इजरायल और ईरान के बीच पहले से ज्यादा भीषण होगी लड़ाई, दहकेगा मिडिल ईस्ट
नई दिल्ली। मार्च-अप्रैल 2026 में ईरान और इज़राइल (अमेरिका के सहयोग से) के बीच भीषण सैन्य संघर्ष जारी है, जिसमें दोनों पक्ष एक-दूसरे के सैन्य ठिकानों, परमाणु सुविधाओं और ढांचागत सुविधाओं को निशाना बना रहे हैं। तेहरान में रेवोल्यूशनरी गार्ड्स के मुख्यालय और मिसाइल साइटों पर हमले के साथ-साथ, इज़राइल ने ईरान के रक्षा सिस्टम को भारी नुकसान पहुंचाया है। यह तनाव लगातार बढ़ रहा है और कभी भी पूर्ण युद्ध में बदल सकता है। अमेरिका और ईरान के बीच यदि समझौता हो भी जाता है तो भी मिडिल ईस्ट दहकता रहेगा। इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने एक पोस्ट में तुर्की के राष्ट्रपति रेसेप तैयप एर्दोगन की आलोचना करते हुए कहा है कि इजरायल ईरान और उसके सहयोगियों से लड़ना जारी रखेगा। “मेरे नेतृत्व में इज़राइल ईरान के आतंकी शासन और उसके सहयोगियों से लड़ना जारी रखेगा,” नेतन्याहू ने X पर एक पोस्ट में लिखा। उन्होंने आगे एर्दोगन पर ईरान के साथ “समझौता” करने और कुर्द नागरिकों के “नरसंहार” के लिए जिम्मेदार होने का आरोप लगाया।
दहकता रहेगा मिडिल ईस्ट
जो देश मिडिल ईस्ट में शांति और स्टे्रट हाेर्मूज को खोलने की उम्मीद लगाए बैठे थे इजरायली पीएम ने उनकी उम्मीदों पर प्रहार किया है। हालांकि यूएस के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप बार-बार इजरायल को रोके जाने की बात कह रहे हैं, लेकिन ट्रंप का कितना असर होता है इस बात का अंदाजा नेतन्याहू की एक्स पर लिखी गयी पोस्ट से लगाया जा सकता है।
पोप की नसीहत
पोप लियो XIV ने ईरान पर अमेरिका-इजराइल युद्ध के संबंध में अब तक के अपने सबसे कड़े शब्दों का प्रयोग करते हुए, उस “सर्वशक्तिमानता के भ्रम” की निंदा की है, जिसके बारे में उनका कहना है कि यही इस संघर्ष को बढ़ावा दे रहा है। “स्वार्थ और धन की पूजा बहुत हो गई!” अमेरिका में जन्मे पहले पोप लियो ने सेंट पीटर बेसिलिका में एक शाम की प्रार्थना सभा के दौरान कहा। “शक्ति प्रदर्शन बहुत हो गया! युद्ध बहुत हो गया!”हालांकि पोप ने अपनी प्रार्थना में सीधे तौर पर अमेरिका या ट्रंप का जिक्र नहीं किया, लेकिन उनका संदेश ट्रंप और अमेरिकी अधिकारियों की ओर निर्देशित प्रतीत होता है, जिन्होंने अमेरिकी सैन्य श्रेष्ठता का दावा किया है।


