों को गुरुवर का विशेष आशीर्वाद और प्रसाद प्राप्त हुआ।
सकल जैन समाज की सहभागिता
इस भव्य धार्मिक आयोजन में मेरठ के विभिन्न क्षेत्रों जैसे रेलवे रोड, तीरगरान, जैन नगर, बुढ़ाना गेट, सदर, शास्त्रीनगर, जागृति विहार और साकेत से हजारों की संख्या में जैन श्रद्धालु शामिल हुए। ऋषभ एकेडमी प्रबंधन और जैन समाज की कार्यकारिणी ने मुनि श्री को शास्त्र भेंट किए और श्रीफल अर्पण कर आशीर्वाद लिया। मेरठ में जैन समाज के नाम पर जितनी वरिष्ठ नाम हैं खासकर वो सभी इस कार्यक्रम में मौजूद रहे।


