भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले अपने अब तक के सबसे निचले स्तर पर
नई दिल्ली।कच्चे तेल की कीमतों में उछाल और मध्य पूर्व संकट के कारण भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले अपने अब तक के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया है। रुपए का गिरना तमाम कोशिशों के बाद भी थमता नजर नहीं आ रहा है। आर्थिक जानकारों का कहना है कि यह अभी जारी रहने वाला है और संभव है कि एक डॉलर सौ रुपए का हो जाए। रुपया अपने ऑल-टाइम लो पर पहुंच गया है। भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले ऐतिहासिक गिरावट दर्ज करते हुए पहली बार 95 के स्तर को पार कर गया है। वित्तीय साल 2025-26 में अब तक 9.88 फीसदी की गिरावट के साथ यह बीते चौदह सालों यानि मोदी कार्यकाल में सबसे बड़ी गिरावट दर्ज की गयी है।
यह है वजह
सरकार ने रुपए में दर्ज की गयी इस बड़ी गिरावट के लिए विदेशी फंड्स की लगातार निकासी, पश्चिम एशिया में तनाव और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों को जिम्मेदार ठहराया है। पश्चिम एशिया में संघर्ष (युद्ध) के कारण कच्चे तेल की कीमतों में तेजी और भारतीय बाजार से विदेशी फंड की भारी निकासी।
कारोबारियों पर बड़ी मार
भारतीय रुपया कमजोर होने की वजह से उन कारोबारियों पर बड़ी मार पड़ रही है जो विदेशों से सामान मंगाते हैं। रुपये के कमजोर होने से भारत के लिए कच्चा तेल, इलेक्ट्रॉनिक्स और अन्य विदेशी सामान का आयात महंगा हो गया है। रिजर्व बैंक की तमाम कोशिशें भी रुपए का मूल्य गिरने से नहीं रोक पा रही हैं। यह भारी गिरावट घरेलू मुद्रास्फीति को बढ़ा सकती है और देश के आयात खर्च को प्रभावित कर सकती है, जिससे आर्थिक विकास पर असर पड़ने की संभावना है। भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा हस्तक्षेप के बावजूद, वैश्विक दबाव के कारण रुपए पर कमजोरी जारी है।


