ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर US नरम

Shekhar Sharma
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स्ट्रेट हार्मूज जल मार्ग एक बार फिर से खोल सकता है ईरान, नए सिरे से बातचीत के लिए तलाशे जा रहे हैं रास्ते, डोनाल्ड ट्रंप हाथ ने नहीं जाने देना चाहते बातचीत का मौका

नई दिल्ली। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने सेंट पीटर्सबर्ग में रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से मुलाकात की और कहा कि तेहरान विचार कर रहा है। वहीं दूसरी ओर यह भी कहा जा रहा है कि अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ईरान के साथ बातचीत के रास्ते को हाथ से नहीं जाने देना चाहते हैं। यहां तक कि ईरान के परमाणु कार्यक्रम के सवाल पर भी अब यूएस ने नरम पड़ जाने के संकेत दिए हैं। जानकारों का कहना है कि अमेरिकनों के रवैये में इस बदलाव की वजह ईरानी विदेश मंत्री को मास्को पहुंचना और वहां पुलिन से मुलाकात करना है। मॉस्को ने जो कुछ ईरान को लेकर खासतौर से वहां पुर्ननिर्माण को लेकर वादा किया है उसके बाद अमेरिका के रवैये में बदलाव देशा जा रहा है। दरअसल ईरान के साथ लड़ाई में विश्व व्यापारी फजीहत के बाद अब अमेरिका का प्रयास है कि जो कुछ पत्ते हाथ में बाकि रह गए हैं उनसे सधी हुई चाल चली जाए। जानकारों का कहना है कि ईरान के साथ यदि अमेरिका की दोबारा बातचीत शुरू होती है तो इस बार की बातचीत में ईरानी परणामु कार्यक्रम का जिक्र नहीं होगा। बदले में ईरान स्ट्रेट हाेर्मूज खोल देने के लिए राजी हो जाएगा। दुनिया भी यही चाहती है।

एक हो तमाम मुसलमान मुल्क

इटली की प्रधानमंत्री मेलोनी चाहती हैं कि दुनिया के मुसलमान देश इजरायल के खिलाफ एकजुटता का प्रदर्शन करें। उन्होंने कहा इजरायल के खिलाफ सभी प्रकार के कारोबारी और रानजीतिक रिश्ते खत्म किए जाने चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि वह एक मां हैं और मासूम बच्चें के हत्थ्यारों के साथ कभी भी खड़ी नहीं हो सकती हैं। वहीं दूसरी ओर इजराइल के धुर दक्षिणपंथी नफ्ताली बेनेट और मध्यमार्गी विपक्षी नेता यायर लैपिड ने घोषणा की है कि वे उस गठबंधन को फिर से शुरू करेंगे जिसने आखिरी बार 2021 में बेंजामिन नेतन्याहू की सरकार को गिरा दिया था, जिसने उस समय देश के नेतृत्व पर नेतन्याहू के 12 साल के शासन का अंत कर दिया था। इजरायलियों का एक बड़ा हिस्सा नेतन्याहू का विरोधी है।

सीज फायर का फायदा क्या

लेबनान और इजरायल के बीच सीफ फायर का एलान अमेरिका ने कराया लेकिन इजरायली हमले जारी हैं। इससे पहले की यदि बात करें तो नवंबर 2024 में हुए “युद्धविराम” के बाद, इज़राइल ने अगले 15 महीनों तक लेबनान पर समय-समय पर हमले जारी रखे, हालांकि उनकी तीव्रता कम होती गई, और इन हमलों में सैकड़ों लोग मारे गए। हिज़्बुल्लाह ने 2 मार्च तक कोई जवाबी कार्रवाई नहीं की, यह घटना अमेरिकी-इज़राइली हमलों में ईरानी सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की हत्या के कुछ दिनों बाद हुई, जिन्हें लेबनानी शिया समूह बहुत सम्मान देता था। ठीक उसी दिन लेबनानी सरकार ने हिज्बुल्लाह की सैन्य हरकतों पर रोक लगा दी। इसके बावजूद, इज़राइल ने लेबनान की राजधानी बेरूत समेत कई जगहों पर अपने हमले तेज़ कर दिए, लेबनानी क्षेत्र पर अपना आक्रमण और कब्ज़ा बढ़ा दिया और 12 लाख से ज़्यादा लोगों को विस्थापित कर दिया। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने 16 अप्रैल को 10 दिनों के लिए युद्धविराम की घोषणा की, जिसे बाद में बढ़ाकर तीन सप्ताह कर दिया गया। फिर भी, दक्षिणी लेबनान में भीषण लड़ाई जारी है।

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