
“Sex is not dirty, it is natural.”
सहमति एक बार की नहीं होती। हर बार, हर स्टेज पर दोनों पक्षों की सहमति और कम्युनिकेशन जरूरी
नई दिल्ली। सेक्स कोई पापा नहीं। “सेक्स गंदा नहीं है, यह प्राकृतिक है। गंदी सोच हो सकती है, लेकिन सेक्स खुद में नहीं।” यदि दोनों ओर से सहमति है तो किसी से भी यह किया जा सकता है। सेक्स केवल क्षणिक नहीं बल्कि यह स्लो-स्लो लेने वाला प्लेजर यानि आनंद है। (Sex) शारीरिक और भावनात्मक जुड़ाव का एक स्वाभाविक हिस्सा है, जिसके लिए आपसी सहमति, विश्वास और बातचीत महत्वपूर्ण है। सुरक्षित यौन संबंधों के लिए कंडोम का उपयोग करना आवश्यक है, जो स्वास्थ्य सुरक्षा सुनिश्चित करता है। स्वस्थ यौन जीवन के लिए शारीरिक, मानसिक और भावनात्मक स्वास्थ्य का ध्यान रखना जरूरी है, और किसी भी प्रकार के दबाव के बिना आपसी सम्मान सबसे ऊपर है।
सेक्स से पहले सहमति जरूरी
सहमति एक बार की नहीं होती। हर बार, हर स्टेज पर दोनों पक्षों की सहमति और कम्युनिकेशन जरूरी है। बिना बातचीत के अच्छा सेक्स संभव नहीं। सेक्स स्पेशलिस्ट बताते हैं कि सेक्स सिर्फ पेनिट्रेशन नहीं है। एरोजेनस जोन्स को समझना, बॉडी को एक्सप्लोर करना, मास्टरबेशन से खुद को जानना बहुत जरूरी है। कई महिलाएं नहीं जानतीं कि उन्हें क्या पसंद है, क्योंकि उन्हें कभी सिखाया ही नहीं गया। जिन्होंने आनंद लेने सीख लिया उनका संपूर्ण जीवन समृद्ध व आनंदित हो जाएगा।
कामसूत्र का अध्ययन है जरूरी
कामसूत्र महर्षि वात्स्यायन द्वारा रचित प्राचीन भारतीय ग्रंथ है, जिसे विश्व की प्रथम यौन संहिता माना जाता है। यह केवल यौन संबंध या सेक्स पोजीशन की किताब नहीं है, बल्कि धर्म, अर्थ और काम (त्रिवर्ग) के संतुलित जीवन, प्रेम, रिश्तों, सामाजिक व्यवहार और सुखमय जीवनशैली का विस्तृत दर्शन है। वात्स्यायन ने इसे लगभग तीसरी शताब्दी ईस्वी में लिखा। इसमें कुल 7 अधिकरण (भाग), 36 अध्याय, 64 प्रकरण और लगभग 1250 सूत्र/श्लोक हैं। जीवन के तीन प्रमुख लक्ष्यों (धर्म, अर्थ, काम) की प्राप्ति।
नीरसता नहीं लाएं आनंद
जीवन में नीरसता नहीं आनंद लाना चाहिए। कामसूत्र यही सिखाता है। 64 कलाओं (चतुष्षष्टि कला) का वर्णन — ये कलाएं केवल सेक्स नहीं, बल्कि जीवन को समृद्ध बनाने वाली कला-कौशल हैं (जैसे गान, वाद्य, नृत्य, चित्रकला, पाकशास्त्र, भाषा ज्ञान, ज्योतिष, वास्तु आदि)। स्त्री-पुरुष दोनों को इन्हें सीखना चाहिए ताकि वे आकर्षक और सुखद साथी बन सकें।
रति क्रीड़ा में ये है जरूरी
रति क्रीड़ा यानि सेक्स जितना जरूरी है उतनी ही जरूरी रति क्रीड़ा में की जाने वाली क्रियाएं हैं। आलिंगन (8 प्रकार), चुम्बन (4 मुख्य प्रकार), दंशन (काटना), नखक्षत (नाखून से खरोंचना), प्रहार यानि थप्पड़ मारना आदि। सौंदर्य वृद्धि, शक्ति बढ़ाने, वशीकरण और राग प्रत्यानयन (खोया हुआ आकर्षण लौटाना) के आयुर्वेदिक/तांत्रिक उपाय ये सभी जरूरी हैं। तभी जीवन में आनंद आएगा।


