कर्नल डॉ. नरेश कुमार (से.नि.) ने अपनी दूसरी पी.एच.डी. उपाधि अर्जित की
मेरठ। सेवानिवृत्त कर्नल डॉ. नरेश कुमार, जो भारतीय सेना के एक अत्यंत अनुभवी एवं समर्पित अधिकारी रहे हैं। अपने सैन्य जीवन के दौरान उन्होंने नागालैण्ड, अरुणाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में कार्य किया तथा 1971 के भारत-पाक युद्ध में सक्रिय भूमिका निभाई। इसके अतिरिक्त, भारतीय शांति सेना (IPKF) के अंतर्गत श्रीलंका में तैनाती के दौरान उन्होंने चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में उत्कृष्ट नेतृत्व का परिचय दिया। साथ ही कारगिल युद्ध में भी उनकी सहयोगात्मक भूमिका रही। उन्होंने सेवा निवृत्ति के उपरांत भी अपने ज्ञान और नेतृत्व क्षमता का उपयोग समाज एवं शिक्षा के क्षेत्र में निरंतर किया है। नवम्बर 2000 में सेना से अवकाश प्राप्त करने के बाद से वे विभिन्न प्रतिष्ठित शैक्षणिक संस्थानों में अध्यापन, प्रशासन एवं नेतृत्व की महत्वपूर्ण जिम्मेदारियाँ सफलतापूर्वक निभाते रहे हैं। वर्तमान में वे मेरठ स्थित दीवान ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशंस में कार्यकारी निदेशक के पद पर अपनी सेवाएँ प्रदान कर रहे हैं।
दीक्षांत समारोह में उपाधि
सामाजिक सरोकारों के प्रति उनकी गहरी संवेदनशीलता उन्हें निरंतर अध्ययन एवं शोध के लिए प्रेरित करती रही है। स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय, मेरठ में 26 अप्रैल को आयोजित दीक्षांत समारोह में गुजरात के राज्यपाल आचार्य देवव्रत द्वारा उनको यह उपाधि प्रदान की गई। उनका शोध कार्य कचरा बीनने वाले वर्ग की वास्तविक जीवन परिस्थितियों, उनके संघर्षों तथा उनके उत्थान हेतु संभावित समाधान पर केंद्रित है, जो समाज के एक उपेक्षित वर्ग की समस्याओं को उजागर करता है। यह उनकी दूसरी पी.एच.डी. की उपाधि है।
उल्लेखनीय है कि इससे पूर्व भी डॉ. नरेश कुमार मानव संसाधन प्रबंधन विषय में पी.एच.डी. कर चुके हैं। उनकी यह उपलब्धि न केवल उनके सतत् अध्ययन और शोध के प्रति समर्पण को दर्शाती है, बल्कि समाज एवं शिक्षा जगत में उनके बहुआयामी योगदान को भी रेखांकित करती है।


